ब्रेन स्ट्रोक की ही तरह खतरनाक होता है स्पाइनल स्ट्रोक, जानिये इसके बारे में
ब्रेन स्ट्रोक की समस्या से तो सभी अवगत हैं। जैसे ये परेशानी तेजी से बढ़ रही है, वैसे ही एक और समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप धरती जा रही है। और ये है ब्रेन स्ट्रोक।
जिस तरह दिमाग में ब्लड की सप्लाई रुकने पर ब्रेन स्ट्रोक होता है, ठीक उसी तरह रीढ़ की हड्डी में अगर ब्लड सप्लाई किसी भी वजह से प्रभावित हो जाए, तो ये स्थिति स्पाइनल स्ट्रोक को जन्म देती है। ये ब्रेन स्ट्रोक की ही तरह बेहद खतरनाक होता है। ये जानलेवा भी हो सकता है।

जब रीढ़ की हड्डी में सही तरीके से खून का प्रवाह नहीं होता तो इसकी वजह से ऑक्सीजन सप्लाई भी बाधित हो जाती है। ऐसे में स्पाइनल स्ट्रोक के साथ-साथ स्पाइन कार्ड इंफ्रेक्शन की समस्या भी पैदा हो जाता है। ऐसे में सेल्स मर जाते हैं और इनके मरने पर हाथ पैरों का संचालन रुकने लगता है। इंसान को ऐसी स्थिति में लकवा भी मार सकता है।
स्पाइनल स्ट्रोक के मामलों को शुरुआत में ही पहचानने की सख्त जरूरत है। स्पाइनल स्ट्रोक के मामलों में मांसपेशियों की ऐंठन-चलने में कठिनाई हो सकती है। इसके साथ ही अंग भी सुन्न हो सकते हैं। इसकी वजह से मूत्राशय पर नियंत्रण भी मुश्किल हो जाता है। इंसान को लकवा भी मार सकता है। इंसान को सांस लेने में भी दिक्कत होती है। कई मामलों में स्पाइनल स्ट्रोक से इंसान की मौत भी हो सकती है।
ज्यादातर मामलों में स्पाइनल स्ट्रोक की समस्या जोखिम को और भी बढ़ा सकती हैं। इससे हाई कोलेस्ट्रॉल-हाई ब्लड प्रेशर की समस्या, ह्रदय रोग, मोचापा, डायबिटीज के साथ-साथ शारीरिक निष्क्रियता भी हो सकती है। इस समस्या के इलाज से पहले इसके कारणों को समझने की जरूरत होती है। इसके आधार पर शख्स को सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
रीढ की हड्डी के स्ट्रोक के मामले वैसे तो काफी दुर्लभ हैं, लेकिन कई बार ये बहुत गंभीर भी हो सकते हैं। कई बार इससे लकवा भी हो सकता है और रोजमर्रा की जिंदगी में इसका असर देखने को मिल सकता है।












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