• search
For Quick Alerts
ALLOW NOTIFICATIONS  
For Daily Alerts

    द्विकोण आसन और एक पद प्रणामासन

    By सिद्धार्थ प्रसाद
    |
    द्विकोण आसन के अभ्यास से हमारे कंधे और रीढ़ के बीच की मांसपोशियाँ मज़बूत होती हैं
    द्विकोण आसन और एक पद प्रणामासन से शरीर के सभी अंगों में खिंचाव आता है. इन आसनों से शरीर में स्फूर्ति आती है और मस्तिष्क परिपक्व होता है.

    द्विकोण आसन और प्रणामासन से शरीर में स्फूर्ति आती है और मस्तिष्क परिपक्व होता है. इस तरह योगासन के अभ्यास से हम शरीर, मन और मस्तिष्क में संतुलन बढ़ा सकते हैं.

    द्विकोण आसन

    सामान्य स्थिति में खड़े रहें और दोनों पैरों के बीच डेढ़ फुट का अंतर रखें. दोनों हाथों को कमर के पीछे ले जाएँ और अंगुलियों को आपस में मिला लें.

    इस दौरान हाथ को सीधा रखें. पहले सांस भरें और फिर सांस छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें. हाथों को 90 अंश के कोण तक ऊपर की ओर लेकर आएँ.

    इस स्थिति में सांस बाहर रोककर रखें और सामने की ओर देखने का प्रयास करें. जिससे आपका चेहरा ज़मीन के समानांतर हो जाए.

    इस अवस्था में कुछ देर रुकने के बाद सांस भरते हुए वापस आ जाएँ और हाथों को नीचे कर ढीला छोड़ दें. इस तरह इस आसन को पाँच बार दोहराएँ.

    सावधानी

    जिन्हें कंधों में दर्द की शिकायत हो ऐसे लोग इस आसन का अभ्यास न करें. कमर दर्द वाले लोग भी इस आसन का अभ्यास करने से बचें, क्योंकि कमर दर्द में आगे की तरफ झुकने से बचना चाहिए.

    द्विकोण आसन के अभ्यास से हमारे कंधे और रीढ़ के बीच की मांसपोशियाँ मज़बूत होती हैं और इनका तनाव दूर होता है.

    फेफड़ों में खिंचाव आता है और छाती का विकास और विस्तार ठीक ढंग से होता है.

    इसके अभ्यास से गले का आकार भी सही होता है यानी गले और कंधे के बीच की चर्बी घटती है.

    एक पद प्रणामासन

    एक पद प्रणामासन से तनाव संबंधी समस्या से काफ़ी हद तक छुटकारा मिलता है

    सीधे खड़े हो जाएँ. दाएँ पैर को घुटने से मोड़ें और टखने को दाएँ हाथ से पकड़ें. दाएँ पैर के तलवे को बाएँ पैर की जाँघ के साथ मिलाकर ऊपर की ओर रखें. इस दौरान कोशिश करें कि आपका बाँया पैर सीधा रहे.

    अपना ध्यान सामने की ओर किसी बिंदु पर केंद्रित करने का प्रयास करें. इस स्थिति में दोनों हाथों को नमस्कार की मुद्रा में ले आएँ. कोहनियों को शरीर के साथ लगाकर रखें.

    दूसरी स्थिति में सांस भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर की ओर खींचें. हथेलियों को नमस्कार की मुद्रा में ही रखें.

    हाथ और कंधों में खिंचाव महसूस करें. इसके बाद सांस छोड़ते हुए हाथों को नमस्कार की मुद्रा में ही नीचे की ओर ले आएँ.

    इस तरह एक पद प्रमाणासन का एक क्रम पूरा होता है. हाथों को नीचे कर लें और दाएँ पैर को भी नीचे कर लें. दूसरे पैर से भी एक पद प्रणामासन का अभ्यास करें.

    प्रणामासन के लाभ

    एक पद प्रणामासन के अभ्यास से तंत्रिका तंत्र में संतुलन आता है और कई तरह के तनाव दूर हो जाते हैं. मस्तिष्क का संतुलित विकास होता है और व्यक्तित्व में परिपक्वता आती है.

    एक पद प्रणामासन के अभ्यास से शरीर और मन में संतुलन बनता है. जैसे-जैसे एकाग्रता बढ़ती जाएगी हम भावनात्मक और मानसिक स्तर पर परिपक्व होते चले जाएँगे.

    (योग प्रशिक्षक सिद्धार्थ प्रसाद का विशेष कार्यक्रम आप हर शनिवार और रविवार को सुबह साढ़े छह बजे बीबीसी हिंदी सेवा के 'आज के दिन' कार्यक्रम में सुन सकते हैं. यह कार्यक्रम और यह लेख आपको कैसा लगा. आप अपनी राय हमें hindi.letters@bbc.co.uk पर भेज सकते हैं)

    जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

    देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
    For Daily Alerts

    Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
    पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

    Notification Settings X
    Time Settings
    Done
    Clear Notification X
    Do you want to clear all the notifications from your inbox?
    Settings X
    X
    We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more