Madhabi Buch News: एक और मुश्किल में फंसी SEBI प्रमुख माधबी बुच, इस मामले में हो सकती है तलब
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की प्रमुख माधबी पुरी बुच को संसद की लोक लेखा समिति (PAC) द्वारा तलब किया जा सकता है। PAC का उद्देश्य SEBI के 'प्रदर्शन की समीक्षा' करना है। हालांकि, इस कदम को तकनीकी आधार पर चुनौती दी जा सकती है, जैसा कि कुछ जानकारों का कहना है।
लोक लेखा समिति (PAC) भारतीय संसद की लेखापरीक्षा निगरानी संस्था है, जो सरकार और इसके विभिन्न विभागों के वित्तीय प्रदर्शन की निगरानी करती है। PAC की अध्यक्षता कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल कर रहे हैं, और समिति ने 161 विषयों को अंतिम रूप दिया है, जिसमें 'परफॉर्मेंस रिव्यू ऑफ रेगुलेटरी बॉडीज' भी शामिल है। इस कैटेगरी के तहत SEBI प्रमुख और अन्य अधिकारियों को तलब करने की योजना बनाई जा रही है।

PAC की बैठक और सेबी की जांच
PAC की अगली बैठक 10 सितंबर को होनी है, जिसमें नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की 2018 की रिपोर्ट के आधार पर राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम का लेखा-परीक्षण किया जाएगा। इसके अलावा, PAC द्वारा सेबी के कामकाज की जांच भी की जाएगी।
भाजपा नेता और PAC सदस्य निशिकांत दुबे ने इस मामले में कहा कि PAC के अध्यक्ष के पास पैनल की बैठकें आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन सभी सदस्यों को वीटो शक्ति प्राप्त है। दुबे का मानना है कि किसी भी संस्थान के प्रदर्शन की समीक्षा CAG रिपोर्ट के आधार पर ही होनी चाहिए।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट और अडानी मामले से जुड़ी जांच
SEBI प्रमुख को तलब करने की उम्मीद ऐसे समय में की जा रही है, जब अमेरिका की शॉर्ट-सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने SEBI प्रमुख माधबी बुच और उनके पति धवल बुच पर अडानी समूह से जुड़े 'मनी साइफनिंग' घोटाले (Adani Money Siphoning Scandal) में शामिल होने का आरोप लगाया था। इन आरोपों ने राजनीतिक विवाद को जन्म दिया और कांग्रेस ने इस मुद्दे पर संसदीय जांच की मांग की है।
2023 में हिंडनबर्ग ने अडानी समूह पर शेयर बाजार में हेरफेर और टैक्स हेवन का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे, जिसके बाद SEBI ने इस मामले की जांच शुरू की थी। हिंडनबर्ग की रिपोर्ट के कारण अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन बाद में यह आंशिक रूप से ठीक हो गए।
आरोपों पर SEBI प्रमुख का जवाब
हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोपों के जवाब में माधबी पुरी बुच ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि यह उनके चरित्र हनन का प्रयास है। SEBI की ओर से इस मामले में कार्रवाई जारी है और माधबी बुच ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को 'दुर्भावनापूर्ण और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के हेरफेर' के रूप में बताया।












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