बिहार: इस गांव में शौचालय बनाते ही घर के सदस्य की हो जाती है मौत, सब जाते हैं खुले में
बिहार इस गांव में शौचालय बनाते ही घर के सदस्य की हो जाती है मौत
पटना। खुले मे शौच को लेकर देशभर में सरकारें अभियान चल रही हैं। लेकिन बिहार के नवादा में एक गांव ऐसा भी हैं, जहां सुख-सुविधा के दूसरे सामान तो घरों में हैं लेकिन पूरे गांव में एक भी शौचालय नहीं है। इसकी वजह भी चौंकाने वाली है। गांव वालों का कहना है कि जिस घर में भी शौचालय बनेगा उस घर में किसी की मौत हो जाएगी, वो पहले भी इस तरह के हादसे होने की बात कहते हैं।


जिला मुख्यालय से महज 14 किमी दूर है गांव
नवादा के गाजीपुर गांव में एक भी शौचालय नहीं है, गांव की जिला मुख्यालय से दूरी भी मात्र 14 किमी ही है। गांव की आबादी करीब दो हजार है। गांववासियों के मन में शौचालय को लेकर अंधविश्वास की शुरुआत 1984 में शुरू हुई, जो इस कदर गांववालों के बीच बैठ गई कि गांव में कोई शौचालय बनाने को तैयार ही नहीं भले भी आप फ्री में इसे बनवाएं या कोई ईनाम भी क्यों ना दें।

क्या हुआ था 1984 में?
ग्रामीणों बताते हैं कि गांव के किसान श्रीधेश्वर ने 1984 में अपने घर में टॉयलेट बनवाया तो उनके बेटे की मौत हो गई, कुछ दिन बाद एक अन्य परिवार ने टॉयलेट बनवाना शुरू किया तो उनके यहां भी एक मौत हो गई इसके बाद से गांववालों के मन में एक डर घर कर गया और किसी ने भी घर में शौचालय नहीं बनवाया। ग्रामीण कहते हैं कि 2015 में गांव के सार्वजनिक शौचालय के इस्तेमाल करने वाले एक शख्स की भी मौत हो गई। यहां तक कि सरकारी स्कूल के शौचालय में भी कोई नहीं जाता।

कई कोशिशे हुईं लेकिन ग्रामीण तैयार नहीं
गाजीपुर में कई जातियों के लोग रहते हैं, गांव के कई लोग सरकारी नौकरी में हैं। कई दिल्ली-मुंबई में नौकरी भी करते हैं। गांव में सड़क हैं, बिजली भी 14 घंटे आती है। काफी घरों में इंवर्टर, फ्रिज, वॉशिंग मशीन भी हैं लेकिन शौचालय को लेकर हर जाति के लोगों में डर है। मामले पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह भी गांव आकर लोगों को समझाने की बात कह चुके हैं। तो वहीं शौचालय ना होने की वजह से लड़कों के रिश्ते में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।












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