Delhi Politics: इस्तीफा और फिर एक तरफा वापसी, क्या 2013 को दोहराने वाले हैं अरविंद केजरीवाल?
Delhi AAP Politics: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने रविवार को पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा की है, उनके इस बयान से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। केजरीवाल का यह कदम विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी की रणनीति बताई जा रही है।
केजरीवाल के इस इस्तीफे को एक अहम रणनीतिक कदम माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो इससे पार्टी की चुनाव से पहले छवि सुधरेगी। भाजपा को मुश्किल होगी साथ पार्टी भी बढ़ेगी। साथ ही केजरीवाल से इस्तीफे से 2013 की वो तस्वीर भी सामने आ रही है। जिसके बाद पार्टी एक तरफा जीत के साथ सत्ता में आई थी।

2013 में 49 दिन की सरकार
अरविंद केजरीवाल ने जब पहली बार 2013 में दिल्ली के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था, तब भी उनपर लालच और अस्थिरता के आरोप लगे थे। उस समय भी उन्होंने यह कहते हुए इस्तीफा दिया था कि जनलोकपाल बिल को पास नहीं कर पाने के कारण उन्हें पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने वापसी की और एक बार फिर दिल्ली की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाई।
2013 के बाद मजबूत वापसी
दिल्ली में 4 दिसंबर 2013 को सभी 70 सीटों पर विधानसभा चुनाव हुए। जिसमें भाजपा 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। हालांकि, बहुमत किसी के पास नहीं था। AAP को 28 और कांग्रेस को 8 सीटें मिलीं। जिसके बाद कांग्रेस के समर्थन से केजरीवाल ने मुख्यमंत्री बनते हुए सरकार बनाई। हालांकि, 49 दिन बाद दोनों पार्टियों का गठबंधन टूट गया।
तीसरी बार भी किया कमाल
इसके बाद 7 फरवरी 2015 को फिर से विधानसभा चुनाव हुए। इसमें AAP ने 67 सीटों पर जीत कर प्रचंड बहुमत हासिल किया। इसी के साथ भाजपा सिर्फ तीन सीटों पर सिमट गई। पांच साल बाद फरवरी, 2020 के विधानसभा चुनाव में AAP ने कुल 70 सीटों में 62 सीटों पर जीत हासिल की है। 8 सीटें भाजपा जीत सकीं।
क्या है केजरीवाल का मास्टर प्लान?
इसी तरह इस बार भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह इस्तीफा केवल एक रणनीति है, जिससे केजरीवाल आगामी चुनावों में सहानुभूति लहर पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं? क्या यह एक राजनीतिक खेल है, जिसमें वह खुद को "केंद्र के खिलाफ लड़ने वाले योद्धा" के रूप में पेश कर रहे हैं?












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