HDFC merger: महज 3500 की बेसिक सैलरी पर पूर्व चेयरमैन दीपक पारेख ने ज्वाइन की थी कंपनी, पहला ऑफर लेटर वायरल
HDFC merger: HDFC और HDFC बैंक के मेगा विलय से पहले इसके चेयरमैन दीपक पारेख ने इस्तीफा दे दिया। साथ ही उन्होंने कर्मचारियों के लिए एक इमोशनल पोस्ट लिखा। इस बीच सोशल मीडिया पर उनका पहला ऑफर लेटर वायरल हो रहा। उसके साथ उनका सैलरी ब्रेकअप भी है, जिस पर 19 जुलाई 1978 की डेट लिखी हुई है। हालांकि इस लेटर की पुष्टि नहीं हो पाई है।
इस पत्र के मुताबिक उप महाप्रबंधक के रूप में नियुक्त पारेख को बेसिक 3500 रुपये का वेतन मिलता था, जिसमें 500 रुपये डीए भी जुड़ता था। इसके अलावा उसमें 15 एचआरए (आवास किराया भत्ता) और 10 प्रतिशत शहर प्रतिपूरक भत्ता भी था।

वैसे दीपक पारेख को सैलरी के अलावा उस जमाने में भी अन्य सुविधाएं ऑफर की गई थीं। जिसमें पीएफ, ग्रेच्युटी, मेडिकल इंश्योरेंस, लीव ट्रैवल फैसिलिटी, आवसीस फोन का खर्च आदि शामिल था।
45 साल तक दी सेवाएं
पारेख ने करीब 45 साल तक HDFC बैंक में काम किया। वो अभी और लंबी पारी खेलते लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक ने उम्र संबंधी प्रतिबंध लगा रखे हैं। ऐसे में पारेख बोर्ड में काम नहीं करेंगे।
पारेख को पांच कंपनियों को सार्वजनिक करने का श्रेय दिया जाता है। HDFC ने उनके नेतृत्व में 90 लाख से ज्यादा भारतीयों को होम लोन प्रदान किया है।
1 जुलाई को हुआ विलय
वैसे तो HDFC और HDFC बैंक के विलय की डील काफी पहले हो गई थी, लेकिन ये 1 जुलाई से प्रभावी हुआ। इस विलय के बाद HDFC दुनिया का चौथा सबसे बड़ा बैंक बन गया है। HDFC बैंक का 100 प्रतिशत स्वामित्व सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है।
शेयर का क्या होगा?
14 जुलाई से HDFC के शेयरों में कारोबार बंद हो जाएगा। सभी शेयरधारकों को HDFC लिमिटेड के प्रत्येक 25 शेयरों के लिए एचडीएफसी बैंक के 42 शेयर मिलेंगे। खास बता ये है कि HDFC बैंक देश का सबसे बड़ा निजी बैंक हो गया है।
आगे बढ़ती रहेगी विरासत: पारेख
वहीं अपने आखिरी खत में पारेख ने लिखा कि ये मेरे लिए संन्यास लेने का समय है। निश्चिंत रहें हम अब विकास और समृद्धि के एक बहुत ही रोमांचक भविष्य की ओर बढ़ रहे। हमारे इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता और हमारी विरासत को आगे बढ़ाया जाएगा।












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