• search
क्विक अलर्ट के लिए
अभी सब्सक्राइव करें  
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts

बैंकों पर कोरोना का असर, दोगुना हो सकता है NPA का बोझ, अभी फंसे हैं 9.35 लाख करोड़ बैड लोन

|

नई दिल्ली। कोरोना वायरस का असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। भारतीय बैंक भी इस कहर से बच नहीं पाएं हैं। लॉकडाउन और कोरोना के कारण भारतीय बैंकों पर NPA का बोझ और बढ़ने की उम्मीद है। 9.35 करोड़ के बैड लोन से जूझ रहे भारतीय बैंकों पर अभी इसका बोझ और बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक ये बोझ इस वित्तीय वर्ष के अंत तक दोगुना हो सकता है।

 भारतीय बैंकों पर कोरोना का असर

भारतीय बैंकों पर कोरोना का असर

रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना वायरस और लॉकडाउन के कारण वित्तीय वर्ष के अंत तक भारतीय बैंकों पर कर्ज का बोझ दोगुना हो सकता है। वर्तमान में भारतीय बैंक 9.35 लाख करोड़ रुपए के घाटे से जूझ रहे हैं, जो साल के अंत तक दोगुने हो सकते हैं। सितंबर 2019 के अंत में उनकी कुल संपत्ति का लगभग 9.1% के बराबर थी, लेकिन इस वित्त वर्ष के अंत तक बैंक का नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स यानी NPA 18-20% तक होने का अनुमान लगाया जा रहा है। भारतीय बैंकों के बकाए लोन का बोझ 20-25% तक बढ़ा है।

 दोगुना हो सकता है बैड लोन

दोगुना हो सकता है बैड लोन

दरअसल कोरोना और लॉकडाउन के कारण बैड लोन के बढ़ने की संभावना है, क्योंकि महामारी के कारण भारत में वसूली में देरी हो सकती है। रॉयर्ट्स ने अपनी रिपोर्ट में सरकारी बैंक के बड़े अधिकारी के हवाले से लिखा है कि बैंकों को एनपीए की दोगुनी राशि की रिपोर्ट की आशंका सता रही हैस हमने इससे पहले तिमाहियों में देखा है। बैंकर्स का कहना है कि जून या जुलाई से पहले अर्थव्यवस्था के पूरी तरह से खुलने की संभावना कम है। ऐसे में नुकसान लगातार बढ़ रहा है।

 इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा नुकसान

इन सेक्टर्स को सबसे ज्यादा नुकसान

रिपोर्ट के मुताबिक लॉकडाउन बढ़ने से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे और मझोले बिजनेस को हो रहा है। इसकी वडह उनके लोन की वसूली भी कम होगी। इस सेक्टर के लिए जो कुल लोन का करीब 20 फीसदी बनता है, सबसे बुरी तरह प्रभावित हो सकता है,क्योंकि भारत के सभी 10 सबसे बड़े शहर हाई-रिस्क वाले रेड जोन में आते हैं। ऐसे में कामकाज पर पाबंदी है और उद्योगों को नुकसान हो रहा है। एक्सिस बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत के रेड जोन दिसंबर तक बैंकों द्वारा किए गए समग्र लोन का लगभग 83% है। बैकर्स के मुताबिक आर्थिक वृद्धि पहले से ही सुस्त थी, जिसे कोरोना ने औहर बढ़ा दिया है। आपको बता दें कि McKinsey & Co ने अनुमान लगाया है कि कोरोना के कारण भारतीय इकोनॉमी जून से लेकर अगले 3 महीनों में लगभग 20% तक सिकुड़ सकती है। वहीं अगर लॉकडाउन और बढ़ा तो भारत की वित्त वर्ष में ग्रोथ 2% से 3% तक गिरने की संभावना है।

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
India expects bad debts at its banks could double after the coronavirus crisis brought the economy to a sudden halt, a senior government official and four top bankers told Reuters.
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more