• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

87 लोग दबाए बैठे हैं बैंकों के 85 हजार करोड़ रुपए, SC ने कहा नाम क्‍यों नहीं करते सार्वजनिक

|

नई दिल्‍ली। बैंक लोन बकायदारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्‍त हो रही है। कोर्ट ने कुछ दिनों पहले आरबीआई ने उन लोगों की लिस्‍ट मांगी थी जिनपर 500 करोड़ रुपए अधिक का बैंक लोन बकाया है। अब जो जानकारी मिल रही है उसके मुताबिक केवल 87 लोगों पर पब्लिक सेक्टर बैंक का 85 हजार करोड़ रुपया बकाया है। अब सुप्रीम कोर्ट ने आरबीआई को आदेश दिया है कि वो इन लोगों के नाम सार्वजनिक करें।

चल गया पता, हैकर्स कैसे कर रहे हैं आपके कार्ड को हैक

87 owe Rs 85000 crore, why not make their names public

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आरबीआई को बैंकों के लिए नहीं बल्‍कि देश हित के लिए काम करना चाहिए। चीफ जस्टिस टी एस ठाकुर ने आरबीआई द्वारा सौंपी गई बकायदारों की एक लिस्ट पढ़ने के बाद यह खुलासा किया कि ऐसे 87 लोग हैं जिनपर बैंकों के 500 करोड़ रुपए से ज्यादा बकाया है, इस तरह इन लोगों पर कुल 85 हजार करोड़ रुपए बकाया है।

पीठ ने कहा कि हमने 500 करोड़ रुपए से अधिक के कर्जदारों की सूची मांगी थी तो यह आंकड़ा सामने आया है। अगर हमने इससे नीचे के कर्जदारों की सूची मांगी होती तो यह आंकड़ा एक लाख करोड़ रुपए से अधिक होता।

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Underlining that 87 persons owe more than Rs 85,000 crore to public sector banks, the Supreme Court said on Monday that the RBI should not work in the interest of the banks but in the interest of the country which calls for disclosing the names of the biggest defaulters.
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more