• search
देहरादून न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

प्रसिद्ध इतिहासकार लाल बहादुर वर्मा का कोरोना से हुआ निधन, देहरादून के अस्पताल में ली अंतिम सांस

|

देहरादून, मई 18: 10 जनवरी,1938 को बिहार के छपरा जिले में जन्मे प्रसिद्ध इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा का निधन हो गया। प्रो. लाल बहादुर वर्मा पिछले कुछ दिनों से कोरोना वायरस से संक्रमित थे और उनका इलाज देहरादून स्थित इंद्रेश अस्पताल में चल रहा था। रविवार (16 मई) की देर रात उन्होंने इंद्रेश अस्पताल में अंतिम सांस ली। बता दें कि लाल बहादुर वर्मा लंबे समय तक इलाहाबाद में रहे तकरीबन चार वर्ष पहले देहरादून शिफ्ट हुए थे।

    Coronavirus India Update: कोरोना संक्रमित इतिहासकार Lal Bahadur Verma का निधन | वनइंडिया हिंदी

     historian Lal Bahadur Verma passing away from Corona

    देहरादून में लाल बहादुर वर्मा अपनी बेटी के साथ रह रहे थे। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण 5 मई को उन्हें इंद्रेश अस्पताल में भर्ती कराया था। शुक्रवार को उनकी स्थिति में सुधार था। लेकिन रविवार रात में हृदयगति रुक गई। लाल बहादुर वर्मा किडनी की बीमारी से ग्रसित थे। सोमवार को देहरादून में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। परिवार में उनकी पत्नी, बेटा और बेटी है। उनके निधन की जानकारी बाद से साहित्यकारों में शोक की लहर फैल गई।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लाल बहादुर वर्मा ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा आनंदनगर, गोरखपुर से ली थी। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से स्नातक, लखनऊ विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर और गोरखपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधियां प्राप्त की थी। इतना ही नहीं, फ्रांस की राजधानी पेरिस तक उच्च शिक्षा हासिल करने वाले प्रोफेसर वर्मा ने इतिहास लेखन को एक नई ऊंचाई दी। लेकिन वामपंथी विचारधारा के प्रति उनकी अगाध निष्ठा की वजह से शायद राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।

    बता दें कि प्रो.वर्मा मौजूदा दौर के उन गिने-चुने लोगों में से थे जिनकी पुस्तकें देश के अधिकतर विश्वविद्यालयों के किसी न किसी पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही हैं। एक मार्क्सवादी विचारक, प्रखर इतिहासकार, सुयोग्य शिक्षक और संपादक के रूप में प्रोफेसर लाल बहादुर वर्मा हमेशा याद किए जाएंगे। आपको बता दें कि लाल बहादुर वर्मा, गोरखपुर विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष रहे और शहर की सामाजिक, सांस्कृति और राजनीतिक गतिविधियों में अपना योगदान देते रहे। वहां इलाहाबाद गए।

    ये भी पढ़ें:- Corona Curfew in Uttarakhand: 25 मई तक फिर बढ़ाया गया कर्फ्यू, जानिए किसे मिलेगी छूट और क्या रहेगा बंदये भी पढ़ें:- Corona Curfew in Uttarakhand: 25 मई तक फिर बढ़ाया गया कर्फ्यू, जानिए किसे मिलेगी छूट और क्या रहेगा बंद

    1970 में फ्रांस से वापस आए थे भारत
    प्रो. लाल बहादुर वर्मा फ्रांस से 1970 के दशक में भारत आये, जबकि वो आराम से वहां भी पढ़ा सकते थे। वो गोरखपुर विश्वविद्यालय में आ गये और युवाओं के साथ मिलकर एक नए तरह समाज के निर्माण के लिए, साथ ही प्रखर बौद्धिक गतिविधियों के लिए काम करते रहे। प्रोफेसर वर्मा जब गोरखपुर विश्वविद्यालय में इतिहास के प्रोफेसर थे तो उन दिनों उनके संपादकत्व में निकलने वाली पत्रिका 'भंगिमा' प्रगतिशील सोच के छात्रों, अध्यापकों और लेखकों-कवियों के बीच काफी चर्चित थी।

    English summary
    historian Lal Bahadur Verma passing away from Corona
    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts
    तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
    Enable
    x
    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X