रेल का किराया बढ़ेगा या फिर होगा कम, जल्‍द ही होगा फैसला, जानिए क्‍यों?

तीन महीने के अंदर ही भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण की स्‍थापना कर दी जाएगी। इस रेलवे विकास प्राधिकरण में एक चेयरमैन और तीन स्‍वतंत्र सदस्‍य होंगे।

नई दिल्‍ली। केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल ने उस प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी है जिसके तहत रेलवे का यात्री किराया, माल भाड़ा किराया और परफॉर्मेंस स्‍टैंडर्ड तय करने के लिए नियामक बनाने की बात कही गई थी। अब तीन महीने के अंदर ही भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण की स्‍थापना कर दी जाएगी। इस रेलवे विकास प्राधिकरण में एक चेयरमैन और तीन स्‍वतंत्र सदस्‍य होंगे।

रेल का किराया बढ़ेगा या फिर होगा कम, जल्‍द ही होगा फैसला, जानिए अहम वजह

पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाएगी

पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाएगी

सुरेश प्रभु ने ईटी से बात करते हुए कहा कि रेलवे सेक्‍टर के लिए किया गया ये अभी तक का सबसे बड़े रिफॉर्म में से एक है। इसके जरिए अब देश के यात्रियों को दी जाने सेवाओं को बेहतरीन किया जाएगा। साथ ही निवेशकों को रेल क्षेत्र में विशेष सुविधाएं देने के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही तय की जाएगी।

भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण के पास यह अधिकार होगा

भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण के पास यह अधिकार होगा

उन्‍होंने बताया कि भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण के पास यह अधिकार होगा कि वो यात्री और मालभाड़ा किराए में बढ़ोतरी को लेकर स्‍वतंत्र रूप से अपनी राय दे सके। उन्‍होंने कहा कि इस वजह से पूरे रेलवे के किराए के स्‍ट्रक्‍चर में ही बदलाव होगा। उन्‍होंने कहा कि मार्केट के आधार पर रेल के किराए को तय करेंगे।

30,000 करोड़ रुपए का नुकसान रेलवे को उठाना पड़ता

30,000 करोड़ रुपए का नुकसान रेलवे को उठाना पड़ता

रेलवे के एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि यह नियामक ऐसे स्‍टैंडर्ड बनाएगा जिसके साथ रेलवे चल सकें। यह एक ऐसा कदम है कि अब देश भर में ग्राहक भारतीय रेलवे की तुलना दूसरे ट्रांसपोर्ट सिस्‍टम के साथ कर सकेंगे। रेलवे के मुताबिक यात्रियों को सब्सिडी देने के चलते हर साल 30,000 करोड़ रुपए का नुकसान रेलवे को उठाना पड़ता है। इसलिए रेलवे को अपना नुकसान कम करने के लिए माल भाड़े में बढ़ोतरी करनी पड़ी।

50 करोड़ रुपए का फंड दिया गया

50 करोड़ रुपए का फंड दिया गया

रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि हमारा माल भाड़ा किराया कई यूरोपीय देशों और चीन से बहुत ज्‍यादा है। इसकी मुख्‍य वजह है कि सड़क के जरिए भेजे जाने वाले माल भाड़े किराए का कम होना है। उन्‍होंने उम्‍मीद जताई कि रेलवे विकास प्राधिकरण जल्‍द ऐसे फ्रेट रेट तय करेगा जिससे हम रोडवेज से मुकाबला कर सकें। भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण के चेयरमैन और सदस्‍यों का कार्यकाल 5 सालों को होगा। इस भारतीय रेलवे विकास प्राधिकरण की स्‍थापना के लिए 50 करोड़ रुपए का फंड दिया गया है।

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