फेसबुक, वॉट्सऐप को लग सकता है झटका, लगाम कसने की तैयारी में केंद्र सरकार
केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी कि वह जल्द ही फेसबुक, स्काइप, वीचैट, वॉट्सऐप, और गूगल टॉक जैसी सर्विसेज को नियंत्रित करने के लिए नियम-कानून बनाने जा रही है।
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी कि वह जल्द ही फेसबुक, स्काइप, वीचैट, वॉट्सऐप, और गूगल टॉक जैसी सर्विसेज को नियंत्रित करने के लिए नियम-कानून बनाने जा रही है।


फेसबुक और वॉट्सऐप के लिए बनेंगे नियम
केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को बताया गया है कि ये नियम वैसे ही होंगे, जैसा कि देश में टेलिकॉम सर्विस प्रदाता कंपनियों के लिए होते हैं। दूरसंचार मंत्रालय की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में दलील दी गई थी कि ये सोशल नेटवर्क साइट ग्राहकों तक पहुंचने के लिए टेलिकॉम सर्विस प्रदाता कंपनी के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं, ऐप आधारित सेवाएं देते हैं और मेसेज व फोन करने की सुविधा देकर प्रतिस्पर्धा भी पैदा करते हैं। पर इन सबके बावजूद देश में इसके नियंत्रण को लेकर अभी तक कोई नियम और कानून नहीं बन पाया है।

प्राइवेसी को लेकर भी उठ चुका है मामला
इन ऑनलाइन सेवाओं को ओवर द टॉप सर्विसेज भी कहते हैं। ओटीटी सर्विस का मतलब यह होता है कि इंटरनेट के जरिए ऑडियो, वीडियो और अन्य मीडिया कॉन्टेंट ग्राहकों को उपलब्ध तो कराया जाए पर इसके लिए कई अन्य सिस्टम मसलन-केबल, सैटलाइट, टेलिविजन की जरूरत न पड़े। केंद्र सरकार का रूख ऐसे समय में सामने आया है जब वॉट्सऐप की प्राइवेसी का मामला सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ के पास पहुंच चुका है। याचिकाकर्ता कर्मण्य सिंह सरीन ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पर सवाल उठाए हैं। वॉट्सऐप को लेकर सुप्रीम कोर्ट 18 अप्रैल को लेकर बड़ा फैसला कर सकता है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और ट्राई से 16 जनवरी को इस बावत जवाब मांगा था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने पहले दिया था झटका
दिल्ली हाईकोर्ट ने वॉट्सऐप को अपने यूजर्स की जानकारी फेसबुक के साथ शेयर करने के रोक दिया था। पर अब सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वॉट्सऐप प्राइवेस पॉलिसी मेटर को संवैधानिक पीठ के पास भेज दिया है। अब इस मामले की सुनवाई 18 अप्रैल को होगी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जे.एस.खेहर और न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड की पीठ ने कहा कि इस केस में संबंधित पार्टियों को संवैधानिक पीठ के सामने पेश होना चाहिए। Read more:वॉट्सऐप को लेकर 18 अप्रैल को हो सकता है बड़ा फैसला, जानिए क्या है मामला

फेसबुक के साथ शेयर करन पर रोक लगा दी थी
इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार और ट्राई से 16 जनवरी को इस बावत जवाब मांगा था। याचिका में कहा गया था कि वॉट्सऐप और फेसबुक, वॉट्सऐप के 15.7 करोड़ यूजर्स का व्यक्तिगत डाटा अपने कमर्शियल यूज के लिए प्रयोग नहीं कर सकता है। वहीं इस मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने वॉट्सऐप को अपने यूजर्स की जानकारी फेसबुक के साथ शेयर करन पर रोक लगा दी थी।

अन्य कंपनियों के साथ शेयर नहीं किया जाए
आपको बताते चलें कि वॉट्सऐप ने 25 सिंतबर, 2016 को जारी अपनी नई प्राइवेसी पॉलिसी में इस बाबत स्पष्टीकरण जारी किया था। पिछले साल सितंबर 2016 को दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा था कि 25 सिंतबर, 2016 से पहले वॉट्सऐप की सर्विस को अपनाने वाले ग्राहकों के डाटा और जानकारी को डिलीट किया जाए और उसको फेसबुक व अन्य कंपनियों के साथ शेयर नहीं किया जाए।

कानूनी दायरे में रहकर ही काम कर सकें
दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि केंद्र और ट्राई इस बावत नियम बनाए कि वो कानूनी दायरे में रहकर ही काम कर सकें। वहीं वॉट्सऐप ने हाईकोर्ट को बताया था कि जब एक यूजर का एकाउंट डिलीट होता है तो अपने आप ही उसकी जानकारी भी सर्वर से चली जाती है।












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