Delhi Blast अंजाम देने वाले आतंकियों में हुई थी खूब लड़ाई, पैसों को लेकर भी उमर का था झगड़ा
Delhi Blast: दिल्ली ब्लास्ट मामले में सामने आई जांच रिपोर्ट में एक के बाद एक कई हैरान करनेवाली डिटेल सामने आ रही है। मीडिया चैनल NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, धमाकों को अंजाम देने वाले प्रमुख आरोपी उमर का अपने ही गैंग के दूसरे साथियों से भारी मतभेद था। घटना को अंजाम देने से ठीक पहले भी इनका आपस में बड़ा झगड़ा हुआ था। यह लड़ाई पैसों के अलावा विचारधारा की वजह से भी थी। उमर का हमले को अंजाम देने में शामिल दूसरे साथियों से कई और मुद्दों पर भी गहरा मतभेद था।
जांच टीम से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन सबके बीच काम करने के तरीकों और पैसों के बंटवारे को लेकर गंभीर मतभेद थे। इन्हीं कारणों से आतंकी मॉड्यूल में तनाव लगातार बढ़ रहा था। घटना वाले दिन से कुछ दिन पहले भी इनके बीच में बड़ा झगड़ा हुआ था।

Delhi Blast: इस्लामिक स्टेट से प्रभावित था डॉक्टर उमर
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, उमर ने फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की थी। वह कश्मीरी डॉक्टर उमर-उन-नबी से प्रभावित था। उसका इस्लामिक स्टेट (ISIS) की कट्टर विचारधारा की तरफ झुकाव था। उसके दूसरे साथी अलकायदा समर्थक समूहों की सोच के करीब थे। विचारधारा का यह मतभेद गहरा था और इस वजह से तकरार भी होती थी। जांच में यह भी पता चला है कि उमर खुद को बाकी साथियों से ज़्यादा कट्टर और मानता था। यही वजह थी कि वह समूह के फैसलों से अक्सर असहमति जताता था।
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Umar का पैसों को लेकर भी हुआ था झगड़ा
एनआईए की जांच में पता चला है कि उमर की अपने बाकी साथियों से नाराजगी इस कदर बढ़ गई थी कि उसने बोलचाल भी बंद कर दी थी। साल की शुरुआत में अपने साथी और धमाकों के आरोपी अदील अहमद रथर की शादी में जाने से भी मना कर दिया था। पैसों को लेकर भी वह काफी तल्ख था। उससे जब खर्चों का हिसाब माांगा गया, तो वह बेहद उग्र हो गया था। इतना ही नहीं हमले को अंजाम देने के तरीके को लेकर भी विवाद था। उमर चाहता था कि धमाकों की ज्यादा से ज्यादा चर्चा हो, इसलिए इसे बहुत बड़े स्तर पर नाटकीय ढंग से अंजाम दिया जाना चाहिए।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, विस्फोटकों और अन्य लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए लगभग 26 लाख रुपये जुटाए गए थे। इसमें अदील अहमद रथर ने 8 लाख, मुजफ्फर अहमद रथर ने 6 लाख, शाहीन सईद ने 5 लाख, मुजम्मिल शकील ने 5 लाख और उमर ने 2 लाख का योगदान दिया था। उमर और उसके बाकी साथियों के बीच संबंध ठीक करने की कोशिश की गई थी और अक्टूबर में उसे काजीगुंड भेजा गया था।
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