लोको पायलट को भी ट्रेन चलाने के लिए बनवाना पड़ता है ड्राइविंग लाइसेंस, पहले किस गाड़ी से करते हैं हाथ साफ
Train Driver License: जिस तरह से बस-ट्रक चलाने के लिए ड्राइवर को लाइसेंस बनाने की जरूरत होती है। उसी तरह क्या ट्रेन ड्राइवर को भी लाइसेंस बनाना पड़ता है।

Train Driver License: कोई भी वाहन चलाने से पहले उसका वैध लाइसेंस होना अनिवार्य होता है। बाइक, कार, ऑटो, बस और ट्रक समेत किसी भी गाड़ी को चलाने के लिए लाइसेंस होना बेहद जरूरी है। अगर बिना लाइसेंस के गाड़ी चलाते हैं तो यह अपराध माना जाता है। इसलिए किसी भी गाड़ी चलाने से पहले आरटीओ ऑफिस से लाइसेंस बनाना होता है। यहां तक कि विमान उड़ाने के लिए भी लाइसेंस की जरूरत होती है।
इस बीच हम एक और गाड़ी की बात कर रहे हैं, जिसे चलाने के लिए क्या लाइसेंस की जरूरत होती है। हम ट्रेन के बारे में बात कर रहे हैं। क्या ट्रेन को चलाने के लिए लोको पायलट को लाइसेंस की आवश्यकता होती है? क्या उन्हें ट्रेन का ड्राइवर बनने से पहले कहीं से लाइसेंस बनाना पड़ता है?
आपके सवालों का जवाब दूं तो इसका उत्तर नहीं में है। क्योंकि, लोको पायलट की भर्ती रेलवे करता है। इसके बाद ट्रेनिंग स्कूल में प्रशिक्षण देकर ट्रेन चलाने के काबिल बनाता है। इसलिए ट्रेन चलाने वाले ड्राइवर को भर्ती से पहले कहीं से लाइसेंस बनाने की जरूरत नहीं होती है। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद रेलवे की तरफ से उन्हें कंपेटेंसी सर्टिफिकेट दिया जाता है। इस सर्टिफिकेट के आधार पर वह ट्रेन चला सकते हैं।
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प्रशिक्षण समाप्त होने और कंपेटेंसी सर्टिफिकेट मिलने के बाद लोको पायलट को पहले माल गाड़ी चलानी होती है। उन्हें सबसे पहले सवारी गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं होती है। पहले मालगाड़ी से ही हाथ साफ करना पड़ता है। यहां पूरी तरह सीख लेने के बाद सवारी गाड़ी चलाने का अवसर मिलता है।
ट्रेक का लोको पायलट बनने के लिए लिखित परीक्षा के बाद साक्षात्कार से गुजरना पड़ता है। इसके बाद रेलवे युवाओ को ट्रेन ड्राइवर प्रशिक्षण केंद्र भेज देता है। वहां से प्रशिक्षण लेने के बाद उन्हें एक सर्टिफिकेट मिलता है। इसके बाद उन्हें ट्रेन चलाने की अनुमति होती है।
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