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Delhi Air Pollution: दिल्ली-NCR से हटेंगे कोयला उद्योग? सुप्रीम कोर्ट ने अब मोदी सरकार से मांगा जवाब

Supreme Court on Delhi Air pollution: दिल्ली-एनसीआर की जहरीली हवा को लेकर अब मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब तलब किया है कि क्या कोयले से चलने वाले उद्योगों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर शिफ्ट किया जा सकता है। अदालत ने साफ संकेत दिया है कि अगर हवा को साफ रखना है तो बड़े और कड़े फैसले लेने होंगे।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Surya Kant) की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली शामिल हैं, ने कहा कि वह 12 मार्च को वाहन प्रदूषण से जुड़े मुद्दों पर भी विस्तार से सुनवाई करेगी।

Supreme Court on Delhi Air pollution

300 किलोमीटर का दायरा क्यों बना मुद्दा? (300 Km Proposal)

सुनवाई के दौरान यह सुझाव सामने आया कि दिल्ली से 300 किलोमीटर के भीतर कोई नया कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट स्थापित न किया जाए। इस प्रस्ताव पर अदालत ने पर्यावरण, पेट्रोलियम और ऊर्जा मंत्रालयों से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने Ministry of Environment, Forest and Climate Change, Ministry of Petroleum and Natural Gas और Ministry of Power को संयुक्त रूप से प्रस्ताव तैयार करने को कहा है। अदालत का कहना है कि पहले यह पहचाना जाए कि एनसीआर में कौन-कौन से उद्योग कोयले पर निर्भर हैं और उनके लिए वैकल्पिक ईंधन क्या हो सकता है।

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निर्माण की धूल और वाहन प्रदूषण भी जांच के दायरे में

सिर्फ उद्योग ही नहीं, अदालत ने निर्माण और तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल पर भी सख्ती दिखाई है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) द्वारा सुझाए गए उपायों पर सभी संबंधित पक्षों से प्रतिक्रिया मांगी गई है। पीठ ने साफ किया कि 12 मार्च को वाहन प्रदूषण पर भी गंभीर चर्चा होगी, क्योंकि एनसीआर में प्रदूषण का बड़ा कारण ट्रैफिक और डीजल-वाहन भी हैं।

राज्यों को सार्वजनिक नोटिस जारी करने का आदेश (Notice to States)

अदालत ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान सरकारों को निर्देश दिया है कि वे एनसीआर में चल रहे कोयला आधारित उद्योगों को सार्वजनिक नोटिस जारी करें। इन नोटिस के जरिए सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी।

कोर्ट ने कहा कि ये नोटिस अदालत की ओर से जारी माने जाएंगे और राज्यों को "एक्शन टेकन प्लान" दाखिल करना होगा, जिसमें बताया जाए कि क्या सुझाव मिले और उन पर क्या कार्रवाई की गई।

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दिल्ली सरकार से भी मांगा ठोस प्लान (Action Plan by Delhi Government)

अदालत ने दिल्ली सरकार को भी निर्देश दिया है कि वह आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना पेश करे। कोर्ट ने कहा कि जिन एजेंसियों को कार्रवाई करनी है, उन्हें चिन्हित किया जा चुका है, अब ठोस अमल दिखना चाहिए।

अगली सुनवाई 12 मार्च को (Next Hearing on March 12)

सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को 12 मार्च से पहले अपनी-अपनी स्थिति रिपोर्ट और प्रस्ताव दाखिल करने को कहा है। साफ है कि अदालत अब दिल्ली-एनसीआर की हवा को लेकर केवल सलाह नहीं, बल्कि ठोस और समयबद्ध कार्रवाई चाहती है।

अगर 300 किलोमीटर वाला प्रस्ताव लागू होता है, तो यह एनसीआर की औद्योगिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। सवाल यही है कि क्या प्रदूषण से जूझती राजधानी को राहत दिलाने के लिए सरकारें अब निर्णायक कदम उठाएंगी।

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