Delhi Blast: संदिग्धों ने ऐसे रची थी सीरियल ब्लास्ट की खौफनाक साजिश, 32 कारों में थी ब्लास्ट की प्लानिंग
Delhi Blast Update: दिल्ली के लाल किले के पास हुए भीषण कार ब्लास्ट मामले में जांच एजेंसियों ने एक बड़े आतंकी साजिश का पर्दाफाश किया है। गुरुवार, 13 नवंबर को खुफिया एजेंसियों ने खुलासा किया कि यह धमाका एक बड़े सीरियल ब्लास्ट की साजिश का हिस्सा था, जिसमें कुल 32 पुरानी गाड़ियों में बम लगाकर दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में एक साथ विस्फोट करने की योजना बनाई गई थी।
इस धमाके में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है, और जांच के बाद यह साफ हो गया है कि यह साजिश का एक हिस्सा था, क्योंकि एक बड़े नेटवर्क की शुरुआत थी।

32 गाड़ियों में बम लगाने की योजना
खुफिया एजेंसियों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने पुरानी गाड़ियों में विस्फोटक भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। ANI के हवाले से सूत्रों ने बताया कि अब तक जांच में यह सामने आया है कि एक i20 और एक इकोस्पोर्ट गाड़ी को हमले के लिए तैयार किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक,i20 और इकोस्पोर्ट के बाद यह जानकारी मिली कि 32 और पुरानी गाड़ियों को बम से लैस करने की तैयारी चल रही थी। इन सभी गाड़ियों का इस्तेमाल एक साथ सीरियल ब्लास्ट के लिए किया जाना था।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, इन गाड़ियों को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में खड़ा कर कोऑर्डिनेटेड ब्लास्ट (समानांतर धमाके) करने की साजिश थी। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां हैरान हो गई हैं और अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इन 32 गाड़ियों में से कुछ पहले ही तैयार की जा चुकी थीं।
अल-फलाह हॉस्टल बना साजिश का केंद्र
जांच में अब फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज का बॉयज़ हॉस्टल भी शक के घेरे में आ गया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह हॉस्टल बिल्डिंग नंबर 17 - संदिग्धों का मीटिंग पॉइंट और साजिश का अड्डा था। यहीं से जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मॉड्यूल ने अपनी आतंकी योजना को आकार दिया।
कमरा नंबर 13, जो मुजम्मिल शकील के नाम पर था, इस साजिश का मुख्य केंद्र बताया जा रहा है। मुजम्मिल, डॉ. उमर-उन-नबी का करीबी सहयोगी था - वही उमर नबी जिसने रेड फोर्ट के पास कार ब्लास्ट को अंजाम दिया था।
यूनिवर्सिटी लैब से केमिकल लाकर बनाए गए विस्फोटक
खुफिया जांच में यह भी सामने आया है कि साजिशकर्ताओं ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की केमिस्ट्री लैब से कुछ रासायनिक पदार्थ चोरी कर उन्हें कमरे में लाने की योजना बनाई थी। यहीं कमरे में अमोनियम नाइट्रेट और नाइट्रिक ऑक्साइड जैसे तत्वों को मिलाकर विस्फोटक सामग्री तैयार की जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियों ने अब उस कमरे को सील कर दिया है और वहां से कई रासायनिक पदार्थों, डिजिटल उपकरणों और पेन ड्राइव्स को जब्त किया गया है। सूत्रों का कहना है कि इन पेन ड्राइव्स में धमाका तकनीक, लोकेशन डेटा और संभावित टारगेट्स की सूची से जुड़ी जानकारी मिल सकती है।
जांच का दायरा बढ़ा, कई राज्यों में छापेमारी
दिल्ली पुलिस, एनआईए और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ी-कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। फरीदाबाद, दिल्ली, अलीगढ़ और लखनऊ में कई ठिकानों पर छापेमारी जारी है। जांच अधिकारी इस बात की भी पड़ताल कर रहे हैं कि क्या इस साजिश के पीछे विदेशी फंडिंग या किसी बड़े संगठन का हाथ था।
सूत्रों के मुताबिक, अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ में व्हाइट-कॉलर नेटवर्क और डॉक्टर, छात्र और प्रोफेशनल्स से जुड़ी पृष्ठभूमि सामने आई है। डॉ. उमर नबी और उसके साथियों ने कथित तौर पर सोशल मीडिया और एनक्रिप्टेड चैट ऐप्स के जरिए एक गुप्त नेटवर्क तैयार किया था।
इस बड़े खुलासे के बाद दिल्ली और एनसीआर में सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट मोड पर हैं। पुराने वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले डीलरों, स्क्रैप मार्केट और गैराजों पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। संदिग्ध वाहनों की सूची तैयार की जा रही है और सीमावर्ती इलाकों में चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।












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