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उपग्रह करेंगे हैजा फैलने की भविष्यवाणी

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हैजे की महामारी समुद्र के तापमान में वृद्धि के बाद फैलती है.
अब उपग्रह के माध्यम से यह पता लगाया जा सकेगा कि हैजे की महामारी कब फैलेगी ताकि महामारी फैलने से पहले ही नियंत्रण के उपाय किए जा सकें.

उन्होंने बताया कि हैजा की महामारी समुद्र के तापमान में वृद्धि के बाद फैलती है. इससे भारत और बांग्लादेश को पहले से ही इस ख़तरे से आगाह करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है जहाँ समय-समय पर यह महामारी फैल जाती है.

समुद्र के तापमान के साथ बढ़ने वाले सूक्ष्म प्राणी ही पेयजल आपूर्ति में हैजे के रोगाणु पहुँचाते हैं.

समुद्री पौधा

यह उपग्रह बंगाल की खाड़ी में समुद्र के तापमान में हो रहे बदलावों पर नज़र रखता है और फ़ाइटोप्लेंक्टॉन की मात्रा मापता है. फ़ाइटोप्लेंक्टॉन एक छोटा सा पौधा होता है जो समुद्र के वातावरण में ही पलता है.

शोधार्थियों ने पाया कि समुद्र के तापमान में होने वाली वृद्धि के साथ भारत के कोलकाता और बांग्लादेश के मतलेब में सबसे पहले हैजे की महामारी फैली जिससे फ़ाइटोप्लेंक्टॉन की मात्रा में भी वृद्धि हुई.

समुद्र का स्तर बढ़ता है तो रोगाणु निचले इलाकों की पेयजल आपूर्ति में पहुँच जाते हैं. युनीवर्सिटी ऑफ़ मैरीलैंड के इंस्टीट्यूट ऑफ़ एडवांस्ड कंप्यूटर स्टडीज़ की प्रोफ़ेसर रीता कोलवैल पिछले 30 सालों से हैजे की महामारी पर अध्ययन कर रही हैं.

वे कहती हैं कि उपग्रह मॉनिटरिंग ही हैजे की महामारी से बचाव का एकमात्र उपाय है.

पेयजल आपूर्ति

उन्होंने कहा, "हम उपग्रह से उपलब्ध डाटा को यह पता करने के लिए प्रयोग कर सकते हैं कि हैजे की महामारी कब फैल सकती है. इससे स्वास्थ्य अधिकारियों को पता लगेगा कि कब उन्हें पेयजल इत्यादि के प्रति लोगों को आगाह करना है और हैजे से बचाव के लिए संसाधन जुटाने हैं."

हैजे के रोगाणु प्राकृतिक रूप से उन समुद्री प्राणियों की आंत में रहते हैं जिन्हें कोपपोड कहते हैं और जो फ़ाइटोप्लेंक्टॉन पर पलते हैं. जब समुद्र का स्तर बढ़ता है तो कोपपोड को भारत और बांग्लादेश के निचले इलाकों के पेयजल की आपूर्ति में जाने का रास्ता मिल जाता है.

प्रोफ़ेसर कोलवैल कहती हैं कि कोपपोड से बचने के लिए पानी को साधारण कपड़े से छानना ही काफ़ी है और इससे आश्चर्यजनक रूप से हैजे से बचा जा सकता है. उन्होंने कहा, "हमने पाया कि हम सिर्फ़ प्लेंक्टॉन को छानकर ही हैजे को 40 से 50 फ़ीसदी घटा सकते हैं."

शोधार्थियों को उम्मीद है कि वे उपग्रह मॉनिटरिंग के माध्यम से जल्द ही हैजे की महामारी फैलने से सप्ताहों या महीनों पहले ही हैजे की भविष्यवाणी करने में सफल होंगे.

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