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'वित्तीय संकट से ज़्यादा जंगल कटने से नुकसान'

By Staff
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    दुनियाभर में बड़े पैमाने पर जंगल काटे जा रहे हैं
    यूरोपीय यूनियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक विश्व अर्थव्यवस्था को मौजूदा बैंकिंग संकट की जगह लुप्त होते जंगलों से कहीं ज़्यादा आर्थिक नुकसान हो रहा है.

    रिपोर्ट में लुप्त होते जंगलों के कारण सालाना दो ख़रब डॉलर से पाँच ख़रब डॉलर के बीच नुकसान का आँकलन किया गया है.

    इस नुकसान के आँकलन में जंगलों से मिलने वाले लाभ - स्वच्छ हवा, पानी और कार्बन डाय ऑक्साइड को जज़्ब करने जैसी सेवाओं की कीमत शामिल है.

    'बैंक संकट पीछे छूटा'

    इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले ड्येश बैंक के एक अर्थशास्त्री पवन सुखदेव ने ज़ोर देकर कहा कि धरती से गायब हो रहे जंगलों से जो नुकसान हो रहा है, उसके आगे वित्तीय बाज़ारों में हो रहा नुकसान कुछ भी नहीं है.

    अलग-अलग आकलन के अनुसार वॉल स्ट्रीट, वित्त जगत में हुए नुकसान को एक से डेढ ख़रब डॉलर बता है. लेकिन हकीक़त तो यह है कि आज जिस दर से हम प्राकृतिक संपदा को खो रहे हैं, वह हर साल कम से कम दो ख़रब डॉलर से पाँच ख़रब डॉलर के बीच है
    पवन सुखदेव कहते हैं, अलग-अलग आकलन के अनुसार वॉल स्ट्रीट, वित्त जगत में हुए नुकसान को एक से डेढ ख़रब डॉलर बता है. लेकिन हकीक़त तो यह है कि आज जिस दर से प्राकृतिक संपदा को खो रहे हैं, वह हर साल कम से कम दो ख़रब डॉलर से पाँच ख़रब डॉलर के बीच है.''

    बार्सिलोना में वर्ल्ड कंज़रवेशन कांग्रेस के कई सत्रों में इस संकट पर विचार विमर्श किया गया.

    कुछ संरक्षणवादी़ इस अध्ययन को नीति निर्माताओं को प्रकृति संरक्षण के बारे में जागरूक करने और उस ओर धन ख़र्च कराने के नए तरीक़े के रूप में देखते हैं. रिपोर्ट में इस बात पर भी ज़ोर दिया गया है कि विलुप्त होती प्रजातियों की सूची लंबी होती जा रही है.

    इस अध्ययन के लिए यूरोपीय यूनियन वित्तीय मदद मुहैया करा रहा है.

    अध्ययन का पहला चरण मई में समाप्त हुआ. तब अध्ययन दल इस नतीजे पर पहुंचा था कि जंगलों में आ रही कमी की वार्षिक कीमत कुल सकल घरेलू उत्पाद की सात फ़ीसदी तक हो सकती है.

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