Swiggy-Zomato से खाना ऑर्डर करने वालों को झटका, GST काउंसिल की रडार पर ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी

जीएसटी के दायरे में ऑनलाइन फूड डिलीवरी को लाने की तैयारी

नई दिल्ली, 15 सितंबर। कोरोना महामारी के बीच ऑनलाइन फूड ऑर्डर करने वालों को आने वाले दिनों में झटका लग सकता है। ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी जैसे जोमैटो, स्वीगी जैसी कंपनी जीएसटी काउंसिल के रडार में है। माना जा रहा है कि सरकार ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनियों को जीएसटी के दायरे में ला सकती है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अधयक्षता में 17 सितंबर को जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक होने वाली है।

Bad News for Zomato and Swiggy customer, Online food delivery services may attract GST soon.

जीएसटी काउंसिल की अहम बैठक में पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप जैसे स्विगी-जोमैटो को जीएसटी के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। खबरों की माने तो जीएसटी काउंसिल की 45वीं बैठक बेहद अहम होने वाली है। इस बैठक में फूड डिलीवरी ऐप्स आधारिक कंपनियों को जीएसटी के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है। माना जा रहा है कि इन्हें कम से कम 5 फीसदी जीसएटी के दायरे में लाने की सिफारिश की गई है। अगर ये प्रस्ताव पास हो जाता है तो स्विगी, जोमैटो जैसे ऐप्स से ऑनलाइन फूड मंगाना महंगा हो सकता है।

फूड डिलीवरी कंपनियों के अलावा पेट्रोलियम पदार्थों, जैसे कि पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस , विमान फ्यूल को भी जीएसटी के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है। हालांकि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के अंदर लाने से तेल की बढ़ती कीमत को घटाने में केंद्र सरकार को बड़ी मदद मिलेगी, लेकिन ये काम इतना आसान नहीं है। जीएसटी प्रणाली में बदलाव के लिए पैनल के तीन-चौथाई लोगों की मंजूरी जरूरी है। इस पैनल में सभी राज्यों के प्रतिनिधि हैं, जो पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीसटी के दायरे में लाने का विरोध कर रहे हैं।

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