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MP News: छतरपुर के चंदला में बाल मजदूरी का खुला खेल, पाल ढाबे का वीडियो वायरल, पुलिस खामोश

MP News Chhatarpur: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में प्रशासन भले ही कानून-व्यवस्था और बाल मजदूरी पर सख्ती के बड़े-बड़े दावे करता हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। चंदला थाना क्षेत्र के तिराहे के पास स्थित पाल ढाबा इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां नाबालिग बच्चों से काम करवाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि ढाबे पर छोटे-छोटे बच्चे ग्राहकों को खाना परोस रहे हैं, बर्तन साफ कर रहे हैं, और लंबे समय तक काम में जुटे हुए हैं। इस वीडियो के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बावजूद चंदला पुलिस ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

Child labour is openly prevalent in Chhatarpur Chandla video of Dhaba goes viral police is silent

वायरल वीडियो ने मचाई सनसनी

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस वीडियो ने न सिर्फ चंदला बल्कि पूरे छतरपुर जिले में हलचल मचा दी है। वीडियो में ढाबे पर काम करते नाबालिग बच्चे साफ दिखाई दे रहे हैं। कुछ बच्चे ग्राहकों के लिए चाय बना रहे हैं, तो कुछ बर्तनों को धोते हुए थकान से चूर नजर आ रहे हैं। यह वीडियो देखकर कोई भी कह सकता है कि यहां बाल मजदूरी का खुला खेल चल रहा है। वीडियो के साथ लिखा गया कैप्शन-"पाल ढाबा पर बच्चों से काम करवाया जा रहा है, प्रशासन कहाँ सोया है?"-ने लोगों का ध्यान और आक्रोश दोनों बढ़ा दिया है। देखते ही देखते यह वीडियो जिले भर में फैल गया, और लोग इसकी निंदा करने लगे।

शिकायत के बाद भी चुप्पी

वीडियो वायरल होने के बाद चंदला क्षेत्र के कुछ जागरूक नागरिकों ने 21 मार्च 2025 को चंदला थाने में एक शिकायती आवेदन देकर ढाबा संचालक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। आवेदन में साफ लिखा था कि पाल ढाबा पर नाबालिग बच्चों से काम करवाया जा रहा है, जो बाल मजदूरी निषेध अधिनियम 1986 के तहत अपराध है। लोगों ने पुलिस से तुरंत जाँच और ढाबा संचालक पर कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि आवेदन देने के बावजूद चंदला पुलिस ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया। न तो ढाबे पर छापेमारी हुई, न ही बच्चों को वहां से मुक्त कराने की कोई कोशिश दिखी। यह निष्क्रियता लोगों के गुस्से को और भड़का रही है।

"बच्चों का बचपन छीन रहा है"

स्थानीय लोगों का कहना है कि पाल ढाबा पर यह सिलसिला नया नहीं है। एक दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "यहाँ महीनों से बच्चे काम करते दिखते हैं। उनकी उम्र 10 से 14 साल के बीच होगी। सुबह से रात तक ढाबे पर काम करते हैं, न पढ़ाई, न खेलकूद-बस मजदूरी।" एक अन्य नागरिक ने गुस्से में कहा, "जिला प्रशासन और पुलिस बाल मजदूरी रोकने की बात तो करते हैं, लेकिन पाल ढाबा इसका खुला सबूत है कि उनके दावे खोखले हैं। इन बच्चों का बचपन छीना जा रहा है, और कोई सुनने वाला नहीं है।" लोगों का मानना है कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिलसिला और बढ़ेगा।

प्रशासन का ढुलमुल रवैया

छतरपुर जिला प्रशासन पिछले कुछ समय से बाल मजदूरी के खिलाफ सख्ती दिखाने का दावा कर रहा है। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने कई बार कहा है कि जिले में नाबालिग बच्चों से काम करवाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना अपराध है, जिसमें 6 महीने से 2 साल तक की जेल और 20,000 से 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। लेकिन पाल ढाबा का मामला इन दावों की पोल खोल रहा है। वायरल वीडियो और शिकायत के बाद भी चंदला पुलिस की चुप्पी से सवाल उठ रहे हैं-क्या प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित है? क्या यहाँ कोई साठगाँठ चल रही है?

पुलिस की सफाई: "जांच जारी है

जब इस मामले में चंदला थाना प्रभारी से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कोई साफ जवाब देने से इनकार कर दिया। एक अधिकारी ने सिर्फ इतना कहा, "हमें शिकायत मिली है। जांच चल रही है। जल्द ही उचित कार्रवाई होगी।" लेकिन यह "जल्द ही" कब आएगा, यह सवाल अभी अनुत्तरित है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस की यह ढिलाई ढाबा संचालकों को और हौसला दे रही है। एक शख्स ने तंज कसते हुए कहा, "वीडियो सबूत है, बच्चे सबके सामने काम कर रहे हैं, फिर भी जाँच की बात क्यों? क्या पुलिस को और सबूत चाहिए?"

क्या कहता है कानून?

बाल श्रम (प्रतिबंध एवं नियमन) अधिनियम 1986 के तहत 14 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना गैरकानूनी है। 2016 में हुए संशोधन के बाद सजा को और सख्त किया गया है। अगर कोई दोषी पाया जाता है, तो उसे 6 महीने से 2 साल तक की जेल या 20,000 से 50,000 रुपये का जुर्माना, या दोनों हो सकता है। दूसरी बार अपराध करने पर सजा 1 से 3 साल तक की हो सकती है। पाल ढाबा का मामला साफ तौर पर इस कानून का उल्लंघन है, लेकिन कार्रवाई का इंतजार अब भी जारी है।

आगे क्या?

चंदला के पाल ढाबा पर बाल मजदूरी का यह मामला अब प्रशासन के लिए एक लिटमस टेस्ट बन गया है। अगर यहां कार्रवाई नहीं हुई, तो जिले भर में ऐसे ढाबों और दुकानों को हौसला मिलेगा। लोगों की नजर अब इस बात पर है कि क्या पुलिस और प्रशासन इस वायरल वीडियो को गंभीरता से लेगा? क्या इन बच्चों को ढाबे की मजदूरी से आजाद कर स्कूल की राह दिखाई जाएगी? या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? जवाब का इंतजार न सिर्फ चंदला, बल्कि पूरे छतरपुर को है।

फिलहाल, यह सवाल हर किसी के मन में गूंज रहा है-जब वीडियो सबूत के तौर पर मौजूद है, शिकायत दर्ज हो चुकी है, तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों? क्या छतरपुर में बाल मजदूरी का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा, या कोई बदलाव की शुरुआत होगी? समय ही बताएगा।

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