• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

32 एकड़ जमीन के मालिक यहां बंदर, रिकॉर्ड्स में भी उनके नाम, बेहद रोचक कहानी

Google Oneindia News

Monkeys 32 acres land in Maharashtra: एक तरफ जहां जमीन को लेकर भाई-भाई एक दूसरे के खून के प्यासे हो जाते हैं। आए दिन जमीन को लेकर आपसी विवादों की खबरें सुनने को मिली है। वहीं दूसरी तरफ महाराष्ट्र से हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां के उस्मानाबाद जिले के एक गांव में बंदरों के नाम 32 एकड़ की जमीन है। और ऐसा यहां के बंदरों को दिए गए खास सम्मान के तहत किया गया है।

बंदरों के नाम 32 एकड़ जमीन रजिस्टर्ड

बंदरों के नाम 32 एकड़ जमीन रजिस्टर्ड

आज के दौर में कोई अपना जमीन का एक टुकड़ा किसी को देना नहीं चाहता। चाहे उसके लिए कोर्ट में जाकर लंबी कानूनी लड़ाई ही क्यों ना लड़नी पड़े, लेकिन उस्मानाबाद के उपला गांव में लोग बंदरों को खास सम्मान देते हैं। जिसके तहत बंदरों के नाम 32 एकड़ जमीन रजिस्टर्ड है।

इतनी बड़ी जमीन आखिर बंदरों के पास कैसे हैं?

इतनी बड़ी जमीन आखिर बंदरों के पास कैसे हैं?

अब सोच रहे होंगे कि आखिर ऐसा क्यो? गांव में इतनी बड़ी जमीन आखिर बंदरों के पास कैसे हैं। तो इसके पीछे की कहानी आपको जाननी पड़ेगी। दरअसल, दरअसल उस्मानाबाद के उपला गांव के लोग बंदरों को बहुत मानते हैं। उनके घर की दहलीज पर अगर बंदर पहुंचते हैं तो उनको खाना खिलाया जाता है। इतना ही नहीं शादी के कार्यक्रम शुरू होने से पहले उनकों सम्मान दिया जाता है।

भूमि अभिलेखों में बंदरों के नाम जमीन

भूमि अभिलेखों में बंदरों के नाम जमीन

उपला ग्राम पंचायत के पास मिले भूमि अभिलेखों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यहां की 32 एकड़ भूमि गांव में रहने वाले सभी बंदरों के नाम है। वहीं बंदरों के नाम जमीन को लेकर गांव के सरपंच बप्पा पड़वाल ने बताया कि दस्तावेजों में साफ तौर पर कहा गया है कि जमीन बंदरों की है, लेकिन यह पता नहीं है कि जानवरों के लिए यह प्रावधान किसने और कब किया?

गांव में अब 100 बंदरों के घर

गांव में अब 100 बंदरों के घर

वहीं उन्होंने आगे कहा कि अतीत में गांव में किए जाने वाले सभी अनुष्ठानों का बंदर हिस्सा थे। इसी के साथ उन्होंने बंदरों की घटती संख्या पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अब गांव में करीब 100 बंदर हैं और पिछले कुछ सालों में उनकी संख्या घटती जा रहा है, क्योंकि जानवर एक स्थान पर लंबे समय तक नहीं रहते।

बंदरों को पहले दिया जाता था उपहार

बंदरों को पहले दिया जाता था उपहार

उन्होंने कहा कि वन विभाग ने जमीन पर वृक्षारोपण का काम किया है और भूखंड पर एक खाली घर भी था, जो अब ढह गया है। सरपंच ने कहा, "पहले, जब भी गांव में शादियां होती थीं, तो बंदरों को पहले उपहार दिया जाता था और उसके बाद ही समारोह शुरू होता था। अब हर कोई इस प्रथा का पालन नहीं करता है। जब भी वे अपने दरवाजे पर आते हैं तो ग्रामीण बंदरों को खाना भी खिलाते हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी उन्हें खाने से मना नहीं करता है।

'Uber for Animals': चीतल की पीठ पर बैठ बंदर ने की IIT मद्रास के कैंपस की सवारी, फनी VIDEO जीत रहा लोगों का दिल'Uber for Animals': चीतल की पीठ पर बैठ बंदर ने की IIT मद्रास के कैंपस की सवारी, फनी VIDEO जीत रहा लोगों का दिल

Comments
English summary
32 acres of land registered in name of monkeys in Osmanabad Maharashtra
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X