कैसे शेयर बाजार की गिरावट में बचाएं अपना निवेश, जानिए जबरदस्त फॉर्मूला
पिछले एक महीने में शेयर बाजार में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। भारत समेत दुनिया भर के इक्विटी बाजारों में अस्थिरता का दौर जारी है, एक महीने में बीएसई सेंसेक्स में करीब 7% की गिरावट दर्ज की गई है। दुनियाभर के बाजारों में आगामी अमेरिकी चुनावों का प्रभाव स्पष्ट तौर पर दिखने को मिल रहा है। मौजूदा बाजार की अस्थिरता से निपटने के लिए जरूरी है कि आपके पोर्टफोलियो में विविधता हो। आपको इक्विटी, फिक्स्ड इन्कम और सोने जैसे वैकल्पिक निवेशों के मिश्रण को अपनाना चाहिए।
विशेषज्ञों की मानें तो आपके पोर्टफोलियो में विविधता होने के साथ, निवेश के ऐसे विकल्पों को अपनाना चाहिए जिसमे उच्च गुणवत्ता वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड और दीर्घकालिक ऋण साधनों को भी अपनाना चाहिए। पोर्टफोलियो में 5-10% सोने में भी निवेश होना चाहिए। ऐसे में आप बाजार की उतार-चढ़ाव को बेहतर तरह से हैंडल कर सकते हैं।

डाइवर्सिफाई पोर्टफोलियो
निवेश में सोना और चांदी काफी अहम है। पोर्टफोलियो में 10 फीसदी सोने-चांदी के निवेश में सोने को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह संकट मुद्रा के तौर पर काम करती है। उदाहरण के तौर पर अगर आपका कुल निवेश 50 लाख का है तो उसमे 70 फीसदी इक्विटी, 20-25 फीसदी अलग-अलग उच्च गुणवत्ता वाले ऋण विकल्प और 5-10 फीसदी सोने में निवेश होना चाहिए।
स्मॉल कैप से रहें दूर
इक्विटी की बात करें तो लार्ज-कैप स्टॉक, मल्टी-कैप या फ्लेक्सी-कैप में निवेश हमेशा से बेहतर रहता है। मार्केट की बड़ी गिरावट में जब तमाम शेयर गिरते हैं तो उसका असर हर सेक्टर पर पड़ता है।
लेकिन लार्ज और मिड कैप के स्टॉक जितनी तेजी से गिरते हैं, उतनी ही तेजी से रिकवर भी करते हैं। जबकि स्मॉल कैप के शेयर गिरते भी कहीं ज्यादा हैं और रिकवर होने में कई बार तो वर्षों लगा देते हैं।
बना हुआ है अमेरिकी चुनाव का खतरा
अमेरिकी चुनावों के कारण दुनिया भर के बाजारों में होने वाली संभावित अस्थिरता का खतरा बरकरार है। ये चुनाव व्यापार नीतियों, ब्याज दरों और भू-राजनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं। यही वजह है कि चुनाव के नतीजों से वैश्विक तरलता और विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) प्रवाह पर विभिन्न प्रभाव पड़ सकते हैं, खासकर आईटी और फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों पर।












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