तेजप्रताप बोले मुझे सुविधाएं मुहैया ना कराने के लिए झारखंड सरकार पर दर्ज हो FIR

तेजप्रताप यादव बोले झारखंड सरकार पर दर्ज हो FIR

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    तेजप्रताप बोले मुझे सुविधाएं मुहैया ना कराने के लिए झारखंड सरकार पर दर्ज हो FIR

    तेजप्रताप यादव रांची से पटना लौटने के बाद अचानक राजनीतिक रूप से एक्टिव हो गये हैं। लालू यादव ने उन्हें समझाने के लिए रांची बुलाया था। लेकिन क्या वे समझे ? रविवार को तेजप्रताप एकबएक राजद कार्यालय पहुंच गये। विधानसभा लड़ने के इच्छुक उम्मीदवारों का बायोडाटा भी लिया। उन्होंने यह भी बताया कि 2020 में किसे टिकट मिलेगा और किसे नहीं। उन्होंने रांची की घटना पर बेबाक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यहां तक कह दिया कि इस मामले में तो FIR झारखंड सरकार पर होना चाहिए था। झारखंड सरकार में राजद शामिल है और उसके विधायक मंत्री भी हैं। इस तरह तेजप्रताप ने अपनी ही सरकार की फजीहत कर दी। क्या तेजप्रताप 2020 के विधानसभा चुनाव को लेकर तेवर में हैं? उनके आक्रामक बयानों और अचानक सक्रिय होने से ऐसी ही अटकलें लगायी जा रही हैं।

    क्या तेज प्रताप 2020 में भी देंगे अपने कैंडिडेट?

    क्या तेज प्रताप 2020 में भी देंगे अपने कैंडिडेट?

    वैसे रविवार को राजद कार्यालय में राजनीतिक गतिविधियां सामन्यतया नहीं होती हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने राजद कार्यालय में नयी कार्यशैली विकसित की है। वे और अनके सहयोगी नियम से दफ्तर में बैठते हैं और संगठन के जरूरी काम निबटाते हैं। चूंकि अभी राजद कार्यालय में निर्माण कार्य चल रहा है इसलिए रविवार को वहां मजदूर काम कर रहे थे। दफ्तर खुला था। तेजप्रताप बहुत कम ही पार्टी दफ्तर आते हैं लेकिन रविवार को वे एकाएक पहुंच गये। पत्रकारों का भी वहां जुटान हुआ। चुनाव लड़ने के इच्छुक उम्मीदवार भी आये। उन्होंने टिकट के दावेदारों से बायोडाटा भी लिया। तेजप्रताप पहली बार भावी उम्मीदवारों का बाय़ोडाटा ले रहे थे। इसके पहले प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह या नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव बायोडाटा लेते थे। संवाददाताओं ने तेजप्रताप से पूछा, क्या लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी वे अपने कैंडिडेट देंगे ? इस पर तेजप्रताप ने सधे हुए अंदाज में जवाब दिया, ये अपना कैंडिडेट क्या होता है? जो संगठन में काम करता है उसके लिए टिकट का डिमांड किया जाता है। इसमें कौन बड़ी बात है। सब लोग पार्टी में अपनी राय रखते हैं। मैं भी अपनी राय रखता हूं। टिकट देने के लिए पहले हम सर्वे कराएंगे। मालूम करेंगे कि टिकट दावा करने वाले लोगों ने अपने क्षेत्र में कितने काम किये हैं। इसके आकलन के बाद ही किसी को टिकट देने के बारे में विचार किया जाएगा।

    झारखंड सरकार पर होना चाहिए FIR -तेजप्रताप

    झारखंड सरकार पर होना चाहिए FIR -तेजप्रताप

    रांची की घटना के सवाल पर तेजप्रताप ने कहा, मैंने रांची जाने से पहले ही झारखंड सरकार से गेस्ट हाउस देने की मांग की थी। लेकिन सरकार ने नहीं दिया। फिर मैंने मुख्य सचिव से झारखंड आने का लेटर मांगा था लेकिन सरकार ने मुझे नहीं प्रोवाइड कराया। अब मैं सड़क के किनारे तो सो नहीं सकता था, कोई आशियान चाहिए था। FIR तो झारखंड सरकार पर होना चाहिए। मुझे वहां की सरकार जरूरी चीजें प्रोवाइड करा देती तो ऐसा नहीं होता। यानी तेज प्रताप ने घटना के लिए झारखंड सरकार को ही जिम्मेदार ठहरा दिया। उन्होंने कहा कि मेरे साथ सिर्फ चार गाड़ियां ही गयीं थी, पीछे से और लोग आ गये तो मैं क्या कर सकता हूं। तेज प्रताप की यह सफाई क्या झारखंड सरकार के गले उतरेगी ? राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि तेजप्रताप पार्टी में दबाव बनाने के लिए ये तेवर दिखा रहे हैं। वे ये संदेश देने चाहते हैं कि इसबार (2020) फ्रंटफुट पर बैटिंग करेंगे। चर्चा है कि वे अपने लिए महुआ की बजाय कोई अन्य मजबूत सीट तलाश रहे हैं जहां से उनकी जीत सुनिश्चित हो सके। पार्टी में उनके हितों की अनदेखी न हो, इसलिए उन्होंने आक्रामक रूख अख्तियार कर लिया है।

    फिर खेलेंगे पुराना कार्ड ?

    फिर खेलेंगे पुराना कार्ड ?

    तेज प्रताप ने संकेत दे दिया कि 2020 के विधानसभा चुनाव में वे अपने तरीके से सक्रिय रहने वाले हैं। उन्होंने रविवार को राजद विद्यार्थी प्रकोष्ठ के नेताओं के साथ प्रदेश कार्यालय में बैठक की। इस बैठक में राजद की छात्र इकाई के करीब एक सौ विद्यार्थी शामिल हुए। छात्र प्रकोष्ठ की एक बड़ी बैठक बुलवाने पर सहमति बनी। 2019 के लोकसभा चुनाव के समय तेजप्रताप ने पार्टी की छात्र इकाई के जरिये ही अपना दबाव बनाया था। वे पिछले कुछ समय से राजद की छात्र इकाई का नेतृत्व कर रहे हैं। 2019 में जब उनके कुछ करीबी लोगों को टिकट नहीं मिला तो वे नाराज हो गये थे। उन्होंने प्रदेश कार्यालय में एक प्रेस कांफ्रेंस तक बुला ली थी। माना जा रहा था कि तेज इसके जरिये कोई बड़ा धमाका करने वाले हैं। प्रेस कांफ्रेस से ठीक पहले उन्होंने छात्र राजद के संरक्षक पद से इस्तीफा दे दिया और अपने ट्वीट में लिखा था- नादान वो लोग हैं जो मुझे नादान समझते है। कौन कितने पानी में है, सबकी खबर है मुझे। इसके बाद राजद में भूचाल आ गया था। लेकिन लालू यादव और राबड़ी देवी की दखल के बाद तेजप्रताप ने आखिरी क्षणों में ये प्रेस कांफ्रेंस रद्द कर दी थी। 2020 में भी तेज राजद की छात्र इकाई के जरिये ही सक्रिय हुए है। उन्होंने छात्र प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों को चुनाव की तैयारियों में जुट जाने के लिए कहा है। क्य़ा वे फिर पुराना कार्ड खेलेंगे?

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