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बिहार: घोटाले के आरोप में जदयू विधायक पर दर्ज हुआ मुकदमा, कभी भी हो सकते हैं गिरफ्तार

जदयू विधायक मेवालाल चौधरी के खिलाफ बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में हुए नियुक्ति घोटाले के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

पटना। बिहार में चल रही महागठबंधन की सरकार में शामिल सभी दल के नेताओं की करतूतों से राज्य सरकार की लगातार किरकिरी हो रही है। जब से बिहार में महा-गठबंधन की सरकार बनी है तभी से कभी राजद तो कभी कांग्रेस तो कभी जदयू तीनों दलों के कोई न कोई नेता अपनी करतूतों की वजह से सरकार की छवि धूमिल करते आए हैं। जहां कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष बृजेश पांडे पर सेक्स रैकेट चलाने का आरोप लगा है। वहीं, अब जदयू के मुंगेर जिले के तारापुर से विधायक मेवालाल चौधरी पर घोटाले के आरोप में मामला दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी के लिए तैयारी की जा रही है। जदयू विधायक मेवालाल चौधरी के खिलाफ बिहार कृषि विश्वविद्यालय सबौर में हुए नियुक्ति घोटाले के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में सबौर थाना में कांड संख्या 35/17 भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120 बी, के तहत एफ़आईआर दर्ज की गई है।

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मिली जानकारी के अनुसार, जदयू विधायक मेवालाल चौधरी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति भी रह चुके हैं और अब वे मुंगेर जिले के तारापुर के जदयू विधायक हैं। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद के आदेश पर कुलपति डॉक्टर अजय कुमार सिंह ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश सबौर थाना के थानाध्यक्ष को दिया था। कुलपति के आदेश पर मामला दर्ज करते हुए मामले में मुख्य आरोपी मेवा लाल चौधरी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस तैयारी कर रही है। इस घोटाले के चलते वे कभी भी गिरफ्तार किए जा सकते हैं। बता दें कि 20 साक्षात्कार कमेटियों ने 161 अभ्यर्थियों का चयन किया था जिसमें विश्वविद्यालय के 30 से ज्यादा पदाधिकारी शामिल थे। वहीं, इस मामले में पूर्व कुलपति और जदयू के विधायक मेवा लाल चौधरी ने अपने ऊपर दर्ज किए गए मामले और आरोप को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही उन्होंने कहा कि उन्हें राजनीतिक षड्यंत्र के तहत मामले में फसाया जा रहा है। क्योंकि विश्वविद्यालय में हुई नियुक्ति में उनकी कोई भूमिका नहीं थी। नियुक्ति के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया गया था जिसने पूरा सिलेक्शन किया और खुद को उस कमेटी का केवल अध्यक्ष बताया। मेवा लाल ने इस मामले में खुद को गलत तरीके से फसाने की बात कही है और इस मामले को लेकर कोर्ट में जाने की बात कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बीएयू में वर्ष 2012 में 161 सहायक प्राध्यापक और वैज्ञानिकों की नियुक्ति की गई थी। इस नियुक्ति में भी अनियमता की बात सामने आई और नियुक्ति के लिए 15 से 20 लाख रुपए मांगे जाने की भी बात सामने आई थी। कैंडिडेटो ने आरोप लगाया था कि इस नियुक्ति के लिए पैसे की बोली लगाई जा रही है। जिसने पैसा दिया उसकी नियुक्ति हो गई। इसका सबूत कम योग्यता वाले अभ्यार्थियों की नियुक्ति हो जाने को लेकर पेश किया गया। उनका आरोप था कि योग्य अभ्यार्थियों को साक्षात्कार और प्रोजेक्ट में बेहद कम अंक देकर अयोग्य करार दिया गया था। इसी मामले मे अब जदयू के विधायक मेवा लाल चौधरी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और उनकी गिरफ्तारी की तैयारी की जा रही है। सूत्रों की अगर मानें तो उन्हें कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है। ये भी पढ़ें: पढ़िए बिहार में एक बडे़ घोटाले का सच, मामूली क्लर्क कैसे बना कुबेर

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