दिल्ली विधानसभा में सुरंग के बाद अब मिला फांसी घर, हैंगिंग हाउस को लेकर स्पीकर ने कही ये चौंकाने वाली बात
दिल्ली विधानसभा में सुरंग के बाद अब मिला फांसी घर, हैंगिंग हाउस को लेकर स्पीकर ने कही ये चौंकाने वाली बात
नई दिल्ली, 14 दिसंबर: दिल्ली विधानसभा के परिसर के अंदर अब सुरंग के बाद फांसी घर यानी हैंगिंग हाउस मिला है। सोमवार को दिल्ली विधानसभा परिसर के अंदर एक फांसी का घर मिलने से हड़कंप मच गया है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता राम निवास गोयल ने पुष्टि की कि एक खोखली दीवार को गिराए जाने के बाद फांसी का घर मिला है। 2016 में सुरंग का पता चलने के बाद फांसी घर का अनुमान लगाया था, जो अब 13 दिसंबर 2021 को मिला है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल ने कहा कि पुरातत्व विभाग को सूचित किया जाएगा और निरीक्षण किया जाएगा।

कैसे पता चला हैंगिंग हाउस के बारे में?
दिल्ली सरकार की योजना है कि ब्रिटिश काल की सुरंग व फांसी घर आम लोगों के लिए खोला जाए। सुरंग को दिल्ली विधानसभा की जमीन के नीचे काफी समय पहले खोजा गया था। बताया जाता है कि सुरंग और फांसी घर दोनों ब्रिटिश काल की वास्तुकला के अनुसार बनाए गए हैं। राम निवास गोयल ने बताया कि एक कार्यकर्ता ने उन्हें एक दीवार के बारे में बताया जो अपेक्षाकृत नई लग रही थी। उन्होंने कहा, "जब हमने दीवार पर दस्तक दी, तो यह खोखली लग रही थी और हमने इसे तोड़ने का फैसला किया, जिसके बाद ये फांसी का घर मिला है।''

2016 में खोजी गई थी सुरंग
दिल्ली विधानसभा में सबसे पहले सुरंग 2016 में खोजी गई थी। सुरंग का ऐतिहासिक महत्व अभी तक स्थापित नहीं हुआ है लेकिन यह अनुमान लगाया जाता है कि सुरंग विधान सभा को लाल किले से जोड़ती है। फांसी का कमरा दिल्ली विधानसभा (पुराने सचिवालय) को ऐतिहासिक लाल किले से जोड़ने वाली ब्रिटिश-युग की सुरंग के महीनों बाद दिल्ली विधानसभा के परिसर में पाया गया है।

सितंबर 2021 में भी मिला था दिल्ली विधानसभा के सुरंग
वहीं सितंबर 2021 में भी सुरंग मिले हैं। 2021 में सुरंग मिलने के बाद राम निवास गोयल ने मीडिया से कहा था कि मौत की सजा पाए दोषियों को लाने के लिए अंग्रेजों ने सुरंग का इस्तेमाल किया होगा। हालांकि पुरातत्व विभाग ने अभी तक सुरंग पर एक बयान जारी नहीं किया है। भवन का निर्माण 1912 में किया गया था और 1913 से 1926 के बीच केंद्रीय विधान सभा में रखा गया था।

1926 से चल रही है दिल्ली विधानसभा
गोयल ने दिल्ली विधानसभा भवन के इतिहास के बारे में बात करते हुए आगे कहा, ''यह विधानसभा 1926 तक चलती थी और 1912 तक इसे केंद्रीय विधान सभा के रूप में जाना जाता था। बाद में इसे एक अदालत में बदल दिया गया। लाल किले से क्रांतिकारियों को एक सुरंग के माध्यम से यहां लाया गया था।'' गोयल के मुताबिक, ''अंग्रेजों ने इमारत को एक अदालत के रूप में इस्तेमाल किया और परिसर के अंदर भारतीय क्रांतिकारियों का परीक्षण करने का फैसला किया है। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष ने घोषणा की कि सत्र नहीं होने पर इमारत को पर्यटकों के लिए खोल दिया जाएगा।
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ब्रिटिश काल में बनाई गई थी ये इमारत
दिल्ली विधानसभा की इमारत ब्रिटिश काल के 1912 में स्थापित की गई थी। इसे ई मोंटेग थॉमस द्वारा इंपीरियल लेजिस्लेटिव काउंसिल और बाद में सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली के लिए तैयार किया गया था। जब तक कि दिल्ली में भारत के नवनिर्मित संसद भवन का उद्घाटन 18 जनवरी 1927 को नहीं हुआ था।












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