Sologamy marriage क्या है ? गुजरात की क्षमा बिंदु करेंगी देश में 'पहली' ऐसी शादी
वडोदरा, 2 जून: गुजरात के वडोदरा शहर की 24 साल की एक युवती क्षमा बिंदु अपने-आप में एक अनोखी शादी की वजह से सुर्खियों में आ चुकी हैं। 11 जून को वो खुद के साथ ही सात फेरे लेने की तैयारियों में जुटी हुई हैं। इस विवाह को सोलोगैमी का जाता है और भारत में इस तरह की शादी का कोई और मामला अबतक सामने नहीं आया है। आइए जानते हैं कि स्व-विवाह क्या होता है, इसकी क्या कानूनी वैद्यता है और ऐसी शादी रचाने का मकसद क्या है? वैसे बता दें कि क्षमा बिंदु सिर्फ अपने साथ शादी ही नहीं कर रही हैं, शादी के बाद उनका हनीमून के लिए गोवा जाने का भी प्लान है। आपको सुनने में अजीब लग रहा होगा, लेकिन दुनिया के कुछ देशों में ऐसे लोग सामने आ चुके हैं और अब भारत में भी ऐसा होने जा रहा है।

सोलोगैमी मैरिज या स्व-विवाह क्या है ?
सोलोगैमी या स्व-विवाह एक ऐसा प्रतीकात्मक विवाह समारोह है, जिसमें लोग खुद के साथ एक सार्थक, गहरा और प्यार वाला संबंध निभाने के लिए स्वयं के साथ ही वैवाहिक बंधन में बंध जाते हैं। यानी यह खुद के साथ ही जीवन बिताने का संकल्प है, लेकिन यह जरूरी नहीं कि अकेले रहने के फैसले की वजह से उसे ब्रह्मचर्य का पालन ही करना है। जानकारों की राय में दुनिया के कुछ देशों में हाल के वर्षों में स्व-विवाह का प्रचलन बढ़ने लगा है, जिसका कारण यह बताया जा रहा है कि भाग-दौड़ की जिंदगी में लोग खुद को ही भूलने लगे हैं। ऐसे लोग खुद में ही रहकर खुद को ही खोजना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें सोलोगैमी एक आसान तरीका लगता है।
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सोलोगैमी क्यों करते हैं ?
स्व-विवाह के पक्ष में यह भी दलील दी जाती है कि जबतक आप खुद से प्रेम नहीं करेंगे, आप दूसरों से प्यार नहीं कर सकते। एक क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट गिल एडवर्ड्स ने अपनी किताब 'वाइल्ड लव' में इस बात का जिक्र किया है कि 'लोग रोजी-रोटी के चक्कर में खुद से प्यार नहीं कर पाते और खुद को ही भुला देते हैं। इसलिए अपने लिए कुछ क्यों ना किया जाए ? सोलोगैमी खुद के प्रति संवेदना को खुलकर जाहिर करने का एक माध्यम है और अपने आप को वह सब देने का वादा है, जो आप अक्सर दूसरे लोगों से चाहते हैं।'

क्या सोलोगैमी विवाह कानूनी तौर पर मान्य है ?
सोलोगैमी शादी एक प्रतीकात्मक विवाह समारोह है, जो कानून के दायरे में नहीं बंधा है। ऐसी शादी करने वालों को अपने मूल दस्तावेजों में किसी तरह के बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है। यदि आज आप सोलोगैमी करते हैं और भविष्य में किसी दूसरे से (महिला को पुरुष से और पुरुष को महिला से) पारंपरिक विवाह करने की इच्छा हो जाती है, तो आप किसी तरह से कानूनी लफड़े में नहीं फंसेंगे। क्योंकि, कानून की नजर में आपकी पहली शादी (स्व-विवाह) की कोई मान्यता नहीं होगी।

खुद से शादी रचाने वाली 'पहली' भारतीय होंगी क्षमा बिंदु
गुजरात की वडोदरा की रहने वाली 24 साल की क्षमा बिंदु शायद देश की पहली ऐसी युवती हैं, जो 11 जून को खुद के साथ ही वैवाहिक जीवन में बंधने जा रही हैं। इस शादी में वह सभी तरह की वैवाहिक रस्में पूरी करेंगी, चाहे सात फेरे लगाने हों या फिर मांग में सिंदूर भरना, लेकिन इसमें कोई दूल्हा नहीं होगा और वह खुद ही दुल्हन भी होंगी और खुद ही अपने वर की वैवाहिक औपचारिकताएं भी पूरी करेंगी।

क्षमा बिंदु खुद से ही शादी क्यों कर रही हैं ?
क्षमा बिंदु ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा है,'मैं कभी शादी नहीं करना चाहती थी। लेकिन, मैं दुल्हन बनना चाहती थी। इसलिए मैंने खुद से ही विवाह करने का फैसला कर लिया। ' उनका कहना है कि 'शायद अपने देश में सेल्फ-लव का उदाहरण सेट करने वाली मैं पहली हूं।' उनके मुताबिक, 'स्व-विवाह खुद से बिना शर्त प्यार करने की प्रतिबद्धता है। यह आत्म-स्वीकृति का भी कार्य है। लोग जिससे प्यार करते हैं, उससे शादी करते हैं। मैं खुद से प्यार करती हूं, इसलिए यह शादी कर हूं।'

हनीमून के लिए गोवा जाने का प्लान
एक प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली क्षमा का कहना है कि हालांकि हो सकता है कि कुछ लोगों को यह शादी का मतलब समझ में ना आए, 'लेकिन, वास्तव में मैं यह दिखाने की कोशिश करना चाहती हूं कि औरत मायने रखती है।' उनका कहना है कि उनके फैसले में उनके माता-पिता का आशीर्वाद है और वह एक मंदिर में शादी करने के बाद हनीमून के लिए गोवा जाने की भी तैयारी कर चुकी हैं। (तस्वीरें सौजन्य: kshamachy इंस्टाग्राम से)












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