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इंटरनेशनल नर्स डे: कोरोना वॉरियर्स जो जान जोखिम में डाल कर अपनी ड्यूटी निभाते हैं

By स्वामीनाथन नटराजन

एक मरीज़ का हाथ पकड़े हुए गेब्रियेला
Gabriela Serrano
एक मरीज़ का हाथ पकड़े हुए गेब्रियेला

दिल्ली: 10 दिन में तैयार हुई दुनिया की सबसे बड़ी Covid-19 केयर फैसिलिटी के बारे में सबकुछ जानिए

दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के चालीस लाख से ज़्यादा मामले सामने आ चुके हैं.

कई देशों की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है और अस्पतालों पर अचानक अत्यधिक बोझ आ पड़ा है. ऐसे वक्त में नर्सों का काम बहुत अहम हो गया है.

मरीज़ों को नहलाने से लेकर उन्हें साफ़-सुथरा रखने और उनके खाने-पीने का ध्यान रखने का काम नर्सें ही करती हैं. ये हमेशा मरीज़ों पर नज़र बनाए रखती हैं.

इसके बावजूद नर्सिंग के काम में आज भी ज़्यादा पैसा नहीं मिलता और दुनिया के कई हिस्सों में नर्सिंग के काम को वो सम्मान प्राप्त नहीं है जो उसे मिलना चाहिए.

'इंटरनेशनल नर्स डे' मौक़े पर बीबीसी ने चार अलग-अलग देशों के नर्सों से कोरोना वायरस के संक्रमण के इस विश्वव्यापी समस्या के दौर में उनकी चुनौतियों को लेकर बात की है.

यह दिन 12 मई को फ्लोरेंस नाइटिंगेल की याद में मनाया जाता है जो मॉडर्न नर्सिंग की संस्थापक मानी जाती हैं.

आदिवासी समुदायों को लेकर फिक्रमंद नर्स

शांति टेरेसा लाकरा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह पर रहने वाले आदिवासियों के बीच काम करती हैं.

वो कहती हैं, "24 मार्च को हमारे पास कोरोना के पहले चार मामले आए थे. उस वक्त मुझे तत्काल अस्पताल में भर्ती दो आदिवासी मरीज़ों का ख्याल आया. मैंने उन्हें तुरंत अस्पताल से जाने को कहा."

शांति जिन आदिवासी समूहों के बीच काम करती हैं, उनकी संख्या बहुत तेज़ी से कम होती जा रही है.

वो अस्पताल में जिन दो मरीजों की देखभाल कर रही थीं उनमें से एक जारवा आदिवासी समूह का पांच साल का बच्चा था जो कि निमोनिया से पीड़ित था.

इसके अलावा एक शोमेन आदिवासी समूह की एक महिला थीं, जो प्रजनन संबंधी इलाज के लिए अस्पताल में थीं.

जारवा के बारे में बाहरी दुनिया को साल 1997 में पता चला. इस जनजाति के लोग जंगलों में रहते हैं, कपड़े का इस्तेमाल नहीं जानते और शिकार करते हैं.

पोर्ट ब्लेयर से 80 किलोमीटर दूर जंगल में इस जनजाति के लोग रहती हैं.

शांति टेरेसा लाकरा
Shanti Teresa lakra
शांति टेरेसा लाकरा

जारवा समुदाय

अस्पताल से बच्चे को डिस्चार्ज करने के एक हफ्ते के बाद शांति उससे मिलने जंगल में गईं.

वो बताती हैं, "वो पूरी तरह से ठीक हो चुका था. मैं उसकी भाषा में थोड़ी-बहुत बात कर सकती थी. मैंने उससे कहा कि वो रहने के लिए जंगल में और अंदर चला जाए और कुछ वक्त तक वहीं रहे."

आइसोलेशन हज़ारों सालों से इन मूल प्रजाति के लोगों के लिए कवच का काम करता रहा है. लेकिन पिछले सदी में हुए विकास ने इनकी आबादी पर बुरा असर डाला है.

शांति बताती हैं कि जारवा समुदाय में अभी मात्र 450 सदस्य ही हैं.

वो कहती हैं, "इन लोगों की इम्युनिटी बहुत कमज़ोर होती है. एक कोरोना संक्रमित व्यक्ति पूरी आबादी को संक्रमित कर सकता है."

जारवा समुदाय का एक व्यक्ति
Getty Images
जारवा समुदाय का एक व्यक्ति

फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड

वो बताती हैं कि महामारी का असर कम होने के बाद शोमेन की उस महिला का अस्पताल में फिर से इलाज शुरू किया जाएगा.

शोमेन जनजाति भी जारवा की तरह ही निकोबार द्वीप समूह की एक शिकारी जनजाति है. इसकी आबादी भी कमोबेश जारवा की आबादी के बराबर ही है.

भारतीय स्वास्थ्य विभाग से जुड़ कर 48 साल की शांति टेरेसा लाकरा ने नर्सिंग में प्रशिक्षण लिया है.

उन्हें फ्लोरेंस नाइटिंगेल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है. नर्सिंग के लिए दिया जाने वाला यह सबसे बड़ा सम्मान है.

वो कहती है, "मैं तभी जारवा लोगों से मिलने जाऊंगी जब यह निश्चित हो जाएगा कि ऐसा करना उनके लिए सुरक्षित होगा."

जारवा समुदाय के लोग
Getty Images
जारवा समुदाय के लोग

'हमारे काम को अब पहचान मिली है'

स्पेन की एक नर्स मारिया मोरेनो ज़िमेनेज़ कहती हैं, "वायरस का संक्रमण इतने आक्रमक ढंग से और इतनी तेज़ी से फैला कि हमारे पास इससे लड़ने के लिए तैयारी करने और योजना बनाने का वक्त ही नहीं था."

32 साल की मारिया मोरेनो ज़िमेनेज़ बार्सिलोना के एक अस्पताल के आईसीयू में काम करती हैं.

मार्च में कोरोना के प्रकोप के बढ़ने के साथ ही मारिया और उनकी टीम ने पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट के इस्तेमाल को लेकर दो घंटे का प्रशिक्षण लिया जिसके बाद वो मैदान में कूद पड़ी.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "मार्च के मध्य में कोरोना के पहले मरीज़ से मेरा सामना हुआ. वो अपनी उम्र के सातवें दशक में थे."

एक महीने की देखभाल के बाद उनकी जान बच गई.

मारिया मोरेनो ज़िमेनेज़
Maria Moreno Jimenez
मारिया मोरेनो ज़िमेनेज़

आम ज़िंदगी में...

मारिया बताती हैं, "जब मैंने उन्हें रिकवरी वार्ड में देखा तब मैं बहुत खुश हुई. मैंने उन्हें बताया कि मैं उनमें से एक हूँ जिन्होंने आईसीयू में उनका ख़याल रखा था."

"हो सकता है कि वो पूरी तरह से मेरी बात समझ नहीं पाए. आईसीयू में ज़्यादातर मरीज़ों को बेहोशी की हालत में रखा जाता है."

मारिया बताती हैं, "कई दिन आईसीयू में बिताने के बाद भी ठीक हो चुके मरीज़ इस संदेह से बाहर नहीं निकल पाते हैं कि वो ठीक हो चुके हैं. आम ज़िंदगी में फिल्मों की तरह नहीं होता कि मरीज़ भावुक होकर आपको शुक्रिया बोलते हैं. आईसीयू से निकलने के बाद मरीज़ उस हालत में नहीं होते जैसा वो यहां आने से पहले रहते हैं. उन्हें बहुत सारी बातें याद नहीं रहती और ना ही वो ज़्यादा बात करते हैं."

"मैं यही देखकर बहुत खुश थी कि वो वापस अपने घर जा रहे हैं."

मारिया के पति भी उसी अस्पताल में नर्स हैं जहाँ मारिया काम करती है. उनके साथ काम करने वाले कुछ लोग कोरोना वारस से संक्रमित हो चुके हैं. एक की मौत भी हो चुकी है और कुछ अब भी संक्रमित है.

मारिया अपने पति के साथ
Maria Moreno Jimenez
मारिया अपने पति के साथ

लोग नर्सों को भूल जाते हैं...

स्पेन में सख्त लॉकडाउन लगने के बाद लोगों ने बालकनी में आकर कोरोना वॉरियर्स के लिए ताली बजाने और उनका हौसला बढ़ाने को अपने रुटिन में शामिल कर लिया है.

मारिया बताती है, "स्पेन में हेल्थकेयर को सिर्फ डॉक्टरों से जोड़ कर देखने की एक आम प्रवृति हैं. लोग डॉक्टरों का शुक्रिया अदा करते हैं लेकिन नर्सों को भूल जाते हैं."

मारिया उम्मीद करती है कि इस महामारी के बाद हालात बदलेंगे.

वो बताती हैं, "जो अस्पताल में भर्ती होते हैं, सिर्फ वही हमारे काम को समझ पाते हैं. लेकिन अब हर किसी को हमारे काम के बारे में पता चल रहा है."

"लोग हमारे काम की तारीफ़ करते है तो यह वाकई में बहुत अच्छा होगा. हमारे काम को सम्मान देने के लिए मैं समझती हूँ कि लोग हमें याद रखें और हमारा नाम लें."

गैब्रियेला सेरानो
Gabriela Serrano
गैब्रियेला सेरानो

'कोई नहीं, सिर्फ मैं उनके साथ थी'

गैब्रियेला सेरानो अमरीका में नर्स हैं. वो उन दिनों को याद करती हैं जब कोरोना से संक्रमित पहला मरीज़ अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ था.

वो कहती हैं, "वो बहुत खुश थीं. व्हीलचेयर पर मैं उन्हें बाहर लाई थी. उन्होंने कहा था कि सूरज की रोशनी देखने और ताज़ी हवा में सांस लेने में कितना आनंद आ रहा है."

सेरानो सात साल से नर्स का काम कर रही हैं. महामारी के दौरान उन्होंने सेन फ्रांसिस्को के बाहरी इलाक़े में मौजूद एक अस्पताल में काम किया है.

वो बताती हैं, "जिन दो कोरोना मरीजों की मैं देखभाल कर रही थी उनकी हालत बहुत अच्छी नहीं थी. दोनों की उम्र सत्तर से ऊपर थी. दोनों ठीक हो गए हैं. इस बात से मुझे हौसला दिया है."

हालांकि सेरानो को पिछले दो महीने में तीन ऐसे लोगों की मौत भी देखनी पड़ी है जो कोरोना के मरीज़ नहीं थे.

आख़िरी कुछ घंटे...

वो बताती हैं कि एक बार उन्होंने एक ऐसी महिला की देखभाल की जो मरने वाली थीं.

वो बताती हैं, "पहले दिन उनमें थोड़ी हरकत थी लेकिन वो बोल नहीं पा रही थीं. मैंने उन्हें बताया कि मैं क्या-क्या कर रही हूँ लेकिन वो मेरी बात का जवाब नहीं दे पा रही थीं. अगले दिन वो आंख नहीं खोल पा रही थीं."

अस्पताल ने उनके परिजनों को आख़िरी कुछ घंटों में उनसे मिलने की इजाज़त दी थी लेकिन दुर्भाग्य से उनका कोई क़रीबी परिवार में नहीं था और उनके सबसे अच्छे दोस्तों ने अस्पताल से दूर ही रहना बेहतर समझा.

"मैं उनके साथ बैठी थी. उनका हाथ पकड़ कर. मैंने उन्हें कहा कि सब कुछ ठीक हो जाएगा. उनके साथ अगर कोई वहां उस लम्हे में था तो मैं थी. मैं नहीं जानती कि वो मुझे सुन पा रही थीं या नहीं लेकिन मुझसे जो बन पड़ा, वो मैंने उनके लिए वो किया."

गेब्रियाना सेरानो
Gabriela Serrano
गेब्रियाना सेरानो

वायरस से संक्रमित होने का डर

इतनी मेहनत से मरीज़ों की देखभाल करने के बावजूद सेरानो उनकी नौकरी नहीं बची. वो थोड़े-थोड़े अंतराल पर अस्पताल के साथ अनुबंध पर काम करती हैं.

अस्पताल में दूसरे मरीज़ कम आ रहे हैं क्योंकि उन्हें वायरस से संक्रमित होने का डर सता रहा है.

अगर इमरजेंसी नहीं है तो वो अस्पताल से दूरी बना रहे हैं. इसलिए जिस अस्पताल ने उन्हें काम पर रखा था, उसने उन्हें नौकरी से निकाल दिया.

सेरानो कहती हैं, "मुझे उम्मीद है कि एक महीन के अंदर मुझे फिर से से नौकरी मिल जाएगी."

ऑसमंड स्लेस्टिन मांडा
Osmond Cellestin Manda
ऑसमंड स्लेस्टिन मांडा

हर तरफ डर का आलम

28 साल की ऑसमंड स्लेस्टिन मांडा, तंज़ानिया के सबसे बड़े शहर दार-अस्सलाम के अस्पताल में नर्स हैं.

वो कहते हैं, "लोग हमारे पास आने से डर रहे हैं. लेकिन यह ठीक ही है. आज के दौर में हर कोई जोखिम में है."

जिस अस्पताल में ऑसमंड काम करते हैं वहां कोरोना के संदिग्ध मरीज़ों की स्कैनिंग की जाती है और उन्हें क्वारंटीन में रखा जाता है.

वो बताते हैं कि अस्पतालों में एहतियात बरतने के बावजूद चारों तरफ डर का आलम है.

वो कहते हैं, "कुछ दिनों पहले यहां एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया था. नवजात शिशु को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी और उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया था. उसके पिता कोरोना संक्रमण की डर की वजह से अपने बीवी और बच्चे को देखने अस्पताल नहीं आए. तब अस्पताल की नर्सों ने उस महिला को दिलासा दिया."

ऑसमंड स्लेस्टिन मांडा
Osmond Cellestin Manda
ऑसमंड स्लेस्टिन मांडा

हरसंभव कोशिश

आधिकारिक आकड़ों के अनुसार तंज़ानिया में कोरोना से अब तक क़रीब 20 मौतें हुई हैं.

लेकिन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में इस पर शंका जाहिर की जा रही है.

ऑसमंड कहते हैं कि हर कोई अपनी तरफ से कोरोना वायरस से बचने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहा है.

वो कहते हैं, "हमारे साथ काम करने वाले कुछ लोगों ने अपने परिवार के लोगों को गांव भेज दिया है."

ऑसमंड अभी अपने भाई के परिवार के साथ रह रहे हैं लेकिन वो अपने रहने की नई जगह खोज रहे हैं ताकि वो अपने परिवार के लोगों को कोरोना के ख़तरे से बचा सकें.

BBC Hindi
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English summary
International Nurses Day: Coronavirus Warriors who risk their lives and perform their duties
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