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कोरोना से मरे कई नक्सली कमांडर, भयंकर संक्रमण से संगठन में भगदड़

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नई दिल्ली, 18 मई। बंदूक और बम की भाषा बोलने वाले नक्सली अब खुद दहशत में है। कोरोना ने उनकी हिम्मत को तोड़ दिया है। माओवाद और लेनिनवाद खौफ की खिड़की से हवा में उड़ा गया है। संगठन बिखर रहा है। कोरोना की बेआवाज मौत ने नक्सलियों को इस कदर डरा दिया है कि वे गिरोह छोड़ कर भाग रहे हैं।

Chhattisgarh coronavirus infection spread in naxals several naxalite commanders died from covid

नक्सलियों को समूह में रहने की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। उनमें भयानक रूप से संक्रमण फैला है। भूमिगत होने से उन्हें दवा और इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में कई बड़े नक्सली कमांडर मर चुके हैं। कई जंगल से भाग कर गांवों में चले गये हैं। कई ने तो नक्सलवाद से ही तौब कर ली है। इनका कहना है जब जंगल में बीमारी से यूं ही मर जाएंगे तो हथियार किसके लिए उठाएंगे। कोरोना से मौत का जवाब किसी के पास नहीं है। हमारे पास भी नहीं है। कोरोना के सामने माओवाद लेनिनलाद का क्या कोई मतलब है ?

कोरोना के आगे गोली-बंदूक सब बेकार

कोरोना के आगे गोली-बंदूक सब बेकार

बिहार के नवादा जिले के रहने वाले नरेश दास पहले नक्सली संगठन में गया पूर्वी जोन के सबजोनल कमांडर थे। जोर जुल्म के खिलाफ कभी हथियार उठाया था। पिछले साल जब मार्च में कोरोना की पहली लहर आयी थी तब जिंदगी को नजदीक से समझने का मौक मिला। बीमारी से लोग एक दूसरे के सामने मर मर रहे थे और कोई कुछ नहीं कर पा रहा था। ताकत, गोली बंदूक सब बेकार। तब लगा कि इस बीमारी से कोई नहीं बच सकता। जब जिंदगी ही नहीं रहेगी तो विचारधारा का क्या करेंगे। उन्हें अपने बीवी और बच्चों की याद आयी। 2020 में नक्सली संगठन छोड़ कर नरेश दास परिवार के पास लौट आये। अब वे पचास-पचपन के हो चुके हैं। रोजगार के लिए उन्होंने सरकारी योजनाओं का सहारा लिया। जिस सिस्टम के खिलाफ कभी लड़ते थे आज वही उनकी रोटी का सहारा बना। मुख्यमंत्री अनुदान योजना के तहत एक ऑटो रिक्शा खरीदा। इस ऑटो रिक्शा ने उनकी जिंदगी बदल दी। अब वे खुद कमा कर अपने बच्चों का भविष्य गढ़ रहे हैं।

कोरोना से मर गये कई नक्सली कमांडर

कोरोना से मर गये कई नक्सली कमांडर

छत्तीसगढ़ में सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों एक चिट्ठी मिली है। इस चिट्ठी में नक्सली संगठन के एक सदस्य ने बहुत ही मार्मिक स्थिति का वर्णन किया है। इस चिट्ठी में लिखा है, दक्षिण बस्तर, दरभा और पश्चिम बस्तर इलाके में कई साथी बीमारी (कोरोना) से लड़ रहे हैं। दरभा डिविजन की चेतना नाट्य मंडली के कमांडर हूंगा, बटालियन के देवे, गंगा, सुदारू, मुन्नी और रीना की इस बीमारी से मौत हो चुकी है। कमांडर राजेश दादा, सुरेश और मनोज की हालत बहुत गंभीर है। (नक्सली संगठन में सभी सदस्यों को नया नाम दिया जाता है। उनके मूल नाम की जानकारी किसी को नहीं रहती।) यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। हमारे पास जो दवाएं हैं उसका कोई असर नहीं हो रहा है। गंगालूर एरिया कमेटी के पलाटून से बुधराम, बिमला, रितेश और जोगा भाग गये हैं। दरभा डिविजन से नागेश, सुमित्रा, अनिता ने संगठन छोड़ दिया है। इस चिट्ठी के मिलने के बाद यह कहा जा रहा है कि जंगलों में छिपे नक्सली गंभीर स्थिति में फंस गये हैं। कई बार उन्हें एक छोटे से बंकर या पहाड़ की गुफा में छिपना पड़ता है। जगह छोटी होती है और संख्या अधिक। ऐसे में एक संक्रिमत नक्सली पूरे गिरोह को कोरोना पोजिटिव बना देता है। दवा और इलाज के अभाव में बीमार की मौत हो जाती है। पकड़े जाने के डर से वे सरकारी या निजी अस्पतालों में नहीं जाते।

न दवा, ना इलाज! डर तो लगेगा ही

न दवा, ना इलाज! डर तो लगेगा ही

हाल ही में छत्तीगढ़ के बांकेर बीएसएफ कैंप में एक नक्सली दम्पति ने सरेंडर कर दिया। वे सर्दी-खांसी और बुखार से परेशान थे। नक्सली पति-पत्नी को बीएसएफ के अस्पताल में भर्ती कराया गया। दोनों कोरोना पोजिटिव निकले। उनका इलाज शुरू हुआ तो किसी तरह तरह स्थिति सुधरी। उन्होंने बताया कि जब वे बीमार पड़ गये तो गिरोह के कमांडरों ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया। वहां किसी दवा का भी इंतजाम नहीं था। जब उन्हें लगा कि जंगल में पड़े-पड़े तो उनकी मौत हो जाएगी, तब वे वहां से भाग निकले। भागने के बाद वे जानते थे कि पुलिस उन्हें पकड़ लेगी। पुलिस की पकड़ में आने से पहले ही उन्होंने बीएसएफ से सामने सरेंडर कर दिया ताकि कम से कम इलाज की सुविधा मिल जाए। इन नक्सलियों ने बताया कि कोरोना गाइडलाइन की सख्ती के कारण अब संगठन के पास खाने-पीने के सामान की बहुत कमी हो गयी है। उसकी तरह कई और सदस्य बीमारी से जूझ रहे हैं। वे गांव में आदिवासियों के बीच रह रहे हैं। बीमारी से संगठन के सदस्यों का हौसला बहुत गिरा हुआ है। जो कैडर पुलिस की गोली से नहीं डरे अब वे बेजुबान कोरोना से पस्त हो गये हैं।

English summary
Chhattisgarh coronavirus infection spread in naxals several naxalite commanders died from covid
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