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क्या आधार नंबर से हैकर्स आपके खाते से पैसे निकाल सकते हैं? सामने आई ये बड़ी जानकारी

पिछले कुछ सालों से ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में तेजी से इजाफा हुआ है। हर दिन सैकड़ों लोगों के बैंक खातों में स्कैमर सेंध लगातार पैसे लूट रही हैं। हर दिन ऑनलाइन फ्रॉड के नए नए पैटर्न सामने आ रहे हैं।

आज के समय में किसी शख्स का बैंक खाता और उसका आधार नंबर उसके लिए काफी महत्व रखता है। उनमें से किसी एक की जानकारी के लीक होने का मतलब बड़ा नुकसान है।अब आधार अधिकांश वित्तीय सेवाओं से जुड़ा हुआ है।

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इसलिए लोगों के बीच यह डर फैल रहा है कि, अगर किसी को उनका आधार नंबर पता है, तो हैकर उन सभी ऐप्स और बैंक सेवाओं तक पहुंच सकते हैं, जो उससे जुड़ी हुई हैं। लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि उनके खाते से पैसे निकाले जा सकते हैं।

ईटी की खबर के मुताबिक, इंडसइंड बैंक के उपभोक्ता परिचालन और समाधान वितरण प्रमुख अनिल राव का कहना है कि, सिर्फ किसी का आधार नंबर जानने से बैंक खाते को हैक करना और पैसे निकालना संभव नहीं है। जब तक आप ओटीपी साझा नहीं करते हैं या स्कैनर डिवाइस पर अपनी उंगली बायोमेट्रिक / फेस आईडी / आईरिस का उपयोग नहीं करते हैं, आपका बैंक खाता सुरक्षित है।

हालाँकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि, साइबर अपराधियों ने संपत्ति रजिस्ट्रार दस्तावेजों से लोगों की उंगलियों के निशान की नकल कर ली है। इसकी मदद से वह बैंक खाते से मोटी रकम निकालने के लिए आधार भुगतान प्रणाली (एईपीएस) का उपयोग कर रहे हैं।

ईटी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिसंबर 2022 में साइबर अपराधियों ने व्यक्तियों के आधार नंबर और उंगलियों के निशान प्राप्त करने के लिए दक्षिण हरियाणा के पलवल के तहसील कार्यालय को निशाना बनाया था। इससे सवाल उठता है कि, आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली अब कितनी सुरक्षित है?

सरकार ने आधार भुगतान प्रणाली का उपयोग करके पैसे चुराने के लिए साइबर अपराधियों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली तकनीकों का संज्ञान लिया है और इसलिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को अपडेट किया है।

वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री डॉ. भागवत कराड ने 31 जुलाई 2023 को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि आधार प्रमाणीकरण के दौरान नकली फिंगरप्रिंट के उपयोग से एईपीएस धोखाधड़ी को रोकने के लिए, यूआईडीएआई ने एक इन-हाउस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/मशीन लर्निंग तकनीक-आधारित फिंगर मिनुटिया रिकॉर्ड शुरू किया है।

फिंगर इमेज रिकॉर्ड (एफएमआर-एफआईआर) मोडैलिटी जो प्रमाणीकरण प्रक्रिया के दौरान क्लोन किए गए फिंगरप्रिंट के उपयोग का पता लगाने के लिए फिंगरप्रिंट की जीवंतता की जांच करने में सक्षम है।

क्या आधार-सक्षम भुगतान प्रणाली अब पूरी तरह सुरक्षित है?
धोखाधड़ी दो कारणों से होती है। जालसाज वित्तीय संस्थान के सर्वर को हैक कर लेते हैं या ग्राहक की जानकारी संग्रहीत करने वाले डेटाबेस को हैक कर लेते हैं या कोई गलती से अपना डेटा दे देता है और धोखाधड़ी का शिकार हो जाता है। अगर किसी हैकर्स को बैंक का नाम आधार संख्या और नामांकन के दौरान लिया गया बायोमेट्रिक्स मिल जाता है तो बैंक खाते में सेंध लग सकती है।

अपनी बायोमेट्रिक जानकारी कैसे सुरक्षित रखें?
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) की वेबसाइट के अनुसार, आधार संख्या धारक जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर पंजीकृत किया हुआ है। वे अपने बायोमेट्रिक्स को लॉक कर सकते हैं। इस सुविधा का उद्देश्य निवासियों के बायोमेट्रिक्स डेटा की गोपनीयता को मजबूत करना है। बायोमेट्रिक अनलॉक यूआईडीएआई वेबसाइट, नामांकन केंद्र, आधार सेवा केंद्र (एएसके) पर जाकर और एम-आधार के माध्यम से किया जा सकता है।

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