कैसी ये मजबूरी! दो बेटियों संग 11 दिनों तक पैदल चलता रहा बेबस पिता
नोराफाट नाम का शख्स अपने हालातों से तंग आकर दो बेटियों संग पैदल ही नौकरी की तलाश में निकल पड़ा। 11 दिन के बाद उनकी मुलाकात एक ऐसे शख्स से हुई, जिसने उनकी जिंदगी बदल दी।
इस दुनिया में एक ओर तो लोगों के पास ना जाने कितना पैसा है और दूसरी ओर कई लोग इतने बेबस हैं, कि परिवार पालने के लिए भी उनका कोई सहारा नहीं है। ये लोग दो वक्त की रोटी को भी मशक्कत कर रहे हैं। ऐसा ही कुछ 47 साल के एक शख्स का हाल भी था, जिनके पास अपनी दो बेटियों को पालने के लिए नौकरी नहीं थी। अपनी स्थिति से शख्स कुछ इस कदर हताश हो गया कि दोनों बेटियों संग नौकरी की तलाश में निकल पड़ा। 11 दिन के इस सफर में बेटियों संग शख्स ने पेट्रोल पंप और मंदिरों में अपनी रातें बिताई। लेकिन कहते हैं ना- 'हिम्मते मर्दा मददे खुदा...' शख्स की ये मेहनत आखिरकार रंग ला ही गई।

11 दिनों तक पैदल चला शख्स
नौकरी की तलाश में शख्स अपनी दो बेटियों संग 1000 किलोमीटर पैदल चल पड़ा। उसका ये सफर तकरीबन 11 दिनों तक चला। इस दौरान तीनों ने मंदिरों, शेल्टर होम्स और पेट्रोल पंपों पर अपनी रातें बिताईं।

22 दिसंबर को पहुंचा Rayong सिटी
'आज तक' की खबर के मुताबिक घर से निकलते हुए नोराफाट नाम के इस शख्स के पास ना तो पैसे थे, और ना ही कोई वाहन। पैदल ही वे मंजिल की तलाश में थे। फिर 1000 किलोमीटर की दूरी तय कर 22 दिसंबर को वे Rayong सिटी पहुंच गए।

एक मुलाकात ने बदली जिंदगी
11 दिनों तक सफर करने बाद कहीं जाकर उनकी मुलाकात Pluak Rescue Team के सरावुत पूममारिन नाम के एक शख्स से हुई। बेसहारा लोगों की मदद करने वाले सरावुत को किसी दूसरे शख्स ने इस बेसहारा परिवार के बारे में जानकारी दी थी।

बेटियों के लिए हुई पढ़ाई की व्यवस्था
इसके बाद नोराफाट को सरावुत ने कंस्ट्रक्शन साइट पर नौकरी दिलवाई और उनकी दोनों बेटियों और उन्हें रहने के लिए जगह भी दी। इसके साथ ही दोनों बेटियों की पढ़ाई की व्यवस्था भी करवाई। नोराफाट ने थाई मीडिया से बातचीत की, तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने मदद के लिए लोगों का शुक्रिया अदा किया।












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