'दलित महिला हूं, इसलिए टारगेट कर रहे', शांभवी चौधरी ने टिकट खरीदने के आरोपों पर प्रशांत किशोर को दिया जवाब
Shambhavi Choudhary On Prashant Kishor: लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) की सांसद शंभवी चौधरी ने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि "एक दलित महिला को निशाना बनाना सामंती सोच को दिखाता है।"
प्रशांत किशोर ने हाल ही में आरोप लगाया था किशांभवी चौधरी के पिता और बिहार सरकार में मंत्री आशोक चौधरी ने उनकी बेटी को समस्तीपुर लोकसभा सीट का टिकट दिलाने के लिए एलजेपी (रामविलास) को पैसे दिए थे। पीके का आरोप है कि शांभवी चौधरी के पिता ने टिकट खरीदा है। इस आरोप को लेकर आशोक चौधरी ने प्रशांत किशोर पर मानहानि का मुकदमा भी दर्ज करवाया है।

शंभवी चौधरी ने इंटरव्यू में क्या कहा?
शंभवी चौधरी ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा,
"मैं नहीं मानती कि प्रशांत किशोर उस समय के लायक हैं जो मैं उन्हें दूं...लेकिन हां, ये एक निजी हमला था। मैं एक राजनीतिक परिवार से आती हूं, मैं तीसरी पीढ़ी की नेता हूं। राजनीति वैचारिक लड़ाई होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत।"
शंभवी ने पूछा, "क्या वो मुझे इसलिए टारगेट कर रहे हैं क्योंकि मैं एक दलित हूं? क्योंकि मैं एक महिला हूं? या क्योंकि उन्हें लगता है कि मैं आसान निशाना हूं?"
उन्होंने आगे कहा कि अगर प्रशांत किशोर को एलजेपी (रामविलास) पर सवाल उठाने थे, तो पार्टी में और भी सांसद हैं, फिर केवल उन्हें ही क्यों निशाना बनाया गया? उन्होंने कहा, "यह हमला सिर्फ मेरे ऊपर इसलिए किया गया क्योंकि एक दलित महिला आगे बढ़ रही है - ये सामंती सोच की निशानी है।"
शांभवी चौधरी देश के सबसे युवा सांसदों में से एक हैं!
25 वर्षीय शंभवी चौधरी ने 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सन्नी हजारी को 1,87,251 वोटों से हराकर इतिहास रचा। वह देश की सबसे युवा सांसदों में एक हैं। उनके दादा महावीर चौधरी ने चार विधानसभा सीटों का प्रतिनिधित्व किया था और कांग्रेस सरकार में मंत्री भी रहे थे। वहीं पिता आशोक चौधरी, जो पहले कांग्रेस में थे, अब जेडीयू में शामिल होकर नीतीश सरकार में मंत्री हैं।
बिहार चुनाव की तैयारी और राजनीतिक माहौल
बिहार में इस साल अक्टूबर-नवंबर में विधानसभा चुनाव संभावित हैं। एनडीए एक बार फिर सत्ता बनाए रखने की कोशिश में है, जबकि INDIA गठबंधन (आरजेडी + कांग्रेस) सरकार बनाने की दिशा में रणनीति बना रहा है। वहीं प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी भी पूरी ताकत से मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है।
यह विवाद आने वाले बिहार चुनाव से पहले सियासी तापमान को और बढ़ा सकता है, खासकर जब दलित और महिला सशक्तिकरण की राजनीति अहम मुद्दा बनती जा रही है।












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