आखिर क्यों भाजपा से दूरी बना रहे हैं नीतीश कुमार, पिछले 10 दिन में 3 कार्यक्रमों से दूरी
पटना, 25 जुलाई। बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार एक के बाद एक भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। पिछले 10 दिनों में वह भाजपा के 3 अहम कार्यक्रमों से दूर रहे हैं, ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या नीतीश कुमार एक बार फिर से एनडीए से खुद को अलग करने जा रहे हैं। जिस तरह से वह भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं माना जा रहा है कि वह भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं। नीतीश कुमार को पिछले कुछ दिनों में भाजपा की ओर से कई कार्यक्रमों में शामिल होने का न्योता मिला, लेकिन वह इन कार्यक्रमों में शामिल नहीं हुए।

आज के कार्यक्रम में भी नहीं होंगे शामिल
आज देश की राष्ट्रपति के तौर पर द्रौपदी मुर्मू शपथ लेंगी। नीतीश कुमार की पार्टी के सूत्रों की मानें तो वह आज के कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लेंगे क्योंकि वह केंद्र सरकार की मनरेगा स्कीम से जुड़ी बैठक में हिस्सा लेंगे, लिहाजा व्यस्तता के चलते आज के कार्यक्रम में वह शामिल नहीं होंगे। इससे पहले 17 जुलाई को भी नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने नहीं गए। उन्होंने अपनी जगह दूसरे प्रतिनिधि को कार्यक्रम में भेजा था। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय ध्वज से संबंधित था, जिसमे भाजपा के तारकिशोर प्रसाद शामिल हुए थे।

राष्ट्रपति की विदाई कार्यक्रम से बनाई दूरी
इसके अलावा शुक्रवार को रामनाथ कोविंद की विदाई के लिए आयोजित कार्यक्रम में भी नीतीश कुमार ने हिस्सा नहीं लिया था। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हुआ था। नीतीश कुमार की ओर से इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने की वजह नवनिर्वाचित विधान परिषद के सदस्यों का शपथ ग्रहण बताया गया था। लेकिन गौर करने वाली बात है कि नवनिर्वाचित विधान परिषद के सदस्यों का शपथ ग्रहण शाम 4 बजे तक खत्म हो गया था, बावजूद इसके नीतीश कुमार राष्ट्रपति की विदाई के कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

तो इस वजह से नाराज हैं नीतीश
माना जा रहा है कि जिस तरह से बिहार विधानसभा के सौ वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संबोधन दिया था, लेकिन इस कार्यक्रम में नीतीश कुमार को न्योता नहीं दिया गया था, इसी के चलते नीतीश कुमार भाजपा के कार्यक्रमों से दूरी बना रहे हैं। रिपोर्ट की मानें तो विधानसभा स्पीकर विजय कुमार सिन्हा ने पीएम मोदी को इस समारोह में शामिल होने के लिए राजी किया था। विजय कुमार और नीतीश कुमार का कई मौकों पर आमना-सामना हो चुका है। बता दें कि ऐसा पहली बार है जब देश के प्रधानमंत्री ने बिहार विधानसभा को संबोधित किया था।

शताब्दी कार्यक्रम में नीतीश का जिक्र तक नहीं
नीतीश कुमार और विजय कुमार सिन्हा के बीच रिश्तों में खटास का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि विधानसभा के शताब्दी कार्यक्रम के संबोधन में विजय कुमार ने नीतीश कुमार का जिक्र तक नहीं किया था। इस मौके पर जो सोवीनियर प्रकाशित हुई थी उसमे से नीतीश कुमार की तस्वीर तक नहीं थी। सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार पहले से ही भाजपा से यह मांग करते आए हैं कि वह स्पीकर को पद से हटाएं और भाजपा नेताओं को सार्वजनिक तौर पर प्रदेश सरकार की आलोचना करने से रोके।

किस बात से अनबन की शुरुआत
दरअसल बिहार चुनाव में भाजपा ने जनता दल युनाइटेड से बेहतर प्रदर्शन किया था, बावजूद इसके अमित शाह ने नीतीश कुमार को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाए रखने का फैसला लिया, जिसके बाद से प्रदेश भाजपा नेताओं की नीतीश कुमार से तनातनी देखने को मिल रही है। लेकिन अब दोनों दलों के बीच यह तनातनी बढ़ती ही जा रही है और कई मौकों पर दोनों दल एक दूसरे के सामने आ चुके हैं। इससे पहले पिछले महीने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष संजय जयसवाल ने जदयू पर तीखा हमला बोला था जब जदयू ने अग्निपथ स्कीम को लेकर विपरीत राय दी थी।

अग्निपथ को लेकर आमने-सामने
भारतीय जनता पार्टी ने स्पष्ट तौर पर बिहार सरकार की आलोचना की थी। कहा गया था कि जिस तरह से अग्निपथ स्कीम का प्रदेश में विरोध हुआ उसे ठीक तरह से प्रदेश सरकार संभाल नहीं सकी। वहीं जदयू की ओर से कैबिनेट मंत्री विेंद्र यादव ने भी भाजपा पर पलटवार करते हुए कहा कि पहले किसी भी तरह का कोई नियंत्रण नहीं था, कोई सीमा नहीं थी। लेकिन अब दिक्कत है, यह अच्छी परंपरा नहीं है।












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