Go First: आखिर कैसे कंगाल हो गई गो फर्स्ट, जानिए कहां हुई चूक
Go First एयरलाइंस कंगाल हो गई है और कंपनी ने एनसीएलटी में इसको लेकर याचिका भी दायर की है। आखिर कैसे यह कंपनी कंगाल हो गई है, कहां कंपनी से हो गई चूक,पढ़िए इस रिपोर्ट में

Go First Airlines: गो फर्स्ट एयरलाइंस ने अपनी सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है। कंपनी ने 5 मई तक के लिए अपनी सभी उड़ानों को रद्द करने का फैसला लिया है। जिसकी चलते उन लोगों को काफी दिक्कत हो रही है जिन्होंने अपनी फ्लाइट बुक की थी।
वहीं डीजीसीए ने गो फर्स्ट को नोटिस जारी करके 24 घंटों के भीतर जवाब मांगा है। डीजीसीए ने पूछा है कि आखिर क्यों एकदम से विमान का संचालन रोक दिया गया, यात्रियों को हो रही असुविधा के लिए क्यों ना आपके खिलाफ मानहानि का केस दर्ज किया जाए।
मंगलवार को कंपनी की ओर से कहा गया कि वह 3-5 मई के लिए अपनी सभी उड़ानों को रद्द कर रही है। इसकी बड़ी वजह कैश की कमी है। जो बयान एयरलाइंस की ओर से जारी किया गया है उसके अनुसार कंपनी ने अमेरिकी कंपनी पर इसका ठीकरा फोड़ा है।
एयरलाइंस के बयान के उसके अनुसार अमेरिका की विमान बनाने वाली कंपनी प्रैट एंड व्हिटनी ने जो विमान दिए हैं उसमे से आधे से ज्यादा विमान के इंजन में दिक्कत है, जिसकी वजह से कंपनी को कैश की किल्लत से जूझना पड़ रहा है और आखिरकार इसकी वजह से कंपनी को विमानों का संचालन रोकना पड़ रहा है।
यही नहीं गो फर्स्ट ने एनसीएलटी में दिवालिया घोषित किए जाने के लिए आवेदन किया है। जिसकी वजह से गो फर्स्ट के यात्रियों को अपने टिकट के पैसे वापस मिलने की चिंता सता रही है। हालांकि एयरलाइन की ओर से कहा गया है कि यात्रियों को टिकट का पूरा पैसा वापस दिया जाएगा।
आंकड़ों के अनुसार गो फर्स्ट ने हर साल नुकसान उठाया है। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया से कंपनी ने 1562 करोड़ रुपए का लोन लिया है, जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा ने कंपनी को 1530 करोड़, डॉयचे बैंक 1320 करोड़, आईडीबीआई बैंक का 59 करोड़, एक्सिस बैंक की ओर से 30 करोड़ रुपए का लोन दिया गया है।
अहम बात है कि किंगफिशर, जेट एयरवेज के बाद गो फर्स्ट तीसरी भारतीय एयरलाइन कंपनी है जो दिवालिया होने जा रहा है। यह एक बड़ी चिंता की बात है। जिस तरह से भारत लगातार एविएशन सेक्टर में आगे बढ़ रहा है, बड़ी संख्या में विमानों के ऑर्डर दिए जा रहे हैं, उस सब के बीच गो फर्स्ट एयरलाइंस का कंगाल होना देश के लिए चिंता का विषय है।
एक्सपर्ट का कहना है कि हो सकता है कि आंतरिक दिक्कतों की वजह से कंपनी दिवालिया होने की कगार पर है। इसके लिए एविएशन सेक्टर पर सवाल खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। यह कंपनी की आंतरिक विफलता की वजह से हो रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गो फर्स्ट ने कंपनी में दिक्कत की वजह इंजन में खराबी को बताया है। लेकिन इंजन की समस्या कोई ऐसी समस्या नहीं है कि टायर फट गया। लिहाजा यह कोई ठोस वजह नहीं हो सकती है कि विमान कंपनी कंगाल हो जाए।
गो फर्स्ट के पास कुल 61 विमान हैं, जिसमे से 56 विमान ऐसे हैं जो ए53 नियोस के है। जिसमे प्रैट एंड व्हिटनी का इंजन लगता है। ऐसे में एयरलाइन की तकरीबन 50 फीसदी विमान ग्राउंडेड थे, जो उड़ान नहीं भर पा रहे थे।
प्रैट एंड व्हिटनी की बात करें तो इसके विमान सिर्फ गो फर्स्ट के पास नहीं बल्कि कई और विमान कंपनियों के पास भी इसके इंजन हैं। लेकिन गो फर्स्ट के पास अधिकतर विमान प्रैट एंड व्हिटनी के इंजन थे। कंपनी समय से पैसों का भी भुगतान नहीं कर रही थी।












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