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    कर्मचारी के रिटायरमेंट ने खोल दी 11,500 करोड़ के PNB घोटाले की पोल

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      Punjab National Bank में हुए Scam की पोल एक employee's retirement से खुली । वनइंडिया हिंदी

      नई दिल्ली। अब तक का सबसे बड़ा बैंकिंग घोटाला माना जाने वाला पंजाब नेशनल बैंक स्कैम की पोल एक कर्मचारी के रिटायरमेंट से खुली। 11500 करोड़ के इस महाघोटाले की शुरुआत साल 2011 में हुई। इतने सालों तक ये महाघोटाला चलता रहा और किसी को इसकी भनक नहीं लगी। इस घोटाले की पोल जनवरी 2018 में उस वक्त खुली जब बैंक का एक कर्मचारी रिटायर हुआ। सूत्रों की माने तो मुंबई के एक ब्रांच में पिछले 10 सालों से कार्यरत एक कर्मचारी के रिटायरमेंट ने इस महाघोटाले की पोल खोल दी। बैंक के एक से दो कर्मचारियों ने मिलकर बैंक को 11500 करोड़ का चूना लगा दिया और बैंक के शीर्ष अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ी। बैंक में धड़ल्ले से नियमों की अनदेखी हुई।

      पीएनबी में महाघोटाला

      पीएनबी में महाघोटाला

      बैंक के दो कर्मचारियों ने नीरव मोदी के साथ मिलकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया। बैंकिंग नियम के मुताबिक किसी को भी LoU इश्यू करने के लिए बैंक के दो कर्मचारियों के साइन अनिवार्य है। इस मामले में दोनों ही कर्मचारी नीरव मोदी की कंपनी से मिल गए। उन्होंने LoU इश्यू करने के बाद उसे बैंक के बुक यानी की बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम में भी दर्ज नहीं किया। कर्मचारियों ने नीरव मोदी की कंरनी को स्विफ्ट फॉर्मेट में कोडेड मैसेज दे दिया, जिसके आधार पर कंपनी ने दूसरे बैंकों से करोड़ों रुपए जारी करवा लिए।

      रिटायरमेंट से खुली पोल

      रिटायरमेंट से खुली पोल

      इस ब्रांच से एक कर्मचारी के रिटायर होने के बाद जब वहां दूसरा कर्मचारी उसकी जगह आया तो वे बैंक में हो रहे इस पूरे हेराफेरी को देखकर हैरान रह गया। कर्मचारी ने देखा कि बैंक ने बिना किसी लिमिट के ही कंपनी को एलओयू दे दिया है। इस हेराफेरी को लेकर कर्मचारी ने 31 दिसंबर को पीएनबी के इंटरनल सिस्टम को रिपोर्ट किया, दूसरे रेग्युलेटर्स को इस बारे में बताया तो बैंक के शीर्ष अधिकारियों के होश उड़ गए।

      बैंकिंग सिस्टम की खुली पोल

      बैंकिंग सिस्टम की खुली पोल

      इस घोटाले ने न केवल पीएनबी के बैंकिंग सिस्टम की पोल खोल दी, बल्कि बैंकों के चेक एंड बैलेंस सिस्टम पर भी सवाल खड़ा किया। बैंक से इतने सालों से इतनी बड़ी रकम एक ही कंपनी को जाती रही और बैंक का ध्यान इस पर नहीं गया। वहीं ये बाद न तो बैंक के ऑडिट में सामने आई और न ही आरबीआई के इंस्पेक्शन में। इस घोटाले ने बैंक के इंटरनल ऑडिट और रिजर्व बैंक की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

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      English summary
      Punjab National Bank (PNB) MD Sunil Mehta said that the Rs 11,500 crore first started in 2011. He insisted that it was a “standalone incident in a single branch.”
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