बंगाल की जांबाज लेडी CRPF ऑफिसर ने ट्रेन की रफ्तार को दे दी मात, रेल मंत्रालय ने शेयर किया Video

नई दिल्ली, 08 अगस्त। पश्चिम बंगाल के एक रेलेवे स्टेशन पर लेडी सीआरपीएफ अधिकारी जाबांजी देख रेलवे से भी बिना तारीफ किए रहा नहीं गया। लेडी ऑफीसर ने ट्रेन की रफ्तार को मात देते हुए जो किया वो शायद ही कोई कर पाता। जिस फुर्ती से प्लेटफॉर्म पर मां और बेटे को मौत के मुंह में जाने से बचाया गया उसे देख खुद रेलवे ने तरीफ की।

Bankura Railway Station

लेडी ऑफीसर ने बचाई दो जान

बांकुरा रेलवे स्टेशन पश्चिम बंगाल में है। यहां रेलवे सुरक्षा बल की एक महिला अधिकारी की त्वरित कार्रवाई की चर्चा इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब हो रही है। दरअसल इस लेडी ऑफीसर ने बड़ी फुर्ती से एक बड़ी दुर्घटना टाल दी। बांकुरा रेलवे स्टेशन पर चलती ट्रेन में एक महिला अपने बच्चे के साथ चढ़ने का प्रयास कर रही थी। लेकिन उसका पैर फिसल गया और वो ट्रैक की ओर गिर पड़ी। घटना के वक्त कुछ दूर पर खड़ी लेडी सीआरपीएफ अधिकारी ने काफी तेज दौड़ लगाई और समय रहते महिला के पास पहुंच गई। जब तक लेडी ऑफीसर महिला और बच्चे के पास पहुंची वो अपने शरीर का बैलेंस खो चुके थे और करीब- करीब ट्रैक ट्रेन और प्लेटफार्म के बीच फंसने ही वाले थे। इस दौरान सीआरपीएफ अधिकारी ने छपट्ट मारते हुए उन्हें प्लेटफॉर्म की ओर खींच लिया।

रेल मंत्रालय ने शेयर किया वीडियो

रेल मंत्रालय ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर इस दुर्घटना का एक वीडियो साझा किया और कैप्शन दिया "सेवा और सेवा भाव! पश्चिम बंगाल के बांकुरा स्टेशन पर आरपीएफ कर्मचारियों द्वारा की गई सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने एक बुजुर्ग महिला और उसके बेटे की जान बचाई, जो चलती ट्रेन में चढ़ते समय फिसल गई थी। यात्रियों से अनुरोध है कि वे चलती ट्रेन में न चढ़ें और न ही उतरें,"

वीडियो में आरपीएफ के जवानों को गिरती हुई महिला की ओर दौड़ते हुए देखा जा सकता है। कुछ यात्रियों को भी उनकी मदद करने में अधिकारी के साथ देखा गया। दुर्घटना को देखते हुए, आरपीएफ अधिकारी को महिला की ओर दौड़ते हुए और समय पर वापस प्लेटफॉर्म पर खींचते हुए देखा जा सकता है। अपलोड होने के बाद से, वीडियो लगभग 15.4K बार देखा जा चुका है। जिस पर लोग जमकर कमेंट कर रहे हैं।

वीडियो वायरल

एक यूजर ने रेलवे को सुझाव देते हुए लिखा 'संपूर्ण भारतीय रेलवे को मेट्रो जैसे स्वचालित दरवाजों को अपनाना चाहिए जो जीवन बचा सकते हैं.... बिना खुले दरवाजों और खुली खिड़कियों वाली पूर्ण एसी ट्रेनें समाधान हैं...खुले दरवाजे और गैर-एसी ट्रेनें पुरानी, ​​धीमी और अविश्वसनीय हैं'। वहीं यूजर ने लिखा 'रेलवे के पास बीच के स्टेशनों पर इतना कम समय है कि कोई भी पानी की बोतल नहीं ले सकता। फंडा टाइम मैनेजमेंट। यह तो बुरा हुआ। प्रमुख स्टेशनों में जो कम से कम 10 मिनट का होना चाहिए'। जबकि एक रिट्वीट में लेडी सीआरपीएफ अधिकारी की तारीफ की गई। लिखा गया ' और इसे ही कहते सक्रियता हैं। आरपीएफ के जवानों को सलाम'।

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