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Temple Of Freedom Fighters: बिहार के इस ज़िले में है स्वतंत्रा सेनानियों का मंदिर, भगवान की तरह पूजते हैं लोग

Temple Of Freedom Fighters: देवी-देवताओं को समर्पित मंदिर के बारे में आप लोगों ने बहुत देखा और सुना होगा, लेकिन आज हम आपको बिहार के एक अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित है। देश के लिए अपनी ज़िंदगी कुर्बान करने वाले जवानों को समर्पित यह मंदिर बिहार के बेगूसराय ज़िले में है।

वीडियों में आप देख सकते हैं कि मंदिर परिसर के शुरू होते ही महात्मा गांधी, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और वीर कुंवर सिंह की मूर्तियां आपको दिखेंगी। गांधीजी को लाठी के साथ दिखाया गया है, जबकि लक्ष्मीबाई और कुंवर सिंह को तलवारें निकाले हुए घोड़ों पर सवार दिखाया गया है।

Temple of freedom fighters in parna village begusarai district of Bihar people worship it like God

मंदिर परिसरा में अंदर की तरफ़ खुदीराम बोस, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, सरदार वल्लभभाई पटेल, बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर, लाल बहादुर शास्त्री, रामधारी सिंह दिनकर और स्वतंत्रता आंदोलन के स्थानीय शहीद रामचन्द्र सिंह की प्रतिमाएं भी हैं।

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    बिहार के इस ज़िले में है स्वतंत्रा सेनानियों का मंदिर,भगवान की तरह पूजते हैं लोग

    स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित मंदिर परिसर का रंग भी तिरंगे जैसा ही है, केसरिया, सफेद और हरा जो हमारे राष्ट्रीय ध्वज का भी रंग है। वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए राष्ट्रकवि दिनकर सेवा दल के सदस्य सोनू मौर्य ने बताया कि हर रविवार को वह लोग अपनी टीम के साथ अहले सुबह आते हैं।

    हम लोगों को चाहिए कि जिन जगहों पर शहीदों की प्रतिमा लगी है, वहा निरंतर साफ़-सफ़ाई करें और अपने युवा पीढियों को शहीदों की वीरता की कहानी सुनाएं, ताकि आने वाली पीढी देश के इतिहास और जवानों की कुर्बानी को याद रखे। इसलिए हम लोग हर रविवार को मंदिर परिसर की साफ़ साफ़ाई करते हैं।

    1940 के दशक परना गांव में भगवान शिव का एक मंदिर था, 1987 में देवी दुर्गा को समर्पित एक मंदिर बनाया गया था। गांव के लोगों ने देखा कि युवा पीढ़ी स्वतंत्रता सेनानियों बलिदानों को भूल रही है। इसलिए स्वतंत्रता सेनानियों की समर्पित मूर्तियां भी होनी चाहिए।

    शिवराम महतो ग्राम प्रधान थे और उन्होंने कोशिश की और लोगों का कारवां उनके साथ जुड़ता गया। 1991 में महात्मा गांधी की मूर्ति से इसकी शुरुआत हुई और बाद में बाकी स्वतंत्रता सेनानियों की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई। सभी लोगों की कामयाब कोशिशों के बाद इस मंदिर का निर्माण हुआ।

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