बुराड़ी सामूहिक मौत का मास्टरमाइंड कौन? ललित, पापा की रूह या फिर कोई और?

दिल्ली। बुराड़ी के एक घर में परिवार की 7 महिलाओं और 4 पुरुषों की लाश फंदे से लटकने की घटना के रहस्य की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं लेकिन अभी भी बहुत कुछ ऐसा है जिसका पता नहीं चल पाया है। पुलिस के मुताबिक, इस पूरी घटना के पीछे छोटे भाई ललित का बहुत बड़ा हाथ है। पुलिस का मानना है कि रजिस्टर में सारी बातें रोज वो ही लिखता था कि परिवार के किस सदस्य को क्या करना है, अगर कोई सदस्य उसे फॉलो नहीं करता था तो उसे सजा भी सुनाई जाती थी। यह सब ललित करता था और रोज रजिस्टर में लिखता था जिसे सभी भगवान का आदेश मानते थे। पुलिस का कहना है कि मनोरोगी हो चुके ललित को लगता था कि पिता की आत्मा उससे बात करती थी और पिता उसके सपनों में आते थे जबकि उनकी मौत हो चुकी थी। घर में पूरे परिवार को मौत के मुंह में धकेलने के प्लान का किसका था, इस मामले में पुलिस अभी भी उलझी हुई है।

पापा की आत्मा से बात करता था ललित!

पापा की आत्मा से बात करता था ललित!

करीब दस साल पहले ललित भाटिया के पिता गोपाल दास भाटिया की मौत हो चुकी है। लोगों से पूछताछ में पुलिस को पता चला कि ललित पिता की आत्मा से बात करता था। पांच साल से मौन व्रत पर चल रहे ललित की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, ऐसा पुलिस का कहना है। ललित ही पूरे परिवार को चलाता था और घर का मुख्य कर्ता-धर्ता वही था। क्राइम ब्रांच के मुताबिक, 2013 से ही रजिस्टर में कोई रोज किसी के हवाले से लिखता था कि घर के किस सदस्य को क्या करना है, जो इस आदेश को फॉलो नहीं करता था उसे सजा भी मिलती थी। जैसे रजिस्टर में एक जगह लिखा है, 'तुमसे कहा था कि आज दो जोत जलाना, मगर तुमने ऐसा नहीं किया, नीतू और प्रभजोत अगले दो दिन तक कूलर में सोएंगे, इनकी यही सजा है।' यह रजिस्टर घर में पूजास्थल में पास रखा रहता था जिसमें लिखी बातों को भगवान का आदेश मानकर घर के सभी लोग उसको फॉलो करते थे। रजिस्टर में एक जगह परिवार के सदस्यों को संबोधित कर लिखा गया था, 'ललित के स्वास्थ्य की चिंता मत करना, मेरे आने से फर्क पड़ता है।' यह बात शायद उसी पापा की आत्मा के हवाले से लिखी गई थी।

'शनिवार को मैं आऊंगा, सारी तैयारी रखना'

'शनिवार को मैं आऊंगा, सारी तैयारी रखना'

रजिस्टर में उस रात का जिक्र था जब घर के सभी लोग फांसी पर लटके थे। लिखा था, 'शनिवार को मैं आऊंगा सारी तैयारी रखना'। यह भी लिखा था कि साधना के दौरान भगवान आएंगे और सबको बचा लेंगे। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि रजिस्टर में किसके बारे में लिखा गया कि 'शनिवार को मैं आऊंगा'- क्या यह भगवान के बारे में था, या पिता की आत्मा के बारे में या फिर कोई बाहरी आदमी इस विशेष साधना को कराने घर में आने वाला था? 2013 से लिखे जा रहे इस रजिस्टर के शुरुआती पन्नों में आत्मा का परमात्मा से मिलन के बारे में लिखा है। इस घर में पूजा-पाठ, अनुष्ठान, साधना की गतिविधियां बढ़ती चली गईं और 2015 के बाद पूरा परिवार बहुत ज्यादा अध्यात्मिक हो चला था। रजिस्टर से पता चलता है कि शायद पूरा परिवार भगवान से मिलने के लिए धार्मिक गतिविधियों में डूबा हुआ था, इसके लिए ललित पिता की आत्मा से कथित निर्देश लेता था और रजिस्टर में लिखता था।

26 जून को लिखी गई सामूहिक मौत की पटकथा

26 जून को लिखी गई सामूहिक मौत की पटकथा

30 जून शनिवार की रात में 12 बजे के बाद भगवान से मिलने के लिए परिवार ने मौत के जिस अनुष्ठान को शुरू किया, उसके बारे में सभी बातें 26 जून को ही रजिस्टर में लिख ली गई थीं। फंदे पर झूलती लाशों के कान में रुई, मुंह और आंखों पर पट्टी, बरगद की तरह फंदे से लटककर पूजा समेत घटनास्थल की सारी बातें रजिस्टर में लिखी बातों के अनुसार थीं। मोक्ष पाने के लिए मरना जरूरी है, मरने में डर और कष्ट होता है लेकिन अगर आंख, कान बंद हो जाएं तो डर और कष्ट कम हो जाते हैं, इस तरह की बातें रजिस्टर में लिखी हुई थीं। सबको यकीन था कि भगवान आएंगे और उनको बचा लेंगे जैसा कि रजिस्टर में लिखा था लेकिन वैसा हुआ नहीं। ललित और उसकी पत्नी के हाथ खुले हुए थे। पुलिस का कहना है कि दोनों ने सबको फंदे से लटकाया और पैरों के नीचे से स्टूल को खींचा। बाद में दोनों खुद भी फंदे से झूल गए। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बताया गया कि सभी की मौत फंदे से लटकने की वजह से हुई। किसी के शरीर पर प्रतिरोध करने का कोई निशान नहीं था।

सामूहिक मौत का मास्टरमाइंड कौन?

सामूहिक मौत का मास्टरमाइंड कौन?

वैसे बुराड़ी के रहस्यमय केस को सुलझाने में पुलिस अभी भी लगी हुई है। इस घटना का मास्टरमाइंड कौन है, ललित या कोई और...पुलिस फिलहाल ललित के मास्टरमाइंड होने की थ्योरी से ज्यादा इस बात की जांच में लगी है कि क्या इस परिवार को सामूहिक खुदकुशी के लिए किसी बाहरी ने उकसाया? 'शनिवार को मैं आऊंगा, सारी तैयारी रखना', रजिस्टर में लिखी इस बात की तस्दीक पुलिस कर रही है कि वारदात की उस रात को क्या कोई बाहरी घर में आया था? अभी तक किसी के घर में आने या किसी के जाने का सुराग नहीं मिल पाया है। उस रात घर में जाने वाला आखिरी शख्स ललित था जो टॉमी को घुमाकर लौटा था। पुलिस जांच कर रही है कि क्या घर में किसी और रास्ते से कोई घुस सकता है? दोनों भाइयों के संपत्ति के वसीयत की भी जांच चल रही है कि कहीं किसी बाबा या किसी और ने सारी संपत्ति अपने नाम तो नहीं करा ली और उसके बाद ये सब किया?

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