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बिहार में जदयू और भाजपा की राहें हो सकती हैं अलग, जानिए क्यों तेज़ हुई चर्चा ?

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पटना, 30 मार्च 2022। सियासी घमासान के बाद बिहार के सियासी समीकरण बदलते हुए नज़र आ रहे हैं। इसी कड़ी में बिहार के सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज़ हो गई है कि जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी की राहें अलग हो सकती है। हाल ही में हुए सहनी और भाजपा विवाद के बाद एनडीए में फूंट पड़ने के आसार नज़र आ रहे हैं। इसके साथ ही नीतीश कुमार के रिश्ते भी भाजपा के साथ बिगड़ते जा रहे हैं। लखीसराय मामले के बाद बेगूसराय में असमाजित तत्वों द्वारा हिंसा फैलाने के मामले में भाजपा नेताओं ने नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा थै। इन सब विवादों के बाद से ही नीतीश कुमार की भाजपा से दूरियां बढ़ने लगी हैं।

भाजपा-जदयू में भी टूट देखने को मिलेगा- चिराग

भाजपा-जदयू में भी टूट देखने को मिलेगा- चिराग

लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान ने भी सहनी के समर्थन में बयान दिया और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के इशारे पर ही मुकेश सहनी के साथ धोखा हुआ है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह दिन दूर नहीं जब भाजपा और जदयू का रास्ता अलग हो जाएगा। नीतीश कुमार को यह बात बर्दाश्त नहीं हो रही है कि बिहार में उनकी पार्टी (जदयू) से बड़ी भारतीय जनता पार्टी हो गई है। लोकतंत्र में गठबंधन के घटक दलों को नीतीश कुमार आज तक वह सम्मान नहीं दिया जो उन्हें मिलना चाहिए। अभी मुकेश सहनी की वजह से एनडीए गठबंधन बिखरा है। बहुत जल्द भाजपा-जदयू में भी टूट देखने को मिलेगा। इसकी भूमिक तैयार की जा रही है क्योंकि नीतीश कुमार बिना सीएम की कुर्सी के नहीं रहते हैं। गठबंधन करने से पहले वह अपनी कुर्सी सुरक्षित कर लेते हैं उसके बाद ही समर्थन देते हैं।

क्या बदल जाएगी बिहार की सियासी फ़िज़ा ?

क्या बदल जाएगी बिहार की सियासी फ़िज़ा ?

भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए वीआईपी के विधायक राजू सिंह, स्वर्णा सिंह और मिश्री लाल यादव को पार्टी में शामिल करवा लिया है। अब एनडीए के पास 127 विधायकों का समर्थन है। बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं, इनमें 242 सीटों पर सदस्य हैं लेकिन एक सीट अभी खाली है। क्योंकि विकासशील इंसान पार्टी के एक विधायक मुसाफिर पासवान के निधन के बाद बोंचहा विधानसभा सीट खाली हो गई थी। अब इस सीट पर उपचुनाव होने वाले हैं। बिहार में सत्ता पर क़ाबिज़ होने के लिए 122 सीटों की ज़रूरत होती है, जिसमें एनडीए गठबंधन के पास 127 विधायकों का समर्थन है। विपक्ष के पास 115 विधायक हैं, सत्ता पाने के लिए सिर्फ़ 7 विधायकों का ही समर्थन चाहिए।

RJD तैयार कर रही राजनीतिक रणनीति

RJD तैयार कर रही राजनीतिक रणनीति

सूत्रों की मानें तो विपक्ष ओवौसी की पार्टी के पांच विधायक, हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा के एक विधायक (जीतनराम मांझी) और एक निर्दलीय विधायक से समर्थन देने के लिए लगातार संपर्क साध रहे हैं। इसके साथ ही सत्ता पक्ष के कुछ विधायकों से इस्तीफ़ा दिलावकर यह सदस्यता रद्द करवाकर अल्पमत में लाने की रणनीति तैयार करने में जुट गई है। बिहार में आंकड़ों की बाज़ी ज़रा सी भी पलटी तो सत्ता परिवर्तन हो सकता है। वीआईपी के तीनों विधायकों का विलय करवाने के बाद भी एनडीए की कुर्सी ख़तरे में नजर आ रही है। मुकेश सहनी भी अपने अपमान का बदला लेने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं कि बिहार में एनडीए सत्ता से बाहर हो जाए।

भंग हो सकती है बिहार विधानसभा

भंग हो सकती है बिहार विधानसभा

बिहार में बदले सियासी समीकरण को देखते हुए सियासी जानकारों का मान्ना है कि विधानसभा भंग हो सकती है। क्योंकि नीतीश कुमार पर जब भाजपा नेता लखीसराय और बेगूसराय वाले मामले पर हमलावर थे तो मुकेश सहनी उनके साथ क़दम से क़दम मिलाकर खड़े हुए थे। अब मौजूदा हालात में नीतीश कुमार भी भाजपा से नाराज़ चल रहे हैं। ऐसे में मुमकिन है कि नीतीश कुमार विपक्ष को बाहर से समर्थन दे दें। अगर ऐसा हुआ तो कुछ विधायक इस्तीफ़ा दें सकते हैं जिससे सत्ता पक्ष के अल्पमत में आते ही विधानसभा भंग हो जाएगी । इसके साथ ही अगर विपक्ष ने सात विधायकों का समर्थन हासिल कर लिया तो बिहार में महागठबंधन की सरकार बन जाएगी।

ये भी पढ़ें: बिहार: शहर की सड़कों की तरह अब चमकेंगी गांव की गलियां, जानिए नीतीश सरकार का प्लान

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English summary
The path of JDU and BJP may be different in Bihar, know why the discussion intensified?
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