'बकरी' के लिए थाने में बीरबल और सद्दाम के बीच छिड़ी जंग, पुलिस ने ऐसे सुलझाया मामला, दोनों हुए खुश
उत्तर प्रदेश चंदौली जनपद से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है। एक बकरी के दो दावेदारों में कहासुनी होने लगी। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों पक्षों की तरफ से पंचायत हुई लेकिन मामले का हल नहीं निकल पाया। बाद में मामला थाने पहुंचा सो पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए।
हालांकि इस मामले का हल निकालने के लिए पुलिस द्वारा ऐसा कदम उठाया गया जिसे सुनकर हर कोई पुलिस की तारीफ कर रहा है। वहीं पुलिस द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद बकरी पर दावा करने वाले दोनों पशुपालक काफी खुश हैं। पुलिस द्वारा निकाले गए हल को लेकर तरह-तरह की चर्चा चल रही है।

दरअसल, यह पूरा मामला चंदौली जनपद के धानापुर कस्बा का है। कस्बा के रहने वाले सद्दाम अंसारी की बकरी एक साल पहले गुम हो गई थी। सद्दाम अपनी बकरी को काफी दिन खोजा लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। शनिवार को उसे पता चला कि उसकी बकरी नहरपुर गांव के रहने वाले दामोदर उर्फ बीरबल के पास है।
ऐसे में सद्दाम अपने घर वालों के साथ बीरबल के घर पहुंच गया। वहां पहुंचने के बाद वह बकरी पर दावा करने लगा। वहीं बीरबल द्वारा बताया गया कि वह बकरी उसके घर पांच साल से है और बकरी वह किसी को नहीं दे सकता है। देखते ही देखते दोनों पक्षों में कहासुनी होने लगी।
कहासुनी के बाद दोनों पक्षों के संभ्रांत लोग जूटे और पंचायत जुटी, काफी समझाने के बाद भी मामले का हल नहीं निकल पाया इसके बाद सद्दाम थाने पहुंच गया। थाने पहुंचने के बाद उसने पुलिस से शिकायत किया तो पुलिस ने दोनों को थाने बुलाया। थाने पहुंचने के बाद भी दोनों के बीच पंचायत चलती रही।
पुलिस द्वारा बकरी को छोड़ा गया और दोनों को दूर भेज कर बुलाया गया तो कभी बकरी बीरबल के पास जाती और कभी सद्दाम के पास चली जाती। काफी समझाने के बाद और समझने के बाद भी इस मामले का हल नहीं निकल पाया और दोनों के पास बकरी के जाने के चलते असली मालिक की पहचान मुश्किल थी।
काफी देर तक परेशान होने के बाद जब इस मामले का हल नहीं निकल पाया तो पुलिस द्वारा खुद इसका हल निकालने का प्रयास किया गया। थानाध्यक्ष प्रशांत सिंह द्वारा यह निर्णय लिया गया कि बकरी बीरबल के पास थी और बीरबल के पास ही रहेगी लेकिन बकरी जब बच्चा दे देगी तो बीरबल द्वारा बकरी का एक बच्चा सद्दाम को दिया जाएगा। पुलिस द्वारा यह निर्णय सुनाए जाने के बाद दोनों पक्षों ने हामी भरी। लिखा पढ़ी करने के बाद दोनों को वापस भेज दिया गया।












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