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Delhi: बुराड़ी आत्महत्या कांड का 5वां साल, कैसे दी थी 11 लोगों ने जान, अब कैसा है आसपास का माहौल?

Delhi Burari Case: दिल्ली के बुराड़ी सामूहिक आत्महत्या कांड को कौन भूल सकता है। 11 लोगों के एक साथ सुसाइड ने पूरे देश को सकते में डाल दिया था। आज ही के दिन यानि 1 जुलाई को इस आत्महत्या कांड को पांच साल बीत चुके हैं। 1 जुलाई 2018 के बाद आज वहां कैसा माहौल है, जानिए?

बुराड़ी के जिस घर की हम आज भी पांच साल बाद बात कर रहे हैं, वो संत नगर की गली नंबर-2 का मकान नंबर 137 है। यहीं एक साथ 11 लोगों ने सामूहिक खुदकुशी की थी। 1 जुलाई से पहले 30 जून 2018 की रात को यहां रहने वाले भाटिया परिवार के 11 लोगों ने अपनी जान दे दी थी, जिसके अगले दिन उनके शव मिलने से हड़कंप मच गया था।

Delhi Burari Case

राजस्थान का रहने वाला था परिवार

बता दें कि मूल रूप से यह परिवार राजस्थान के चित्तौड़गढ़ का रहने वाला था, लेकिन करीब 20 साल पहले दिल्ली आकर बस गया। घर के नीचे ग्राउंड फ्लोर पर ही ललित और भुवनेश की किराने और प्लाईवुड की दुकान थी। भाटिया परिवार में सबसे बड़ी सदस्य नारायणी देवी थीं, जिनकी उम्र 77 साल थी। उनके तीन बेटे थे, जिनमें ललित और भुवनेश को छोड़ एक बेटा राजस्थान में ही रहता है।

मास सुसाइड का खुलासा अगले दिन यानी 1 जुलाई 2018 को हुआ, जब भुवनेश ने किराने की दुकान नहीं खोली। बताया जाता था कि भुवनेश हमेशा सुबह 5 बजे के आसपास अपनी शॉप खोल लेता था, लेकिन जब काफी देर हो गई तो एक पड़ोसी ने घर जाकर देखा तो वहां का मंजर डरा देने वाला था।

जानकारी के मुताबिक उस वक्त घर के अंदर 11 लोगों की लाश पड़ी थी। 9 लोग छत की ग्रिल के सहारे फंदे पर लटके हुए थे, जबकि एक महिला खिड़की के सहारे फंदे से लटकी हुई थी। वहीं बुजुर्ग महिला का शव घर में मंदिर के पास पड़ा हुआ था।

11 लोगों में नारायण देवी (77), उनकी बेटी प्रतिभा (57) और दो बेटे भावनेश (50) और ललित भाटिया (45), भावनेश की पत्नी सविता (48) और उनके तीन बच्चे मीनू (23), निधि (25) और ध्रुव (15), ललित भाटिया की पत्नी टीना (42) और उनका 15 वर्ष का बेटा शिवम, प्रतिभा की बेटी प्रियंका (33) भी फंदे पर लटके मिले थे।

सुसाइड के बाद जब लाशों को देखा गया तो लगभग सभी के हाथ-पैर व मुंह बंधे हुए थे और आंखों पर रुई रखकर पट्टी बंधी थी। पुलिस को जांच में पूजा स्थल से 9 मोबाइल फोन और डायरी मिली, जिसमें आध्यात्मिकता, मोक्ष, रीति-रिवाज और कुछ तारीखों का जिक्र था। एक साल से भी ज्यादा वक्त तक चली जांच में हत्या का फिर चोरी के लिए हत्या का कोई सुराग नहीं लगा।

उन्होंने 30 जून की रात को चुना और एक रिचुअल का पालन करने को कहा गया, जिससे उनको उनके पिता गोपाल दास की आवाज सुनाई देगी, वो उनको दर्शन देंगे, जिससे उनकी सारी परेशानियां दूर हो जाएंगी और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होगी। साथ ही दावा किया गया कि परिवार के किसी भी सदस्य को कुछ नहीं होगा, सब को गोपाल दास बचा लेंगे। लेकिन सबकी मौत हो गई।

अब कैसा है वहां का माहौल?

इस घटना के करीब 1 साल से ज्यादा के वक्त तक लोग उनके मकान से गुजरते हुए भी डरते थे। लोगों का कहना था कि यहां से अजीब-अजीब आवाजें आती हैं। हालांकि इस घर में कुछ किराएदार भी आए, लेकिन ज्यादा दिन नहीं टिक पाए। हालांकि 2020 में इस मकान को मोहन नाम का नया किराएदार मिल गया था, जो बीते चार सालों से अपने परिवार के साथ यहां रह रहा है। गली का माहौल पहले जैसा हो गया, लेकिन जब भी इस घटना को याद किया जाता है तो लोग सिहर उठते हैं।

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