Gold Silver Price: चांदी में बंपर गिरावट, 93000 हुई सस्ती, सोना भी 25k गिरी - खरीदें या रुकना ही समझदारी?
Gold Silver Price Today: सोना-चांदी में पैसा लगाने वालों के लिए 30 जनवरी किसी झटके से कम नहीं रहा। जिस चांदी ने कुछ ही दिनों में रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड बनाए थे, वही अब बंपर गिरती नजर आई। हालात ऐसे बने कि निवेशक यही सोचते रह गए - क्या तेजी का दौर खत्म हो गया है या यह सिर्फ मुनाफावसूली का असर है।
MCX पर चांदी का बड़ा क्रैश, रिकॉर्ड हाई से 93 हजार नीचे
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 30 जनवरी की शाम करीब 7 बजे मार्च वायदा के लिए चांदी का भाव एक झटके में करीब 72,000 रुपये गिरकर लगभग 3.27 लाख रुपये प्रति किलो पर आ गया।

गौर करने वाली बात यह है कि कुछ ही दिन पहले चांदी ने 4.20 लाख रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था। यानी रिकॉर्ड लेवल से अब तक चांदी करीब 93,000 रुपये टूट चुकी है। इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट माना जा रहा है।
सोने में भी जोरदार फिसलन, 25 हजार तक टूटा भाव
चांदी के साथ-साथ सोने ने भी निवेशकों को झटका दिया। MCX पर अप्रैल वायदा के लिए 10 ग्राम सोने का भाव शुक्रवार शाम तक करीब 16,000 रुपये से ज्यादा गिरकर लगभग 1.68 लाख रुपये पर पहुंच गया। रिकॉर्ड हाई 1.93 लाख रुपये से देखें तो सोना करीब 25,000 रुपये तक टूट चुका है। यानी जिन निवेशकों ने ऊंचे स्तर पर खरीदारी की थी, उन्हें फिलहाल भारी नुकसान दिख रहा है।
29 जनवरी को ऑल टाइम हाई, 30 जनवरी को जोरदार गिरावट
दिलचस्प बात यह है कि एक दिन पहले ही यानी गुरुवार 29 जनवरी को सोना और चांदी दोनों ने नया इतिहास रचा था। चांदी 30 हजार रुपये से ज्यादा उछलकर 4.20 लाख के पार चली गई थी, जबकि सोना भी करीब 16 हजार रुपये की छलांग लगाकर 1.93 लाख रुपये के ऊपर पहुंच गया था। लेकिन सिर्फ 24 घंटे में ही तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
अचानक पलटी बाजार की चाल, वजह क्या रही?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस तेज गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ग्लोबल लेवल पर मुनाफावसूली है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने बाजार की दिशा बदल दी, जिसमें उन्होंने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल की जगह पूर्व फेड गवर्नर केविन वार्श को लाने का संकेत दिया। इस ऐलान के बाद डॉलर मजबूत हुआ और डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज, यानी सोना और चांदी, दबाव में आ गईं।
इसके अलावा, लगातार रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों ने जमकर प्रॉफिट बुकिंग की। गोल्ड और सिल्वर ETF में भी तेज बिकवाली देखने को मिली और एफ एंड ओ सेगमेंट में शॉर्ट सेलिंग बढ़ने से गिरावट और गहरी हो गई।
इंटरनेशनल मार्केट का असर भी दिखा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी करीब 18 प्रतिशत तक फिसली और सोने में भी भारी दबाव देखने को मिला। डॉलर इंडेक्स में तेजी ने विदेशी निवेशकों के लिए इन धातुओं को और महंगा बना दिया, जिससे बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
क्या तेजी पूरी तरह खत्म हो गई?
हालांकि गिरावट बड़ी है, लेकिन एक्सपर्ट्स यह भी याद दिला रहे हैं कि जनवरी महीने में अब भी सोना करीब 20 प्रतिशत और चांदी लगभग 46 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद होने की ओर है। यानी लॉन्ग टर्म तस्वीर अब भी पूरी तरह खराब नहीं हुई है।
निवेशकों को अब क्या करना चाहिए?
जानकारों का कहना है कि अगर आपने सोना-चांदी या उससे जुड़े ETF काफी निचले स्तरों पर खरीदे थे, तो इस समय कुछ मुनाफावसूली करना गलत नहीं है। लेकिन जो निवेशक नए हैं, उनके लिए जल्दबाजी से बचना बेहतर होगा, क्योंकि आगे और गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कुछ एक्सपर्ट्स यह भी सलाह दे रहे हैं कि जिनके पोर्टफोलियो में सोना-चांदी का हिस्सा ज्यादा है, वे आंशिक प्रॉफिट बुकिंग करके बाकी निवेश को लॉन्ग टर्म नजरिए से होल्ड कर सकते हैं। कुल मिलाकर, फिलहाल धैर्य और संतुलन ही सबसे बड़ी रणनीति मानी जा रही है।
डिस्क्लेमर: यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है। निवेश से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।












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