Silver Rate Hike: आपकी कार और मोबाइल की वजह से चांदी की कीमतों में तूफानी उतार चढ़ाव? समझें कनेक्शन
Silver Rate Hike: चांदी की कीमतों में जारी तेज उछाल के पीछे अब केवल शादी-ब्याह का सीजन और ज्वेलरी की मांग नहीं है। ग्रीन टेक्नोलॉजी की बढ़ती जरूरत भी इस धातु की डिमांड बढ़ने और कीमतों में बदलाव की वजह है। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चांदी के दाम में कुछ गिरावट जरूर आई है, लेकिन भविष्य में इस धातु के दाम और बढ़ सकते हैं। वैश्विक स्तर पर चांदी की मांग उसकी सप्लाई से कहीं अधिक हो चुकी है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी की कीमतों में आए तूफानी उतार चढ़ाव की वजह सिर्फ धार्मिक कार्यों में खपत और ज्वेलरी नहीं है। कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव के पीछे इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग में बढ़ोतरी और सोलर पैनलों की खपत भी है।

Silver Rate Hike: सोलर पैनल की मांग बढ़ने से असर
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि सोलर इंडस्ट्री चांदी की सबसे बड़ी खरीदार बन चुकी है। एक सोलर सेल तैयार करने में चांदी के पेस्ट का उपयोग होता है और दुनिया भर में सोलर पैनल की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है। रिपोर्ट बताती है कि वैश्विक स्तर पर उपयोग होने वाली कुल चांदी का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले सोलर सेक्टर में खप रहा है। सोलर पैनल का इस्तेमाल अब भारत में भी बड़े पैमाने पर हो रहा है।
Silver Rate Hike Reason: इलेक्ट्रिक वाहनों ने बढ़ाई खपत
- इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) क्रांति भी चांदी की मांग को तेजी से ऊपर धकेल रही है। एक पारंपरिक पेट्रोल-डीजल कार के मुकाबले EV में लगभग दोगुनी चांदी इस्तेमाल होती है।
- बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम, चार्जिंग पोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक सर्किट में चांदी की बेहतरीन चालकता के कारण इसका विकल्प नहीं मिल पा रहा।
- जैसे-जैसे वाहन बाजार इलेक्ट्रिक की ओर शिफ्ट हो रहा है, चांदी की किल्लत और गहरी होती जा रही है।
Silver Rate Update: मांग ज्यादा होने की वजह से सप्लाई संकट
चांदी का उत्पादन अक्सर सोने या तांबे के खनन के साथ बाय-प्रोडक्ट के रूप में होता है, इसलिए इसकी स्वतंत्र खदानें सीमित हैं। जानकारों का अनुमान है कि यदि यही रफ्तार रही तो 2026 के अंत तक अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चांदी 100 डॉलर प्रति औंस और भारत में करीब 3.5 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
Silver Rate Hike: आम लोगों पर सीधा असर
चांदी महंगी होने का असर केवल निवेशकों तक सीमित नहीं रहने वाला है। इससे ज्वेलरी के दाम बढ़ेंगे, सोलर पैनल लगवाना पहले से महंगा होगा और स्मार्टफोन-लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत भी ऊपर जा सकती है। आसान शब्दों में कहें, तो ग्रीन टेक्नोलॉजी की यह भूख आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने लगी है।












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