केंद्रीय बजट 2025 में आर्थिक विकास के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को मिलेगी प्राथमिकता
1 फरवरी 2025 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले केंद्रीय बजट में रोजगार सृजन और कौशल विकास को विशेष महत्व दिए जाने की उम्मीद है। उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि अर्थव्यवस्था को गति देने और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सरकार को हॉस्पिटैलिटी, स्टार्टअप, MSME, और एडटेक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना चाहिए।
हॉस्पिटैलिटी सेक्टर की मांगें
नूरमहल ग्रुप के सीएमडी मनबीर चौधरी के अनुसार, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को उद्योग का दर्जा देना महत्वपूर्ण है। यह कदम वित्तीय संसाधनों की बेहतर पहुंच और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार होगा। इसके अलावा, टियर-2 और टियर-3 शहरों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए विशेष आवंटन की आवश्यकता है।
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स्टार्टअप इकोसिस्टम की चुनौतियां और अपेक्षाएं
टी9एल क्यूब के गौरव गग्गर ने स्टार्टअप्स के सामने मौजूद चुनौतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि विदेशी निवेश नियमों को सरल बनाने और ऋण की पहुंच को आसान बनाना आवश्यक है।
- एंजल टैक्स में सुधार: निवेश प्रवाह को बढ़ावा देने के लिए पिछले कदमों के साथ और सुधार अपेक्षित हैं।
- अनुसंधान और विकास (R&D): स्टार्टअप्स को नवाचार और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए R&D में निवेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।कॉम्सक्रेडिबल के अमन ढल्ल ने सेक्शन 80-AIAC के तहत कर छूट के प्रावधानों में व्यापक बदलाव की आवश्यकता जताई। वर्तमान में केवल 1% मान्यता प्राप्त स्टार्टअप ही इस लाभ का उपयोग कर पा रहे हैं।
कौशल विकास और रोजगार पर विशेष जोर
शिक्षा नीति विशेषज्ञ नमन जैन के अनुसार, डेटा विज्ञान, नवीकरणीय ऊर्जा, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे क्षेत्रों में कौशल विकास कार्यक्रमों में निवेश की जरूरत है।
- सतत विकास के लिए कौशल विकास: कुशल कर्मचारियों की कमी को दूर करना देश की बेरोजगारी समस्या को हल करने में मदद करेगा।
- 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य: भारत-अफ्रीका व्यापार परिषद के गगन अरोड़ा के अनुसार, सात से आठ प्रतिशत वार्षिक GDP वृद्धि के लिए रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अन्य प्रमुख सुझाव और संभावनाएं
- MSME और एडटेक क्षेत्र: इन क्षेत्रों में निवेश से छोटे और मध्यम व्यवसायों को प्रोत्साहन मिलेगा और डिजिटल शिक्षा का विस्तार होगा।
- AI और नवीकरणीय ऊर्जा: उभरते क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करके वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।












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