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    दरअसल दोषी तो जीन है!

    By Staff
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    इस शोध से शीघ्रपतन की दवा बनाए जाने की संभावना बढ़ गई है
    एक शोध के बाद वैज्ञानिकों ने कहा है कि संभोग के दौरान शीघ्रपतन के पीछे कोई मनोवैज्ञानिक कारण नहीं होता बल्कि एक जीन दोषी होता है.

    हॉलैंड के कोई दो सौ ऐसे लोगों पर यह शोध किया गया जिनको शीघ्रपतन की शिकायत थी और वे दूसरों की तुलना में दो गुना जल्दी स्खलित हो जाते थे.

    डॉक्टरों का कहना है कि उन्होंने पाया कि इन पुरुषों में हार्मोन सोरोटोनिन को नियंत्रित करने वाला एक ख़ास तरह का जीन मौजूद था.

    जर्नल ऑफ़ सेक्सुअल मेडिसिन को शोधकर्ताओं ने बताया कि सोरोटोनिन का स्तर यह तय करता है कि कोई पुरुष कितनी देर में स्खलित होगा.

    प्रयोग

    स्ट्रैक्ट यूनिवर्सिटी के डॉ मार्केल वॉलडिंगर के इस प्रयोग में शामिल होने वाले कार्यकर्ताओं में 89 ऐसे लोग थे जिन्हें हमेशा से शीघ्रपतन की शिकायत थी. यानी इन लोगों को सहवास के पहले ही दिन से शीघ्रपतन हो रहा था.

    डॉक्टरों ने इन पुरुषों की पार्टनर को स्टॉप वॉच से यह परखने को कहा कि उनके साथी पुरुष कितनी देर में स्खलित होते हैं.

    फिर इस समय की 92 ऐसे पुरुषों के साथ तुलना की गई जिन्हें शीघ्रपतन की कोई शिकायत नहीं थी.

    इस प्रयोग के नतीजे इस धारणा के विपरीत हैं कि शीघ्रपतन एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है
    डॉक्टरों ने पाया की जिन पुरुषों को शीघ्रपतन की शिकायत थी उनकी तंत्रिका और स्खलन को नियंत्रित करने वाले मस्तिष्क के हिस्से में सोरोटोनिन की मात्रा कम सक्रिय था.

    डॉ वॉलडिंगर का कहना है कि हार्मोन के कम होने का मतलब है कि तंत्रिका ने समय से संदेशा नहीं पहुँचाया.

    उनका कहना है, "इस प्रयोग के नतीजे इस धारणा के विपरीत हैं कि शीघ्रपतन एक मनोवैज्ञानिक बीमारी है."

    डॉ मार्केल वॉलडिंगर का कहना है कि इसका मतलब यह भी है कि शीघ्रपतन का इलाज जीन थेरेपी से किया जा सकता है.

    तेज़ प्रतिक्रिया

    यौन मनोविज्ञान की चिकित्सक पॉउला हॉल का कहना है, "यक़ीनन शीघ्रपतन पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक कारणों से नहीं होता."

    उनका कहना है कि इसके पीछे कुछ मनोवैज्ञानिक कारण ज़रूर हैं.

    उनका कहना है कि जो लोग शीघ्रपतन का शिकार होते हैं वो आमतौर पर तेज़ी से प्रतिक्रिया करते हैं.

    वे कहती हैं, "उदाहरण के तौर पर वे टेनिस या कंप्यूटर गेम्स खेलने में तेज़ हो सकते हैं."

    डॉ हॉल का कहना है कि शीघ्रपतन से सोरोटोनिन को जोड़कर देखने के लिए अच्छे सबूत मौजूद हैं और अब शोधकर्ता ऐसी दवा बनाने में जुटे हैं जिससे कि इस हार्मोन का स्तर नियंत्रित किया जा सके.

    इस समय शीघ्रपतन के इलाज के लिए कोई दवा मौजूद नहीं है.

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