कौन बनेगा बिहार का नया विधानसभा अध्यक्ष? प्रेम कुमार या दामोदर रावत, किसका नाम सबसे आगे चल रहा है?
who will be Bihar Vidhan Sabha Speaker: बिहार में मंत्रियों के विभाग बंटवारे के बाद अब राजनीतिक हलचल विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर तेज हो गई है। एनडीए के भीतर यह पद किस सहयोगी दल के खाते में जाएगा, इसे लेकर जोरदार लॉबिंग शुरू हो चुकी है। 22 नवंबर को सामने आए सत्ता गठबंधन के सूत्रों के मुताबिक बीजेपी और जेडीयू, दोनों ही इस अहम पद को पाने की कोशिश में जुट गए हैं।
राज्य में नई सरकार बनने के बाद अगला बड़ा कदम विधानसभा अध्यक्ष का चुनाव है। सूत्र बताते हैं कि 243 नव-निर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने के लिए पहले 'प्रोटेम स्पीकर' की नियुक्ति होगी। उसके बाद अध्यक्ष का चुनाव कराया जाएगा।

25 नवंबर को होने वाली कैबिनेट बैठक में विशेष सत्र की तारीख तय की जाएगी। इसी दौरान विधानसभा अध्यक्ष का भविष्य भी लगभग साफ हो जाएगा। बीजेपी और जेडीयू दोनों ही चाहते हैं कि यह संवैधानिक पद उनके हिस्से आए।
बीजेपी से प्रेम कुमार सबसे बड़े दावेदार, कौन हैं ये?
बीजेपी में इस पद के लिए सबसे मजबूत दावेदार गया टाउन के विधायक प्रेम कुमार माने जा रहे हैं। वे लगातार नौवीं बार चुनाव जीतकर सदन पहुंचे हैं और राज्य के सबसे अनुभवी विधायकों में गिने जाते हैं। प्रेम कुमार पहले भी नीतीश कैबिनेट में मंत्री रह चुके हैं तथा 2015-17 के बीच वे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भी रहे।
हालिया चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार अखौरी ओंकार नाथ को 26,423 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। 70 वर्षीय प्रेम कुमार पीएचडी डिग्रीधारी हैं, उनके खिलाफ 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और कुल संपत्ति 13.7 करोड़ रुपये है। उनकी छवि अपने क्षेत्र में मजबूत और जमीनी नेता की रही है। बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक प्रेम कुमार की वरिष्ठता और अनुभव को देखते हुए वही अध्यक्ष पद की दौड़ में सबसे आगे हैं।
जेडीयू से दामोदर रावत का नाम चर्चा में
जेडीयू भी इस पद को अपने पास रखने की कोशिश कर रहा है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि झाझा के विधायक दामोदर रावत अध्यक्ष पद के लिए पार्टी की पहली पसंद हैं। जेडीयू के नेताओं का तर्क है कि चूंकि विधान परिषद में बीजेपी के अवधेश नारायण सिंह सभापति हैं, इसलिए विधानसभा अध्यक्ष का पद जेडीयू को मिलना चाहिए। पार्टी के एक नेता ने कहा कि गठबंधन के भीतर इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है, लेकिन जेडीयू अब खुलकर अपनी दावेदारी पेश कर रहा है।
पिछली विधानसभा में कैसे था समीकरण?
पिछली एनडीए सरकार में विधानसभा अध्यक्ष बीजेपी के नंद किशोर यादव और उपाध्यक्ष जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव थे। इस बार समीकरण थोड़े अलग हैं और दोनों बड़े दल बराबर के दावेदार बनकर सामने आए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अध्यक्ष का पद सदन की कार्यवाही के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है, इसलिए कोई भी दल इसे आसानी से हाथ से जाने नहीं देना चाहता।
नीतीश सरकार में 26 मंत्रियों ने ली शपथ
20 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार बिहार के सीएम के रूप में शपथ ली। उनके साथ 26 मंत्रियों ने पदभार संभाला, जिनमें बीजेपी के 14, जेडीयू के 8, लोजपा (रामविलास) के 2 और हम तथा आरएलएम के एक-एक मंत्री शामिल हैं।
सरकार गठन के तुरंत बाद ही अध्यक्ष पद को लेकर नई सियासी बिसात बिछ गई है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एनडीए में किसका पलड़ा भारी पड़ता है - प्रेम कुमार या दामोदर रावत। आने वाला विशेष सत्र ही तय करेगा कि बिहार विधानसभा की गवेल किसके हाथ में जाएगी।












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