SIR Update News: फाइनल लिस्ट में कौन शामिल, कौन बाहर? मंगलवार को होगा बड़ा खुलासा, सीईसी ज्ञानेश करेंगे VC
SIR Update , Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि लोकतंत्र की असली नब्ज़ को टटोलने का अवसर है। मंगलवार को जिले के सभी विधानसभा क्षेत्रों की नई मतदाता सूची जारी की जा रही है।
दावा-आपत्ति के बाद तैयार इस सूची से 26,256 फर्जी या दोहरी प्रविष्टियां हटाई गईं, यह संख्या बताती है कि वर्षों से वोटर लिस्ट में कितनी खामियां जड़ें जमाए बैठी थीं। मृतक, स्थायी रूप से बाहर जा चुके नागरिक और दोहरे नाम हटाकर निर्वाचन आयोग ने जिस पारदर्शिता का संकेत दिया है, वह स्वागत योग्य है।

सकारात्मक पहलू यह भी है कि बड़ी संख्या में युवाओं और महिलाओं को पहली बार मतदाता बनने का मौका मिला है। 18 वर्ष की आयु पार कर चुके नए मतदाताओं का जुड़ना चुनावी समीकरणों में नई ऊर्जा और अनिश्चितता दोनों लाएगा। यही वह वर्ग है जो मुद्दों पर वोट करता है और परंपरागत जातीय-सामाजिक समीकरणों को चुनौती दे सकता है।
विशेष सघन पुनरीक्षण की पूरी प्रक्रिया में बूथ स्तर अधिकारी (बीएलओ) ने घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन किया और दस्तावेज़ जुटाए। यह मेहनत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची ही चुनाव की नींव है-अगर आधार ही खोखला हो तो चुनाव निष्पक्ष कैसे होगा? दशहरा के अवसर पर पूजा पंडालों में चलने वाला मतदाता जागरूकता अभियान भी सराहनीय है। लोकतंत्र तभी मज़बूत होगा जब उत्सव के बीच भी नागरिक अपने मताधिकार को लेकर सजग रहें।
अब निगाहें भारत निर्वाचन आयोग की बैठकों पर हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार राज्य सरकार के शीर्ष अधिकारियों, मुख्य सचिव, डीजीपी, सीपीएफ और सभी जिलाधिकारियों से सीधे संवाद करेंगे। राजनीतिक दलों से लेकर केंद्रीय एजेंसियों तक, हर स्तर पर समीक्षा बैठकें यह स्पष्ट संदेश देती हैं कि आयोग इस बार किसी भी तरह की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेगा।
फिर भी सवाल बने रहते हैं कि क्या मतदाता सूची से वास्तविक पात्र नागरिकों का नाम अनजाने में तो नहीं काटा गया? क्या डिजिटल और भौतिक दोनों स्तर पर सत्यापन की व्यवस्था इतनी मज़बूत है कि कोई पात्र मतदाता वंचित न रह जाए? आयोग को पारदर्शिता बनाए रखते हुए इन शंकाओं का समाधान करना होगा।
बिहार का मतदाता हमेशा से देश की राजनीति का संकेतक रहा है। नई सूची के साथ अब यह और भी ज़रूरी है कि हर योग्य नागरिक 2025 के चुनाव में मतदान करे। लोकतंत्र की मजबूती सिर्फ आयोग की सख्ती से नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से तय होगी। बिहार के लिए यह सिर्फ चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि जनसरोकार का उत्सव है-जहां हर नाम, हर वोट और हर आवाज़ मायने रखती है।












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