• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

डगमगाई मोदी सरकार की स्कीम, ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड' योजना का बहुत कम गरीबों को मिला लाभ

|

नई दिल्ली। कोरोना महामारी के बीच लाचार और असहाय प्रवासी मरीजों का पेट भरने के लिए केन्‍द्र सरकार ने वन नेशन, वन राशन कार्ड योजना लागू की थी। लेकिन मोदी सरकार ने भूखे और लाचार नागरिकों के लिए शुरु की गई ये योजना शुरुआती दौर में लडखड़ाने लगी है। जिनके लिए ये योजना लागू की गईं उन्‍हें ही इस योजना का पूरा लाभ नहीं मिला है।

on one ration card

ये खुलासा विपक्ष की पार्टी नहीं बल्कि एक संसदीय स्थायी समिति के समक्ष सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों में ये बड़ा खुलासा हुआ है। एक राष्ट्र एक राशन कार्ड और मुफ्त भोजन योजना की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इस योजना का लाभ पाने वाले लाभार्थिेयों की संख्‍या बहुत कम हैं। एक राष्ट्र एक राशन कार्ड योजना और मुफ्त खाद्यान्न का वितरण, कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान भूखमरी का सामना कर रहे करोड़ों प्रवासियों के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित दो प्रयास नाकामयाब साबित हुए हैं।

13,000 प्रवासियों को लाभ पहुंचा

13,000 प्रवासियों को लाभ पहुंचा

जुलाई 2020 तक इलेक्ट्रॉनिक्स प्वॉइंट ऑफ सेल के माध्यम से राज्यों के बीच सिर्फ 2,000 लेनदेन हुए। इसका ये मतलब है कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन' कार्ड योजना से बामुश्किल से 13,000 प्रवासियों को लाभ पहुंचा। इसके जरिए बांटा गया कुल खाद्यान्न 31,500 किलोग्राम था। ये विवरण खाद्य विभाग के अधिकारियों ने इस हफ्ते के शुरू में श्रम पर संसदीय समिति को दी।

24 राज्यों की राशन की दुकानों को इससे जोड़ा जा चुका है

24 राज्यों की राशन की दुकानों को इससे जोड़ा जा चुका है

मोदी सरकार के द्वारा किए गए दावों से तुलना की जाए कि 24 राज्यों और 90% राशन की दुकानों को योजना से जोड़ा जा चुका है इसके हिसाब से 31,500 किलोग्राम अनाज का उपयोग किया जा रहा है। जरुरतमंदों की संख्‍या की इससे तुलना की जाए तो ये मात्रा बहुत कम हैं। भारत में कुल 5.35 लाख फेयर प्राइस शॉप्स हैं जो देश में 23 करोड़ राशन कार्ड वालों की जरूरतों को पूरा करती हैं। पिछले तीन महीनों में पलायन की दूसरी लहर देखी जा रही है क्योंकि प्रवासी श्रमिक धीरे-धीरे अपने रोजगार वाल शहरों में वापस लौट रहे हैं। वन नेशन, वन राशन कार्ड का उद्देश्‍य असल में ऐसे लोगों की के सामने आने वाली समस्याओं को हल करने के लिए रखी गई है।

एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना' प्रभावी होने के लिए जूझ रही

एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना' प्रभावी होने के लिए जूझ रही

परंतु खाद्य और जन वितरण विभाग ने एक तरह से जुलाई 2020 के लिए अपनी मंथली रिपोर्ट में स्वीकार है कि ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना' प्रभावी होने के लिए जूझ रही है। विभाग की जुलाई की रिपोर्ट के अनुच्छेद 3 में कहा गया है कि "पीडीएस सुधारों के तहत, कुल 4.88 लाख (90.4 प्रतिशत) उचित मूल्य की दुकानें (एफपीएस) इलेक्ट्रॉनिक्स प्वाइंट ऑफ सेल (ePoS) उपकरण स्थापित करके स्वचालित की गई हैं"।

जानिए क्या है ये योजना

जानिए क्या है ये योजना

बता दें ईपीओस सुविधा ‘एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड योजना' के लिए अहम है। इससे किसी भी श्रमिक को कार्ड की पोर्टेबिलिटी दी जा सकेगी- यानि श्रमिक देश में कहीं भी पीडीएस योजना का लाभ उठा सकता है। जबकि पहले जिस इलाके में राशन कार्ड जारी किया गया था जहां से राशन कार्ड जारी किया गया है वहीं से ले सकता था। पीडीएस आउटलेट मालिकों का कहना है कि कनेक्टिविटी नहीं हो के कारण दूर-दराज के क्षेत्रों में ePoS सिस्टम काम नहीं कर रहा है।

8 करोड़ प्रवासियों के बीच मुफ्त अनाज वितरित किया जाना था

8 करोड़ प्रवासियों के बीच मुफ्त अनाज वितरित किया जाना था

गौरतलब है कि 1 जून, 2020 को ‘एक राष्ट्र-एक राशन कार्ड' योजना शुरु की गई। नि:शुल्क खाद्यान्न योजना का उद्देश्य बेरोजगार और बेघर हुए प्रवासियों को तुरंत राहत पहुंचाने में नाकाम रही। आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत केंद्र ने 8 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न चिह्नित किया। देश भर के लगभग 8 करोड़ प्रवासियों के बीच मुफ्त अनाज वितरित किया जाना था। इसके अंतर्गत 31 मार्च, 2021 तक पूरे देश को कवर करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि इस रिपोर्ट के अनुसार सरकार तंत्र अधिकतर स्थानों पर प्रवासी श्रमिकों तक इसका लाभ पहुंचाने में नाकाम रही है तो ऐसे में ये योजना अपना लक्ष्‍य पूरा कर सकेगी इसमें संदेह है।

2.46 लाख मीट्रिक टन ही अनाज वितरित हुआ

2.46 लाख मीट्रिक टन ही अनाज वितरित हुआ

बता दें 8 लाख मीट्रिक टन में से लगभग 80 प्रतिशत या 6.39 लाख मीट्रिक टन राज्यों में पहुंच गया। लेकिन 5 अगस्त तक 2.46 लाख मीट्रिक टन उन प्रवासियों के बीच वितरित किया गया, जो भुखमरी का सामना कर रहे थे और पैदल पलायन करके अपने घरों को लौट रहे थे। ये राज्यों को मिलने वाले खाद्यान्न का लगभग 31% और केंद्र की ओर से चिह्नित अनाज का 39% है। कुल 8 करोड़ लाभार्थियों में से केवल 2.5 करोड़ ने ही जिंदा रहने के लिए मुफ्त अनाज का इस्तेमाल किया। इसका मतलब है कि राज्य अनुमानित 5.5 करोड़ प्रवासियों की भूख मिटाने में नाकाम रहे।

योजना के सफल न होने के ये कारण

योजना के सफल न होने के ये कारण

हालांकि इस योजना के कामयाब न होने के पीछे कई तकनीकी और राजनीति कारण भी माने जा रहे हैं। पीडीएस के लिए लाभार्थियों को अपने आधार और राशन कार्ड लिंक करना जरूरी है। मशीनों के ठीक से काम न करने और खराबी के अलावा सबसे बड़ी बाधा खराब कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दे हैं। जबकि सरकार का दावा है कि देश के अधिकांश क्षेत्रों में अब डेटा लिंक पीडीएस शॉप्स हैं। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों का विरोध है और आम सहमति का जबरदस्‍त अभाव है। वहां राज्य सरकारों के सहयोग के अभाव में ये योजना प्रभावी नहीं हो पा रही है। कुछ राज्‍य इसमें अडंगा लगा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वन नेशन वन राशन कार्ड का ऐलान, घर से दूर रहने वालों को होगा फायदा

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
One nation one ration card, free food government Schemes Falter, few beneficiaries got benefit
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X