भारत के साथ समझौते से पहले ब्रिटिश संसद ने कहा, जल्दबाजी ना करे सरकार

लंदन, 06 जुलाई। ब्रिटेन की संसदीय समिति ने कहा कि ब्रेक्जिट के बाद सरकार व्यापार समझौतों को जरूरत से ज्यादा ना करे. समिति ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ उसके साथ उसके व्यापार समझौतों में काफी कमियां रही हैं और सांसदों को समझौतों के आकलन के लिए ज्यादा समय मिलना चाहिए.
ब्रिटेन ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौते पर बातचीत खत्म की है जबकि भारत, कनाडा और मेक्सिको के साथ व्यापार समझौतों पर बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. ब्रिटिश संसद की इंटरनेशनल ट्रेड कमेटी ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया के साथ समझौते में बड़ी छूट दी गई और इस बात को सुनिश्चित नहीं किया गया कि देश को उन छूटों से कितना फायदा होगा.
ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ समझौतों के संदर्भ में स्कॉटिश नेशनल पार्टी के सांसद एंगस मैकनील ने कहा, "सरकार को जनता के सामने ईमानदार होना चाहिए. मंत्रीगण जितने दावे कर रहे हैं, इस समझौते से उतने फायदे नहीं होने जा रहे हैं."
उन्होंने कहा कि ब्रेक्जिट के बाद से यह पहला व्यापार समझौता था जो आने वाले समय के लिए एक उदाहरण बनता है. मैकनील ने कहा, "यह जरूरी है कि सरकार इस अनुभव से सबक ले और अगली बार और ज्यादा मोलभाव करे ताकि यूके के आर्थिक क्षेत्रों और देश के अन्य हिस्सों के लिए अधिक लाभ और कम नुकसान सुनिश्चित किया जा सके."
कमेटी ने कहा कि किसानों को चिंता है कि कृषि उत्पादों से लगभग सभी कर हटाने के दौरान कृषि क्षेत्र को समुचित सुरक्षा नहीं दी गई है और जो लाभ होंगे वे इतने बड़े नहीं होंगे. ब्रिटिश व्यापार मंत्री ऐन-मरी ट्रेवेलयान बुधवार को संसदीय समिति के समक्ष उपस्थित होकर सवालों का सामना करेंगी. सरकार का कहना है कि व्यापार समझौतों में देश के पर्यावरण या खाद्य सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया गया.
समिति व्यापार समझौतों को रोक तो नहीं सकती है लेकिन उन्होंने कहा कि अगर सरकार आकलन के लिए अधिक समय देने से इनकार करती है तो वे समझौते लागू करने का समय बढ़ाने के लिए मतदान कराएंगे.
भारत के साथ व्यापार समझौता
अप्रैल में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत का दौरा किया था और तब दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते को दिवाली तक पूरा करने की बात कही गई थी. दोनों ही देश इस समझौते से बड़ी उम्मीदें लगाए बैठे हैं.
जॉनसन की भारत यात्रासे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा था कि ब्रिटेन को उम्मीद है कि यह समझौता 2035 तक उसके सालाना व्यापार को बढ़ाकर 36.5 अरब डॉलर तक ले जा सकता है. बोरिस जॉनसन ने कहा कि एक प्रमुख आर्थिक शक्ति के रूप में भारत ब्रिटेन का एक अहम रणनीतिक साझीदार है. उन्होंने कहा, "आज जबकि हम एकाधिकारवादी देशों से अपनी शांति और उन्नति को चुनौती का सामना कर रहे हैं, तो यह महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र और मित्र साथ रहें."
पिछले साल मई में दोनों देशों ने भारत द्वारा ब्रिटेन में 53 करोड़ पाउंड यानी करीब 53 अरब रुपयों के निवेश का एलान किया था. मुक्त व्यापार समझौते में विज्ञान, तकनीक और स्वास्थ्य क्षेत्रों में एक दूसरे को करों में छूट देने का का एलान हो सकता है.
भारत भी इस समझौते को लेकर काफी उत्सुक है. इससे पहले उसने युनाइटेड अरब अमीरात के साथ एक मुक्त व्यापार समझौता किया है जबकिऑस्ट्रेलिया के साथ उसका मुक्त व्यापार समझौता जल्द ही पूरा हो जाने की बात कही जा रही है. दोनों देशों ने मार्च में एक अंतरिम समझौते पर दस्तखत किए थे जिसके तहत एक दूसरे के कई उत्पादों को पूरी तरह कर मुक्त कर दिया गया है.
रिपोर्टः विवेक कुमार (रॉयटर्स)
Source: DW
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