कौन हैं BJP नेता संजय जायसवाल? किस जाति से रखते हैं ताल्लुक? प्रशांत किशोर ने लगाया 'पेट्रोल चोरी' का आरोप
Bihar Eelection 2025 (Sanjay Jaiswal): बिहार की सियासत एक बार फिर गर्म है और इस बार चर्चा के केंद्र में हैं भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल। वजह है जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर (PK), जिन्होंने मंच से सीधे आरोप लगाया कि जायसवाल "पेट्रोल चोरी" में शामिल रहे हैं। यह बयान इतना तीखा था कि देखते ही देखते यह मुद्दा पूरे बिहार में बहस का विषय बन गया। अब सवाल सिर्फ आरोप-सफाई का नहीं है, बल्कि यह भी कि आखिर डॉ. संजय जायसवाल कौन हैं, उनकी राजनीतिक जड़ें कहां तक फैली हैं और वे किस जाति से आते हैं?
भारत की राजनीति में जाति और धर्म का समीकरण हमेशा से सबसे मजबूत कड़ी रहा है। सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने का रास्ता अक्सर इनकी गणित से होकर गुजरता है। खासकर बिहार जैसे राज्य में, जहां हर विधानसभा सीट पर जातीय संतुलन चुनाव का नतीजा तय करता है। वनइंडिया की खास सीरिज "जाति की पाति" के तहत हम उन नेताओं के बारे में बात कर रहे हैं, जिनकी जाति, समाज और पारिवारिक पृष्ठभूमि ने उन्हें राजनीति में पहचान दिलाई। इस कड़ी में आज जानिए भाजपा नेता डॉ. संजय जायसवाल की पूरी कहानी-आरोपों से लेकर उनकी जाति और राजनीतिक सफर तक।

प्रशांत किशोर का बड़ा आरोप: 'पेट्रोल चोरी'
प्रशांत किशोर ने बेतिया और आरा की सभाओं में कहा कि भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने वर्षों तक पेट्रोल-डीजल चोरी कर जनता का नुकसान कराया। PK ने दावा किया कि बेतिया की मेयर गरिमा देवी ने नगर आयुक्त को पत्र लिखकर पेट्रोल पंप के पेमेंट पर रोक लगाने की बात कही थी, क्योंकि बिल असल खपत से कहीं ज्यादा दिखाया गया था।
उन्होंने जनता के सामने यह भी कहा कि जायसवाल ने अपने फायदे के लिए 10 साल तक बेतिया का फ्लाईओवर नहीं बनने दिया। PK का आरोप था-"तेल चोरी में इनकी सीधी संलिप्तता है।"
किस जाति से आते हैं संजय जायसवाल? (Sanjay Jaiswal caste)
संजय जायसवाल बिहार के कलवार समुदाय से आते हैं। कलवार जाति को राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) में रखा है। यह समुदाय परंपरागत रूप से व्यापारी रहा है और खासतौर पर शराब के व्यापार में इनकी ऐतिहासिक भूमिका रही है।
बिहार में जायसवाल उपनाम मुख्य रूप से कलवार जाति से जुड़ा है। हालांकि, देश के अलग-अलग हिस्सों में यह उपनाम जैन और राजपूत समुदाय के लोग भी इस्तेमाल करते हैं, लेकिन बिहार की राजनीति और समाज में यह जाति मुख्य रूप से कलवार बनिया के तौर पर जानी जाती है।
हाल ही में हुई जातिगत जनगणना (2022) के मुताबिक, कलवार समाज की आबादी करीब 18 से 20 लाख है, जो बिहार की कुल जनसंख्या का लगभग 1.5% हिस्सा है।

कौन हैं डॉ. संजय जायसवाल? (Who is Sanjay Jaiswal)
डॉ. संजय जायसवाल का जन्म 29 नवंबर 1965 को बेतिया, पश्चिम चंपारण में हुआ था। उनके पिता मदन प्रसाद जायसवाल भी भाजपा से सांसद रह चुके हैं। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े संजय जायसवाल ने मेडिकल की पढ़ाई की। उन्होंने पटना मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस और दरभंगा मेडिकल कॉलेज से एमडी की डिग्री हासिल की।
2009 में वे पहली बार पश्चिम चंपारण से सांसद चुने गए। इसके बाद 2014, 2019 और 2024 में लगातार जीत दर्ज की। 2019 से 2023 तक उन्होंने बिहार भाजपा अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो उनका विवाह मंजू चौधरी से हुआ है और उनके एक बेटा और एक बेटी हैं।
राजनीतिक सफर और जिम्मेदारियां
सांसद रहते हुए संजय जायसवाल कई अहम समितियों से जुड़े रहे। वह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की परामर्श समिति, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण समिति और जेआईपीएमईआर, पांडिचेरी की गवर्निंग बॉडी के सदस्य रह चुके हैं। वर्तमान में वे संसद की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष हैं और एम्स पटना के गवर्निंग बॉडी के सदस्य भी हैं।
मानहानि नोटिस से बढ़ी तनातनी
इन आरोपों के बाद संजय जायसवाल ने चुप्पी तोड़ी और प्रशांत किशोर को मानहानि का नोटिस भेज दिया। जायसवाल का कहना है कि असल घोटाले की जड़ कहीं और है। उन्होंने बेतिया की मेयर गरिमा देवी और उनके परिवार पर उंगली उठाते हुए आरोप लगाया कि नगर निगम की गाड़ियों में भरा गया डीजल वार्ड पार्षद रोहित सिकारिया के गोदाम में पहुंचाया जाता था। वहां से तेल निकालकर बेचा जाता और फिर गाड़ियां पार्किंग में लौटाई जातीं। जायसवाल ने पूछा कि आखिर मेयर ने इस घोटाले की जांच क्यों नहीं कराई, जबकि सबूत समिति के पास मौजूद हैं।

प्रशांत किशोर की डिमांड: नीतीश बर्खास्त करें नेताओं को
आरोपों के बाद PK यहीं नहीं रुके। उन्होंने साफ कहा कि अगर डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी, मंत्री अशोक चौधरी और मंगल पांडेय सफाई नहीं देंगे तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करना चाहिए। उन्होंने नीतीश को याद दिलाया कि जब तेजस्वी यादव ने आरोपों पर सफाई नहीं दी थी तो उन्होंने गठबंधन तोड़ लिया था। ऐसे में यही कसौटी एनडीए के नेताओं पर भी लागू होनी चाहिए।
आरोपों से घिरी सियासत
संजय जायसवाल लंबे समय से भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं और उनकी पहचान एक मजबूत संगठनकर्ता की रही है। लेकिन PK के हालिया आरोपों ने उनकी छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर PK लगातार जनता के बीच इन मुद्दों को उठा रहे हैं, दूसरी ओर जायसवाल इन्हें राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप नया नहीं है, लेकिन जब यह लड़ाई सीधे नाम लेकर और सबूतों के साथ हो, तो हलचल तेज हो जाती है। संजय जायसवाल के खिलाफ PK के आरोप अब सिर्फ एक बयानबाजी नहीं, बल्कि कानूनी जंग का रूप ले चुके हैं। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता किसे सच मानती है-PK के आरोपों को या जायसवाल की सफाई को।
अब सवाल यह है कि क्या यह विवाद केवल चुनावी हथियार है या सच में इसमें कोई दम है? एक बात तय है कि संजय जायसवाल और कलवार समाज का नाम इस विवाद के बाद बिहार की राजनीति में और ज्यादा गूंजने लगा है।












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