Bihar Politics: जाति, धर्म और अपमान पर घिरा NDA!, इटावा कांड से गरमाई बिहार की सियासत, विपक्ष ने सरकार को घेरा
Bihar Politics: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर प्रदेश में सियासी पारा चढ़ चुका है। आरोप प्रत्यारोप के बीच उत्तर प्रदेश के इटावा में यादव जाति के कथावाचकों के साथ मारपीट और जबरन सिर मुंडवाने की घटना बिहार की सियासत का हिस्सा बन चुकी है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने इसे "धर्म के नाम पर जातीय अपमान" करार देते हुए भाजपा और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने पूछा कि "क्या पिछड़ा या दलित कथावाचक नहीं बन सकता? क्या हिन्दू धर्म पर बात करना सिर्फ कुछ जातियों का अधिकार है?"

राजद नेता अब्दुल जब्बार ने कहा कि NDA में सिर्फ धर्म और जात की सियासत होती है। इटावा कांड से यही लगता है कि भाजपा और RSS वाले ने जानबूझकर ये गंदी हरकत की है, ताकि जात के नाम पर ऊल जुलूल बयानबाज़ी हो और जनता को भ्रमित करने का मौका मिल जाए।
राजद नेताओं का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की आहट में हर राजनीतिक दल धर्म, जाति और सामाजिक न्याय के मुद्दों को हथियार बना रहा है। इटावा की घटना ने एक बार फिर भाजपा की कथित 'सांस्कृतिक राजनीति' को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहा कथित तौर पर धर्म की ठेकेदारी सिर्फ सवर्णों के लिए आरक्षित समझी जाती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला BJP के उस दोहरे चरित्र को उजागर करता है, जिसमें मंच पर दलितों की बात होती है, लेकिन मैदान में वही दलितों को मंदिरों और धार्मिक भूमिकाओं से बाहर रखा जाता है। तेजस्वी यादव ने कहा, "गांधी को मारने वाले की पूजा करने वाली भाजपा जब दलित कथा कहे, तो उसे बर्दाश्त नहीं कर पाती।
यही है इनका असली हिन्दुत्व, जो वर्ण व्यवस्था के दलदल से बाहर नहीं निकल सका।" इस प्रकरण ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार में भी "धार्मिक लोकतंत्र बनाम जातीय वर्चस्व" की बहस को हवा दे दी है। और अब यह साफ होता जा रहा है कि 2025 का चुनाव सिर्फ बेरोजगारी और विकास पर नहीं, बल्कि "कौन कितने दिन पूजा कर सकता है"। इस सवाल पर भी लड़ा जाएगा।












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