उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल के राजनीतिक जीवन पर एक नजर
पोखरियाल को भाजपा के सीएम पद के चेहरों में सबसे अहम माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह 2012 में कांग्रेस की सरकार आने से पहले भाजपा के मुख्यमंत्री रहे भुवनचंद्र खंडूरी की बढ़ती भी उम्र है।
देहरादून। इस समय हरिद्वार सीट से सांसद रमेश पोखरियाल भले ही 2014 के चुनाव के बाद केंद्र में ज्यादा सक्रिय हैं लेकिन उन्हें भाजपा के सीएम पद के चेहरों में सबसे अहम माना जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह 2012 में उत्तराखंड में कांग्रेस की सरकार आने से पहले भाजपा के मुख्यमंत्री रहे भुवनचंद्र खंडूरी की उम्र है। खंडूरी की उम्र 82 साल की हो चुकी है। जबकि पोखरियाल की उम्र 57 साल की है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि भाजपा को बहुमत मिलने पर रमेश पोखरियाल प्रदेश के मुख्यमंत्री हो सकते हैं। आइए, एक नजर डालते हैं रमेश पोखरियाल निशंक के राजनीतिक सफर पर।

1959 में उत्तराखंड के पोड़ी गढ़वाल में जन्में रमेश पोखरियाल राजनीतिक में लगभग तीन दशकों का सफर तय कर चुके हैं। उत्तराखंड के पांचवे मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल राजनेता होने के साथ-साथ साहित्याकार भी हैं और उन्होंने कई कविता और कहानी संग्रह लिखे हैं। रमेश पोखरियाल सबसे पहले 1991 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कर्णप्रयाग सीट से विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 1993 और 1996 में भी रमेश पोखरियाल कर्णप्रयाग से विधायक चुने गए। 2002 में उत्तराखंड के अलग राज्य बन जाने के बाद थालीसेन विधानसभा से पोखरियाल लड़े लेकिन चुनाव हार गए। 2007 के चुनाव में वो थालीसेन से विधायक चुन लिए गए।
2007 में भाजपा की सरकार बनी तो खंडूरी मुख्यमंत्री बने और पोखरियाल को चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और आयुष मंत्री बनाया गया। 2009 में वो हरिद्वार सीट से लोकसभा चुनाव लड़े लेकिन कांग्रेस के हरीश रावत से हार गए। 2009 में ही उन्हें खंडूरी की जगह उत्तराखंड का पांचवां मुख्यमंत्री बनाया गया। पोखरियाल 24 जून 2009 से 10 सितंबर 2011 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2011 में फिर से बीसी खंडूरी को भाजपा का मुख्यमंत्री बनाया गया। दो साल के कार्यकाल में युवा मुख्यमंत्री के तौर पर पोखरियाल ने अपनी अच्छी छाप छोड़ी।
2012 में रमेश पोखरियाल विधानसभा चुनाव हार गए लेकिन 2014 में हरिद्वार से लोकसभा चुनाव जीतकर वो लोकसभा पहुंचे। पिछले ढाई साल से वो दिल्ली की राजनीति में हैं, लेकिन चुनाव के बाद वो उत्तराखंड आ सकते हैं। इसकी एक बड़ी वजह उनको मोदी सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी का ना मिलना भी है। उत्तराखंड चुनाव में रमेश पोखरियाल भाजपा के लिए बड़ी भूमिका में होंगे। रमेश पोखरियाल निशंक ने करीब 40 कहानी और कविका संग्रह लिखे हैं। उनको देश-विदेश में कई सम्मान मिल चुके हैं।












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